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झारखंड में 32.2 प्रतिशत लड़कियों की शादी कम उम्र में ही हो जाती है- सर्वे

Ranchi : आज बाल विवाह को लेकर देश में भले ही सख्त कानून बने हैं लेकिन इसपर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है. झारखंड की स्थिति अब भी ठीक नहीं है. राज्य में 10 बच्चियों में से तीन का बाल विवाह कराकर उनकी मासूम जिंदगियों को बर्बाद कर दी जाती है. झारखंड में महिलाओं की वास्तविक स्थिति का खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 में हुआ है. वर्ष 2020-21 की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में कम से कम 32.2 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल की आयु पूरी करने से पहले हो जाती है.

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राष्ट्रीय फैमिली हेल्थ सर्वे-5 2015-2016 में बाल विवाह का आंकड़ा  37.9 प्रतिशत था. इसका मतलब है कि  इन चार सालों में भी बाल विवाह पर पूरी तरह रोक नहीं लग पायी है. वहीं, पांच साल से नीचे के बच्चों के लिंगानुपात की रिपोर्ट में प्रत्येक एक हजार बच्चों में 899 बच्चियां हैं. राष्ट्रीय फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NHFS-5) की रिपोर्ट के मुताबिक, 31.5 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हो रही हैं.

झारखंड में 67.5 प्रतिशत युवतियां एनिमिक

67.5 प्रतिशत युवतियां एनीमिया (रक्ताल्पता) से ग्रस्त हैं. वहीं बच्चों की बात करें तो पांच साल से कम उम्र के बच्चे एनीमिया के शिकार हैं. झारखंड की आबादी का 65.8 फीसदी किशोर में खून की कमी की समस्या है. इस रिपोर्ट की माने तो झारखंड की आधी आबादी खून की समस्या से जूझ रही है.

झारखंड में 40 फीसदी बच्चे कुपोषित

राष्ट्रीय फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के मुताबिक,  झारखंड में अभी भी 40 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. सर्वे में 39.4 फीसदी बच्चे कुपोषित दर्ज किए गए, जबकि पिछले सर्वे में 47.8 प्रतिशत बच्चे कुपोषण से पीड़ित थे. इसके तहत 10 में चार बच्चे कुपोषण से ग्रसित हैं.

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Nayika

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