न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

 366 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला हाईकोर्ट भवन का टेंडर आरके कंस्ट्रक्शन को देने के लिए दूसरी कंपनियों को गलत तर्क देकर अयोग्य बताया गया !

95

Ranchi: झारखंड में बहुमत वाली बीजेपी की सरकार आते ही महज तीन महीने के अंदर झारखंड हाईकोर्ट बनाने के लिए टेंडर निकाला गया था. राज्य के भवन निर्माण विभाग ने फरवरी 2015 में टेंडर प्रकाशित किया. टेंडर खुलने की तारीख 25 मार्च 2015 तय की गयी. सारी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद विभाग ने एक जून 2015 को  12 कंस्ट्रक्शन कंपनियों में से आरके सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड) को 265 करोड़ की लागत से बनने वाले झारखंड हाईकोर्ट के भवन को बनाने का काम सौंपा. भवन बनने की मियाद 17 सिंतबर 2017 तय हुयी. 2018 फरवरी महीने तक काम पूरा नहीं हुआ है. वहीं 265 करोड़ से बनने वाले इस भवन का बजट अब तब 366 करोड़ हो गया है. जिस तरह से बजट और समय बढ़ रहा है, अनुमान है कि भवन निर्माण का बजट और बढ़ेगा. न्यूज विंग यह दावा नहीं करता है कि इसमें कोई घोटाला हुआ है. लेकिन यह तय है कि टेंडर आवंटित करने की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं पूरी की गयी थी. यहां उल्लेखनीय है कि रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन और वर्तमान सरकार व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को लेकर राजनेताओं ने कई बार सवाल उठाया है. 

mi banner add

इसे भी पढ़ें – पीएनबी के बाद अब ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में 389 करोड़ का घोटाला, बैंक ने कहा- नीरव की तरह सभ्य सेठ भी भागे विदेश

इसे भी पढ़ें – क्या रघुवर दास भी दिल्ली की तरह झारखंड में भी अफसर को पीटने वाले विधायक साधुचरण महतो को गिरफ्तार करायेंगे !

झारखंड सरकार

मनचाही कंपनी को काम देने के लिए रद्द कर दी बाकियों की निविदा
आरके सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को काम देने के लिए नियमों को नजरअंदाज करने के आरोप लग रहे हैं. बाकी कंपनियों का टेंडर पेपर को  छोटी-छोटी कमियां बताकर रद्द कर दिया गया. ऐसी-ऐसी कंपनियों का टेंडर रद्द कर दिया गया, जिनका नाम राज्य स्तर पर ही नहीं बल्कि राष्ट्र स्तर पर है. एक एेसी कंपनी के पेपर को भी रद्द कर दिया जो सरकारी होने के साथ-साथ उसके पास उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट को बनाने का अनुभव भी था. बड़ी कंपनियों को किनारा करते हुए एक ऐसी कंपनी आरके सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को काम दिया गया, जिसका तजुर्बा दूसरी कंपनियों से  बहुत कम था. तकनीकी भाषा में कहा जाये तो काम एक ऐसी कंपनी को देना था, जिसे RCC Framed Government Building Structure बनाने का तजुर्बा हो. यह टेंडर देने के लिए जरूरी था. आरके सिंह कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को इस काम से पहले रांची के JSCA स्टेडियम बनाने का तजुर्बा था. बताते चलें कि JSCA स्टेडियम एक प्राइवेट संस्था BCCI का हिस्सा है. वो एक सरकारी संस्था नहीं है.  

इसे भी पढ़ें –BJP MP महेश पोद्दार ने कहा, सोलर पावर मामले में बरगलाया जा रहा है, प्रति यूनिट दर 2.94 रु. से कम होनी चाहिए, 5 रु. प्रति यूनिट खरदीना कितना जायज ?

