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कोरोना संकट में लौटे 4.71 लाख प्रवासी श्रमिक, JSLPS ने 4 लाख मजदूरों को खेती के काम से जोड़ा

  • 40 फीसदी प्रवासी श्रमिकों ने खेती के कामों में दिखायी थी रुचि

Ranchi: कोरोना संकट के बीच बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक झारखंड में अपने-अपने गांव-शहरों को लौटे. ग्रामीण विकास विभाग ने जेएसएलपीएस के जरिये इनका सर्वे कराया था.

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मिशन सक्षम एप के जरिये 4.71 लाख प्रवासियों का डाटा एप तैयार किया गया था. इनमें से लगभग 40 फीसदी ने खेती कामों से जुड़ने में रुचि दिखायी. इसे देखते हुए विभाग ने कृषि आधारित आजीविका की स्कीम पर काम किया है. इसमें करीब 4 लाख प्रवासियों को भी शामिल कर लिया गया है. अब वे खेती के कामों में लग गये हैं.

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15 लाख परिवारों को खेती से जोड़ने की योजना   

जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) के जरिये आजीविका संवर्धन की स्कीम पर काम किया जा रहा है. इसके जरिये इस साल सखी मंडल से जुड़े करीब 15 लाख परिवारों को कृषि आधारित आजीविका से जोड़ने का टारगेट है.

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इसमें बाहर से लौटे करीब 4 लाख प्रवासियों को भी शामिल किया गया है. कृषि आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के मकसद से सब्सिडी आधारित बीज बांटे जा रहे हैं.

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50 फीसदी सब्सिडी पर बीज

कृषि पशुपालन और सहकारिता विभाग के जरिये बीज विनिमय एवं वितरण कार्यक्रम एवं बीजोत्पादन योजना चलायी जाती है. इसका लाभ लिया गया है. इसके जरिये ग्रामीण परिवारों को सखी मंडल के जरिये 50 फीसदी सब्सिडी पर उन्नत नस्ल के बीज उपलब्ध कराये गये हैं.

राज्य भर में जेएसएलपीएस के जरिये अब तक करीब 2259.2 क्विंटल धान के बीज बांटे गये हैं. इसके बाद से रोपाई और दूसरे काम जारी हैं. दलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिये राज्य में 930.3 क्विंटल अरहर, 322.4 क्विंटल उड़द और करीब 26.5 क्विंटल मूंग के बीज का वितरण किया गया है. सखी मंडलों को रागी और मूंगफली के क्रमश 183.3 क्विंटल एवं 132.4 क्विंटल बीज बांटे गये हैं.

10,000 पीवीटीजी को पोषण वाटिका किट

राज्य में करीब 10,000 अति विशिष्ट आदिम जनजाति (पीवीटीजी) परिवारों पर भी विभाग की नजर है. आजीविका प्रोत्साहन और कुपोषण से राहत के लिये उनके बीच पोषण वाटिका किट का वितरण भी किया गया है. किट में कुपोषण से बचाव में मददगार विभिन्न साग-सब्जियों के बीज शामिल हैं.

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