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बिना टेंडर के ही बोकारो डीसी आवास में बन गया 40 लाख का गौशाला, सचिव ने कहा जांच और कार्रवाई होगी

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  • मैनेज किये जायेंगे दो ठेकेदार, काम करा चुके ठेकेदार को दिया जायेगा काम
  • डीसी के तबादले के वक्त का था इंतजार

Ranchi/Bokaro: बोकारो जिले में भवन प्रमंडल ने एक कमाल का काम किया है. काम और किसी के नहीं बल्कि जिले के सबसे बड़े अधिकारी डीसी आवास में किया गया है. भवन प्रमंडल को अपनी करतूतों पर इतना भरोसा था कि काम पहले करवा लिया और टेंडर बाद में निकाला गया. दरअसल अधिकारी और दो ठेकेदार की सांठगाठ से बोकारो डीसी के आवास में एक गाय रखने के लिए शेड का निर्माण किया गया. बिना टेंडर के ही करीब 40 लाख का काम करा दिया गया. काम 2018 में ही हो चुका था. जबकि अभी तक टेंडर खुला भी नहीं है. टेंडर चार सितंबर को खुलना है. सिर्फ ठेकेदार को भुगतान करने के लिए यह टेंडर निकाला गया. तैयारी यह थी कि अगर कोई और ठेकेदार टेंडर डालेगा तो कोई ना कोई बहाना बना कर उस ठेकेदार का टेंडर रद्द कर दिया जाता.

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कैसे हुआ पूरा खेल

काम भले ही 2018 में ही हो चुका हो. लेकिन 11 अप्रैल 2019 को भवन निर्माण विभाग के सचिव से प्रशासनिक स्वीकृति मिलती है. लेकिन फिर भी टेंडर नहीं निकाला गया. दरअसल टेंडर निकालने के लिए सही टाइम का इंतजार किया जा रहा था. सही वक्त तब आया जब बोकारो डीसी केपी झा का तबादला हुआ. केपी झा के जाने और नये डीसी मुकेश कुमार के प्रभार लेने के बीच के समय को उपयुक्त समय माना गया. 19 अगस्त को डीसी का तबादला हुआ. 21 अगस्त को नये डीसी ने प्रभार लिया. दोनों डीसी सामान शिफ्टिंग में थोड़े व्यस्त हो गये. इसी बीच 22 अगस्त को टेंडर निकाल दिया गया.

तारीखों में समझें पूरी कहानी

27 सितंबर 2017 को बोकारो के तत्कालीन डीसी राय महिमापत रे ने डीसी के लिए बने नये आवास में प्रवेश किया. नौ फरवरी 2018 को मृत्युंजय कुमार बरनवाल ने बोकारो डीसी का प्रभार लिया. आठ मार्च 2018 को तत्कालीन डीसी मृत्युंजय कुमार बरनवाल ने विशेष प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को काम कराने के लिए लिखा. 22 सितंबर 2018 को बोकारो डीसी मृत्युंजय बरनवाल ने काम के पूरा होने का प्रमाण देते हुए भुगतान करने का निर्देश दिया. 29 दिसंबर 2018 को ठेकेदार ने सीधे सचिव से कार्य की स्वीकृति की मांग की. 26 फरवरी 2019 को सचिव ने अपनी तरफ से हरी झंडी दिखायी. जबकि टेंडर 22 अगस्त को 2019 को निकाला गया. टेंडर खुलने की तारीख चार सितंबर तय की गयी.

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कार्य 2018 में ही पूर्ण हो चुका है. प्रशासनिक स्वीकृति ही फरवरी 2019 में मिलीः कार्यपालक कार्यपालक अभियंता, भवन प्रमंडल बोकारो

मामले पर कार्यपालक अभियंता राजकुमार राणा ने बताया कि काम पूरा हो चुका है प्रक्रिया को पूर्ण करने के बाद ही काम होगा. टेंडर निकाला गया है. जिसने काम किया है अब उसकी जवाबदेही कि कैसे मैनेज करेगा.

कुछ भी गड़बड़ी हुई है, तो जांच होगीः सुनील कुमार, सचिव भवन निर्माण विभाग

मामले पर न्यूज विंग से बात करते हुए भवन निर्माण विभाग के सचिव सुनील कुमार ने कहा कि विभाग की तरफ से गाय के रहने के लिए कोई स्वीकृति नहीं दी गयी होगी. स्वीकृति सुरक्षा कारणों से दूसरे निर्माण कार्य के लिए दी गयी होगी. लेकिन मामले की जांच होगी. अधिकारियों से जांच करा कर जो भी दोषी पाये जायेंगे उन पर कार्रवाई होगी.

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