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45,000 करोड़ का #Submarine_Project अडाणी ग्रुप के हाथ नहीं लगा, लार्सन एंड टुब्रो के हाथ बाजी लगने की खबर  

निविदा के पहले चरण में अडाणी ग्रुप का चयन नहीं किया गया था, लेकिन सूत्रों के अनुसार मंत्रालय की ओर से उसे शामिल करने का दबाव था.

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NewDelhi : 45,000 करोड़ के सबमरीन प्रोजेक्ट हासिल करने में अडाणी ग्रुप को पीछे छोड़ते हुए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो ने बाजी मार ली है.

खबर है कि   रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए भारत में छह पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण से जुड़ी 51 हजार करोड़ रुपये की परियोजना के लिए दो भारतीय और पांच बड़ी विदेशी कंपनियों का चयन किया है.

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DAC के इस फैसले से अडाणी ग्रुप को बड़ा झटका

बताया गया है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने मंगलवार, 21 जनवरी को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो (L & T) को भारतीय रणनीतिक साझेदारों के रूप में चुना.

45,000 करोड़ रुपये की छह पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए इन कंपनियों का चयन किया गया है.  DAC के इस फैसले से अडाणी ग्रुप को बड़ा झटका लगा है.

जान लें कि निविदा के पहले चरण में अडाणी ग्रुप का चयन नहीं किया गया था, लेकिन सूत्रों के अनुसार मंत्रालय की ओर से उसे शामिल करने का दबाव था. जैसी कि खबर है, अडाणी ग्रुप ने सार्वजनिक क्षेत्र के हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के साथ साझेदारी में इस प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाई थी.

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अडाणी ग्रुप अपेक्षित मानदंडों को पूरा नहीं कर रहा था

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लेकिन भारतीय नौसेना के सूत्रों के अनुसार कंपनी अपेक्षित मानदंडों को पूरा नहीं कर रही थी. आधिकारिक सूत्रों ने जानकरी दी है कि पी-75 आई नामक इस परियोजना के लिए मजबूत दावेदार मानी जा रही अडाणी डिफेंस योग्यता मानदंडों के मूल्यांकन के बाद उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा उपयुक्त नहीं मानी गयी.

  स्वदेशी स्रोतों से 5,100 करोड़ के सैन्य साजो-सामान की खरीद को भी स्वीकृति  

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रक्षा खरीद परिषद (डीएएसी) ने स्वदेशी स्रोतों से 5,100 करोड़ रुपये के सैन्य साजो-सामान की खरीद को भी स्वीकृति प्रदान कर दी.  इनमें सेना के लिए डीआरडीओ द्वारा डिजाइन और भारतीय उद्योग द्वारा स्थानीय स्तर पर निर्मित की गयी अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां शामिल हैं.

अधिकारियों ने बताया कि प्रणालियां रेगिस्तान और मैदानी इलाकों में इस्तेमाल की जायेंगी और ये जमीनी टुकड़ियों को समग्र इलेक्ट्रॉनिक मदद तथा जवाबी कदम क्षमताएं उपलब्ध करायेंगी.  मंत्रालय ने कहा है कि डीएसी ने भारतीय रणनीतिक भागीदारों और संभावित मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) के चयन को भी मंजूरी दी जो रणनीतिक भागीदारी मॉडल के तहत भारत में छह पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण का कार्य करेंगे.

बैठक में CDS बिपिन रावत और अन्य शीर्ष अधिकारी  मौजूद थे

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डीएसी की बैठक में यह निर्णय लिये गये हैं,  जिनमें प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत और अन्य शीर्ष अधिकारी भी मौजूद थे.  पी-75 आई परियोजना के लिए चुनी गयी पांच विदेशी कंपनियों में थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (जर्मनी), नवंतिया (स्पेन) और नेवल ग्रुप (फ्रांस) भी शामिल हैं.

जान लें कि भारतीय नौसेना पानी के भीतर अपनी मारक क्षमता को मजबूत करने के लिए छह परमाणु पनडुब्बियों सहित 24 नयी पनडुब्बियां खरीदना चाहती है.  प्रमुख रक्षा अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद डीएसी की यह पहली बैठक थी.

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