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फाइलों में दबी 42 हजार झारखंड आंदोलनकारियों की अर्जी

  • झारखंड आंदोलनकारी चिह्नितीरण आयोग को नहीं मिला विस्तार
    मात्र चार हजार आंदोलनकारियों की हो पायी है पहचान

Ranchi : झारखंड आंदोलनकारियों के चिह्नितीकरण का काम एक साल से ठप पड़ा है. वजह झारखंड/वनांचल आंदोलनकारी चिह्नितीकरण आयोग का कार्यकाल 8 अगस्त 2019 को समाप्त हो गया था. इसके बाद आयोग का न तो पुनर्गठन हुआ और न ही आयोग को विस्तार मिला.

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बता दें कि राज्य के विभिन्न जिलों से 62000 आंदोलनकारियों के आवेदन मिले थे. इनमें से अभी तक 20,000 आवेदन की स्क्रूटिनी हो पायी है. अभी तक 4000 आंदोलनकारियों को ही चिह्नित किया जा सका है. इनमें से ही कुछ आंदोलनकारियों को सम्मान, पेंशन या किसी भी तरह की और सुविधा मिल सकी है. आयोग के पास अभी भी 42000 आंदोलनकारियों के आवेदन लंबित पड़े हैं. इसके अलावा हजारों की संख्या में और भी ऐसे आवेदन हैं, जो जिलों में लंबित पड़े हैं.

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1300 आंदोलनकारी पा रहे हैं पेंशन

झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा के संयोजक मुमताज अहमद खान ने बताया कि जिन 4000 आंदोलनकारियों को चिह्नित किया गया है, उनमें से 1300 लोगों को पेंशन मिल पायी है. अभी तक पेंशन के मद में 25 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गयी है. पेंशन उन्हीं को मिल रही है, जो आंदोलन के क्रम में जेल गये थे.

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मुमताज अहमद खां ने मांग की है कि आयोग का पुनर्गठन हो या उसे सेवा विस्तार दिया जाये, ताकि अन्य आवेदनों की स्क्रूटिनी भी जल्दी हो सके. इसके अलावा 15 नवंबर को सभी विख्यात आंदोलनकारियों को सम्मानित भी किया जाना चाहिए. मुमताज अहमद खान ने बताया कि जल्दी ही आंदोलनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बातों को रखेगा.

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28 अक्टूबर को धरना देगा दूसरा संगठन

झारखंड आंदोलनकारियों का एक अन्य संगठन झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा अपनी लंबित मांगों को लेकर 28 अक्टूबर को मोरहाबादी मैदान में धरना देगा. मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष राजू महतो ने इस मुद्दे पर पिछले दिनों विधायक मथुरा महतो से मुलाकात की. इस दौरान झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मानित करने, गजट में नाम प्रकाशित करने, नौकरी, भत्ता सहित अन्य मांगों पर विचार किया गया. राजू महतो ने कहा कि अगर आंदोलनकारियों के मान-सम्मान पर ध्यान नहीं दिया गया, तो चरणबद्ध आंदोलन किया जायेगा.

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