इसे भी पढ़ें – पीएनबी के बाद अब ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में 389 करोड़ का घोटाला, बैंक ने कहा- नीरव की तरह सभ्य सेठ भी भागे विदेश

जानिए बड़ी-बड़ी कंपनियों को क्या कह कर किनारे किया
भवन बनाने के लिए देश भर से 12 कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने टेंडर डाला था. 12 कंपनियों में से आठ कंपनियों को 28 मई 2015 को भवन निर्माण विभाग ने छोटी-छोटी बातों का बहाना बना कर रद्द कर दिया.   

गैनन

–  Gannon Dunkerley & Co. Ltd, Mumbai, Maharashtra. इस कंपनी का टेंडर यह बोल कर रद्द कर दिया कि कंपनी ने टेंडर में अपना टर्न ओवर नहीं बताया है. जबकि कंपनी ने अपने 1923.26 करोड़ के टर्न ओवर से जुड़ी सारी कागजात विभाग को उपलब्ध करायी थी. बताते चलें कि विभाग ने टेंडर के लिए 401.49 करोड़ रुपया टर्न ओवर तय किया था. 

Related Posts

पूर्व सीजेआई आरएम लोढा हुए साइबर ठगी के शिकार, एक लाख रुपए गंवाये

साइबर ठगों ने  पूर्व सीजेआई आरएम लोढा को निशाना बनाते हुए एक लाख रुपए ठग लिये.  खबर है कि ठगों ने जस्टिस आरएम लोढा के करीबी दोस्त के ईमेल अकाउंट से संदेश भेजकर एक लाख रुपए  की ठगी कर ली.

टाटा

– TATA Project Limited, Hyderabad, Andhra Pradesh. इस कंपनी का टेंडर यह बोल कर विभाग ने रद्द कर दिया कि कंपनी ने अपने कर्मियों की सूची और Tools and Plants के संबंध में कागजात नहीं जमा किये हैं. जबकि गौर करने वाली बात यह है कि M/s Simplex Infrastructure Kolkata, West Bengal नाम की कंपनी ने भी अपने कर्मियों की सूची और Tools and Plants के संबंध में कागजात नहीं जमा किये थे. बावजूद इसके इस कंपनी को टेंडर में शामिल किया गया. सवाल यह कि एक कंपनी को जिस कारण से टेंडर से बाहर कर दिया. दूसरी कंपनी को कैसे और क्यों टेंडर में हिस्सा लेने दिया गया. 

 

यूपीआरएनएनएल

– Uttar Pradesh Rajkiya Niramn Nigam Limited, Lucknow, Uttar Pradesh. यह एक सरकारी कंपनी है. इस कंपनी ने उत्तर प्रदेश में भव्य उच्च न्यायालय भवन का निर्माण किया है. भवन की तारीफ खुद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने भी की है. लेकिन झारखंड में हाईकोर्ट बनाने के लिए जब कंपनी ने टेंडर डाला को इस कंपनी का टेंडर यह बोल कर विभाग ने रद्द कर दिया कि कंपनी ने अभियंता प्रमाण पत्र का एफिडेविट नहीं किया है. कंपनी के पास Electric License भी होने की बात कही गयी. यहां बताना जरूरी है कि यह एक सरकारी कंपनी है. जो 1975 से ही काम कर रही है. उत्तर प्रदेश के अलावा देश के दूसरे कई हिस्सों में कंपनी को काम करने का अनुभव है. 

शपूर जी

– SharrorjiPallonji and Company Pvt, Ltd, Kolkata, West Bengal. इस कंपनी का टेंडर यह बोल कर विभाग ने रद्द कर दिया कि कंपनी के पास Electric License जमा नहीं किया है. जबकि इस कंपनी के का टर्न ओवर 4522.40 करोड़ रुपए सलाना है. ऐसे में इस कंपनी के पास ये छोटे-मोटे लाइसेंस ना हो, इस बात पर कोई विश्वास नहीं करेगा.

 

अगली कड़ी में पढ़ेंः कंपनी मुंबई की और  विभाग  ने बोकरो के बैंक से मांगा बैंक गारंटी पेपर.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: