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राज्य के पांच हजार शिक्षकेतर कर्मियों को नहीं मिल रहा एसीपी-एमएसीपी का लाभ

1996 से नियुक्त कर्मचारियों को मिलना है एसीपी, पांचवीं वेतनमान की राशि भी शेष

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Ranchi: राज्य में जितना विद्यार्थियों के समक्ष शिक्षा और रोजगार की समस्या है. उतनी ही राज्य के कर्मचारियों के समक्ष भी अपने भविष्य निर्धारण को लेकर समस्याएं है. राज्य सरकार अपने वायदों से मुकरती जाती है, ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय की बात मानना भी सरकार जरूरी नहीं समझती. वर्ष 2013 में सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश आया था कि किसी भी राज्य के शिक्षकेतर कर्मचारी केंद्रीय कर्मचारी के समान ही सारी सुविधाएं पाने के हकदार है.

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इसके साथ ही आदेश में कहा गया था कि सरकार हर राज्य के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारी के समान ही सुविधाएं दें. लेकिन इसके विपरित सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को पांच साल हो गये, अब तक झारखंड राज्य के छह विश्वविद्यालय के शिक्षकेतर कर्मचारियों को एसीपी; सुनिश्चित वेतनमान वृद्धि और एमएसीपी; संशोधित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना का लाभ नहीं दिया गया. जबकि राज्य के छह विश्वविद्यालय को मिला कर लगभग 5000 शिक्षकेतर कर्मचारी हैं, जो एसीपी और एमएसीपी के लाभ से वंचित हैं.

1996 से मिलना है एसीपी और एमएसीपी

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में 1996 से नियुक्त शिक्षकेतर कर्मचारियों को एसीपी और एमएसीपी का लाभ दिया जाना है. लेकिन राज्य में 1996 के बाद से नियुक्त शिक्षकेतर कर्मचारियों को अब तक एक भी एमसीपी और एमएसीपी का लाभ नहीं दिया गया. विगत कुछ सालों से राज्य के छह विश्वविद्यालय के शिक्षकेतर कर्मचारी इसे लेकर लगातार आंदोलनरत भी है. लेकिन अब तक इनके मांगों पर राज्य सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की गयी है.

आंदोलन के मूड में कर्मचारी

एसीपी और एएसीपी का लाभ नहीं मिलने, और सरकार की अनदेखी से परेशान शिक्षकेतर कर्मचारी आंदोलन के मूड में नजर आ रहे हैं.  झारखंड विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के महामंत्री सुदर्शन पांडेय ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर शिक्षकेतर कर्मचारी संघ चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं. वही इस कड़ी में कर्मचारी 18 दिसंबर से अनशन करेंगे.

पांचवीं वेतनमान की राशि भी शेष

कई शिक्षकेतर कर्मचारियों ने बताया कि वर्ष 1996 से 2000 के बीच पांचवीं वेतनमान की राशि अब तक शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को नहीं दी गयी है. जिससे अधिक संख्या में कर्मचारी प्रभावित हैं. राज्य में शिक्षकेतर व कर्मचारियों की नियुक्ति पदानुसार की जाती है, जिन्हें पांच हजार से सात हजार शुरुआती वेतन दिया जाता है. जिनमें तृतीय वर्ग के क्लर्क, सहायक, लिपिक आदि आते हैं.

क्या है एसीपी और एमएसीपी

सुनिश्चित वेतनमान वृद्धि; एसीपी और संशोधित वेतनमान वृद्धि; एमएसीपी किसी भी तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारी को दी जाती है. जिन्हें उनके नियुक्ति से लेकर दस से बारह साल तक यदि पदोन्नति नहीं दी जाती है.

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