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पटना में एक बेड के लिए 50 हजार, अस्पताल के खिलाफ एफआईआर

Patna: राजधानी पटना में मरीजों से प्राइवेट अस्पतालों द्वारा मनमाना पैसा लेने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. मंगलवार को जिला प्रशासन ने ऐसे ही एक मामले में बाइपास स्थित सारांश हॉस्पिटल पर मुकदमा दर्ज किया है.

एक मरीज ने शिकायत की था कि अस्पताल प्रबंधन ने उससे एक बेड के लिए 50 हजार वसूले हैं. उक्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की है और चार अन्य प्राइवेट अस्पतालों को नोटिस जारी किया है.

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सोमवार को भी भागलपुर की रहने वाली सॉफ्टवेयर इंजीनियर रौशन चंद्र दास की पत्नी रुचि रौशन ने पटना और भागलपुर के प्राइवेट अस्पताल प्रबंधनों पर पैसा के लिए ऑक्सीजन बंद करने और पति के इलाज के दौरान डॉक्टर पर छेड़खानी का आरोप लगाया था.

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कोविड-19 के नोडल अधिकारी प्रवीण कुंदन ने बताया कि एक मरीज ने शिकायत किया था कि बाइपास स्थित सारांश हॉस्पिटल में एक बेड के लिए 50 हजार रुपए उनसे वसूला गया है. दूसरे दिन के लिए 30 हजार मरीज को देने पर मजबूर किया गया.

मरीज की शिकायत पर इस मामले की छानबीन की गई तो पता चला कि अस्पताल में उससे पैसा ही नहीं लिया, बल्कि उसे कच्चा रसीद दिया है, जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं है. इस मामले में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आपदा अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.

अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों के भी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है. ताकि पता चल सके कि और कितने मरीजों से अस्पताल प्रबंधन ने राज्य सरकार द्वारा निर्धारित राशि से अधिक पैसा वसूला गया है.

उन्होंने बताया कि इसके साथ ही बाइपास के दो, कंकड़बाग और राजेंद्र नगर के एक अस्पताल के खिलाफ भी शिकायत मिला था उनको भी नोटिस जारी किया गया है, क्योंकि इन अस्पताल प्रबंधन पर भी मरीज से मनमाने तौर पर पैसा लेने का आरोप लगाया गया है.

इन अस्पतालों की भी जांच हो रही है. पिछले एक सप्ताह में पटना के 4 प्राइवेट अस्पतालों पर ऐसे ही मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है.

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बेड बेच रहे हैं अस्पताल

जिला प्रशासन की ओर से की गई छानबीन में यह भी पता चला है कि प्राइवेट अस्पताल अपने यहां कुछ बेड को सुरक्षित रखते हैं ताकि उसे दिखाकर मरीजों से अधिक पैसा लिया जा सके. यह शिकायत बाइपास के कई प्राइवेट अस्पतालों के संबंध में मिलने के बाद जिला प्रशासन की ओर से किए गए जांच में सामने आए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि बार बार सूचीबद्ध अस्पतालों में बेड खाली रहने की सूचना भी प्रशासन को नहीं दी जाती है. ताकि एक बेड के लिए मरीजों से मनमाना पैसा लिया जाता है.

अभी पता चला है कि अस्पतालों की गार्ड और एंबुलेंस चालक की भी मिलीभगत है, जो मरीजों को बहला-फुसलाकर बेड दिलाने का काम कर रहे हैं. इन सब पहलू पर जांच हो रही है.

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महिला ने पैसा के लिए ऑक्सीजन बंद करने का लगाया था आरोप

भागलपुर की रहने वाली महिला ने सोमवार को पटना और भागलपुर के प्राइवेट अस्पताल प्रबंधनों पर पैसा के लिए ऑक्सीजन बंद करने और पति के इलाज के दौरान डॉक्टर पर छेड़खानी का आरोप लगाया था.

उन्होंने कहा था कि मैं उसे इसलिए इग्नोर करती रही कि मेरे पति भर्ती थे. ति का इलाज तो केवल कागजों पर होता रहा. कोई देखने तक नहीं आता था.

मैं चाहती हूं कि जिस तरह मेरे पति की मौत हुई, वैसे अन्य लोग जान न गंवाएं. डॉक्टर के भरोसे मरीज को नहीं छोड़ा जा सकता. मेरे पति को वेटिंलेटर पर रखा जाता तो शायद वे बच जाते.

इन नंबरों पर दर्ज कराएं शिकायत

  • गौतम कुमार 88529 6963
  • राजीव कुमार अवर निरीक्षक 963029006
  • विश्वजीत दास गुप्ता 9934491079
  • प्रवीण कुंदन वरीय उप समाहर्ता 8130697072

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