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राज्य में सक्रिय 42 नक्सलियों के फर्जी बैंक खातों में 57 करोड़ जमा, जानकारी के बावजूद कार्रवाई नहीं

Ranchi: झारखंड में सक्रिय 42 नक्सलियों के करीब 57 करोड़ रुपए राज्य के अलग-अलग बैंकों में फर्जी खाते में जमा है. झारखंड में अलग-अलग नक्सली संगठनों के नक्सलियों ने लेवी से वसूले करोड़ों रुपए को राज्य के अलग-अलग बैंकों के फर्जी खाते में जमा कर रखे हैं.

साल 2015 और 2016 में खुफिया विभाग ने झारखंड पुलिस मुख्यालय को नक्सलियों के बैंक में फर्जी खाते की डिटेल दी थी. इसके बावजूद भी राज्य की पुलिस ने नक्सलियों के बैंक में फर्जी खाते फ्रीज नहीं किये हैं.

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झारखंड के अलग-अलग बैंकों के फर्जी खाते में सबसे ज्यादा टीपीसी नक्सलियों के रूप में जमा है. उसके बाद पीएलएफआई और भाकपा माओवादी के रुपया जमा है. जांच क्रम में पता चला है कि 16 नक्सली ऐसे हैं जिनके ऊपर इनाम घोषित है उन्होंने भी बैंक में फर्जी खाता खुलवाया है.

खुफिया विभाग ने दी थी पुलिस मुख्यालय को बैंक डिटेल

राज्य पुलिस ने झारखंड में सक्रिय नक्सलियों के अलग-अलग बैंकों में फर्जी अकाउंट में जमा करोड़ों रुपए को फ्रीज नहीं किया है. इसका खुलासा इससे होता है कि खुफिया विभाग ने साल 2015 और 2016 में राज्य पुलिस मुख्यालय को नक्सलियों के द्वारा राज्य के अलग-अलग बैंकों के फर्जी खाते में जमा किए गए रुपए की सारी जानकारी दी गई थी.

इसके बावजूद भी राज्य पुलिस बैंक खाते को फ्रीज नहीं किया. कार्रवाई के नाम पर कुछ खाते तो सील किये गये. लेकिन कई नक्सलियों के खाते आज भी चालू है.

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बढ़ रहे नक्सलियों के आय स्रोत

झारखंड के नक्सली अब करोड़पति बन रहे हैं. महानगरों में तो संपत्ति है ही, उनके बच्चे भी विदेशों में पढ़ रहे हैं. पुलिस हमेशा नक्सलियों के सफाये की बात तो करती है, लेकिन आज तक खत्म नहीं हो पाया है.

इसके साथ ही उनके आय के स्रोत भी बढ़ रहे हैं. रांची, चतरा, हजारीबाग, गढ़वा और लातेहार जिले के खदानों पर नक्सली संगठनों ने अपनी पूरी पकड़ बना ली है.

चतरा में पुलिस व प्रशासन की नाक के नीचे से कोयला उठाने वाले ट्रकों से कमेटी (टीपीसी) के नक्सली पैसे वसूलते हैं. जबकि विस्थापितों के नाम पर 13 हजार एकड़ में फैले मगध और आम्रपाली प्रोजेक्ट भी बनाया गया, इसके बाद भी वसूली के लिए योजनाबद्ध तरीके से नक्सलियों का नेटवर्क काम कर रहा है.

फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट करेगी सहयोग

झारखंड में नक्सलियों ने लेवी के करोड़ों रुपए बैंकों में फर्जी एकाउंट खुलवाकर जमा किए हैं. लेवी की राशि से रांची सहित बड़े शहरों में चल-अचल संपत्ति बनाई है. कई नक्सली इस पैसे से बड़े कारोबारी, ठेकेदार और ट्रांसपोर्टर बन गए हैं.

एनआईए, आईबी, सीआईडी, ईडी और राज्य पुलिस ऐसे नक्सलियों के बैंक खाते की जांच कर रही है. जिसमें जांच एजेंसियों को कई तकनीकी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जिसके लिए फाइनेंसियल इंटेलिजेंस यूनिट सहयोग करेगी.

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कोल व्यवसायी से लेकर बिजनेसमैन तक पहुंचा रहे लेवी

एनआईए, आईबी, ईडी और सीआईडी की नजर नक्सलियों के एक सौ से अधिक खाते पर है. ईडी की पटना इकाई भी उनके खाते की जांच कर रही है. नक्सलियों को लेवी से मिलने वाले सारे रुपए बैंकों के माध्यम से सफेद किये जा रहे हैं.

कई बड़े कोल व्यवसायी से लेकर बिजनेसमैन तक नक्सलियों के संपर्क सूत्र हैं. जो नक्सलियों को लेवी पहुंचाने का काम कर रहे हैं. नक्सलियों ने रांची, जमशेदपुर,चाईबासा,बोकारो, धनबाद और चतरा जैसे शहरों के बैंकों में फर्जी खाता खुलवाए हैं. कई फर्जी खातों के फ्रीज करने की अनुशंसा की गई है.

लेवी से वसूले रुपए पर चल रहा है संगठन

मिली जानकारी के अनुसार, 50 से ज्यादा नक्सली ठेकेदार ट्रांसपोर्टर और फाइनेंसर कारोबारी बन चुके हैं. कई बड़े नक्सली सरकारी सड़क और पुल बनवा रहे हैं. राज्य में सक्रिय माओवादी, टीपीसी, पीएलएफआई के उग्रवादियों के पास सबसे अधिक रुपए हैं.

नक्सलियों के द्वारा लेवी के रूप में वसूले गए रुपये से जहां नक्सली करोड़पति बन रहे हैं. वहीं इन लेवी के रुपए से नक्सली संगठन भी चल रहा है.

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