Education & CareerJharkhandJharkhand StoryRanchi

HIGHER EDUCATION में पिछड़े हैं झारखंड के 50 फीसदी जिले, जानें किसका है इस सूची में नाम

Ranchi: उच्चतर शिक्षा के मामले में झारखंड के 50 फीसदी जिलों के सामने चुनौती बनी हुई है. राज्य के 12 जिले (Educationally Back word District) ऐसे हैं जहां इसे लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग चिंताएं जाहिर कर चुका है. यूजीसी द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति ने देश भर के 374 ऐसे पिछड़े जिलों की पहचान की है जो उच्च शिक्षा के लिहाज से पिछड़े जिलों में शामिल हैं. इनमें झारखंड के 12 जिले भी शामिल हैं. ये जिले उन जिलों में शामिल हैं जहां उच्चतर शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 2001 की जनगणना के आधार पर 12.4 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से भी कम था. देश भर में ऐसे जिलों में सबसे अधिक संख्या यूपी (41 जिले) और मध्य प्रदेश (39) जैसे जिलों की है. इस सूची में लक्षद्वीप, दादर और नगर हवेली, नागालैंड, पुडुचेरी के 1-1 जिले शामिल हैं.

इसे भी पढ़े: रांची:कॉलेज ऑफ फिशरीज साइंस के चार छात्रों ने जीता बेस्ट बिजनेस आईडिया का पुरस्कार

किन- किन जिलों में स्थिति चिंताजनक

लोकसभा के चालू मॉनसून सत्र में सांसद एस ज्ञानतिरावियम ने शिक्षा मंत्रालय से जानकारी मांगी थी कि क्या सरकार ने एससी, एसटी बहुल क्षेत्रों में शैक्षणिक रूप से पिछड़े जिलों की पहचान की है. इसके ब्यौरे के साथ पिछले पांच वर्षों में ऐसे जिलों के विकास के लिये सरकार के स्तर से उठाये गये कदमों के बारे में जानकारी भी मांगी थी. इस पर मंत्रालय ने बताया कि यूजीसी ने पूर्व में शैक्षणिक रूप से पिछडे 374 जिलों की पहचान की थी. इसमें विशेषज्ञों से मदद ली गयी थी. इसके मुताबिक झारखंड के 24 में से 12 जिले इस सूची में हैं. इनमें चतरा, देवघऱ, दुमका, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, गुमला, कोडरमा, पाकुड़, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम और साहेबगंज शामिल हैं.

Sanjeevani

दूसरे राज्यों की स्थिति

मंत्रालय के मुताबिक 374 जिलों की सूची में सबसे अधिक यूपी के 41 जिले हैं. इसके अलावे मध्य प्रदेश के 39, राजस्थान के 30, तमिलनाडु के 27, बिहार के 25, गुजरात, कर्नाटक के 20-20, ओड़िशा के 18, पश्चिम बंगाल के 17, छत्तीसगढ़ के 15, पंजाब के 13, असम के 12, आंध्र प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के 11-11, महाराष्ट्र और मिजोरम के 7-7, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मेघालय के 5, केरल, सिक्किम और त्रिपुरा के 4-4 जिले शामिल हैं. अंडमान निकोबार द्वीप, दमन और दीव तथा उत्तराखंड में 2-2 के अलावे पुडुचेरी, दादर और नगर हवेली, लक्षद्वीप में 1-1 जिले इस लिस्ट में हैं.

केंद्र से मदद
मंत्रालय ने शैक्षणिक रूप से पिछड़े जिलों के मामले में यह भी कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची में शामिल है. ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना केंद्र और राज्य सरकार, दोनों की जिम्मेदारी है. बावजूद इसके राज्यों को केंद्रीय सहायता की आवश्यकता को देखते केंद्र ने मदद दी है. सहायता के लिये विभिन्न योजनाओं को लागू किया है. राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (आरयूएसए) की केंद्र प्रायोजित योजना को अन्य बातों के साथ-साथ हायर एजुकेशन द्वारा पहुंच, समानता और गुणवत्ता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू किया जा रहा है. यह योजना राज्यों को मॉडल डिग्री कॉलेजों के निर्माण, कॉलेज और यूनिवर्सिटियों को अवसंरचना अनुदान के लिये केंद्रीय सहायता प्रदान करती है. रूसा (आरयूएसए) परियोजना बोर्ड ने देश में चिन्हित ईबीडी में विभिन्न घटकों के तहत पिछले पांच वर्षों में (2017-18 से 2021-22) की अवधि में 2477 करोड़ रुपये की राशि की स्वीकृति दी है.

Related Articles

Back to top button