JamshedpurJharkhandNEWS

देश में हर साल 3.4 लाख बच्चों को होती है टीबी, 70 प्रतिशत में नहीं हो पाती बीमारी की पहचान : डॉ अतनू भद्रा

आइएपी के सालाना कांफ्रेंस के पहले दिन टीबी उन्मूलन पर चर्चा, 12 राज्यों से आये 400 शिशु रोग विशेषज्ञ 6 दिसंबर तक अलग-अलग बीमारियों पर करेंगे चर्चा

Jamshedpur : इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक (आइएपी) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (पूर्वी क्षेत्र) डॉ अतनू भद्रा ने कहा है कि देश में हर साल 3.4 लाख बच्चे टीबी से ग्रस्त होते हैं, जबकि 70 प्रतिशत बच्चों में बीमारी की पहचान नहीं हो पाती. यानी 3.4 प्रतिशत से कहीं अधिक बच्चे टीबी से ग्रस्त होते हैं. ऐसे में अब इन बच्चों की पहचान करने का संसाधन हमारे पास उपलब्ध है. अगर किसी बच्चे में टीबी से संबंधित लक्षण हो तो वे जांच अवश्य करायें.आसनसोल निवासी डॉ भद्रा शुक्रवार को आइएपी की ओर से नेशनल हाइवे स्थित एक होटल में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक कांफ्रेंस में बोल रहे थे. जमशेदपुर में दूसरी बार आइएपी  का कांफ्रेंस हो रहा है. इसमें देशभर के लगभग 400 शिशु रोग विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं. कांफ्रेस 6 दिसंबर तक चलेगी. हर दिन अलग-अलग बीमारियों पर मंथन होगा. डॉ भद्रा ने कहा कि भारत को 2025 तक टीबी रोग से मुक्त करने के लिए देशभर के शिशु रोग विशेषज्ञ अभियान चला रहे हैं. साथ ही जूनियर चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देने से लेकर आम लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करने का भी काम किया जा रहा है. टीबी उन्मूलन के लिए पूरी योजना तैयार है, जिसे धरातल पर उतारने का काम चल रहा है.

इसे भी पढ़ें – पूर्व सांसद अजय कुमार ने सीएम को लिखा पत्र, जेपीएससी रिजल्ट की जांच के लिए कमिटी गठन की मांग की

advt

कांफ्रेंस के पहले दिन भारत को टीबी रोग से मुक्त करने पर मंथन किया गया. इस दौरान डॉ अतनू भद्रा ने कहा कि अब टीबी रोग की पहचान आसान हो गयी है.  कुछ ही मिनटों में इसका पता चल जाता है. ऐसे में अब सबसे ज्यादा जरूरी लोगों को जागरूक होने की है. अब छाती का एक्स-रे व न्यूक्लियर एसिड एंप्लीफिकेशन टेस्ट (एनएएटी) सीबी-नाट और ट्रू-नेट पद्धति से जांच हो रही है. यह पद्धति देश के सभी जिलों में उपलब्ध है. मुफ्त में जांच व इलाज की सुविधा भी मिल रही है. इस अवसर पर आयोजन समिति के चेयरमैन डॉ केके चौधरी, आइएपी के अध्यक्ष डॉ मिंटू अखौरी सिन्हा, सचिव डॉ मिथलेश कुमार, डॉ आरके अग्रवाल, डॉ जॉय भादुड़ी, डॉ सुधीर मिश्रा, डॉ सितेश दास, डॉ अमित कुमार सहित अन्य उपस्थित थे.

रिपोर्ट नहीं करने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई

डॉ अतनू भद्रा ने कहा कि 2025 तक टीबी से मुक्ति के लिए तीन चीजों पर फोकस किया जा रहा है. इसमें अधिक से अधिक लोगों की जांच करना, सभी मरीजों की रिपोर्ट तत्काल बेवसाइट पर दर्ज करना और मरीजों का पूरा ट्रीटमेंट करना है. इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी. अभी तक यह शिकायत मिलती रही है कि निजी चिकित्सक टीबी मरीजों की रिपोर्ट विभाग को नहीं देते हैं. वैसे लोगों के खिलाफ विभाग सख्ती से कार्रवाई करेगा और इसमें आइएपी बचाव करने की स्थिति में नहीं होगा. इसलिए, सभी चिकित्सक सहयोग करें. रिपोर्ट नहीं करने वाले चिकित्सकों के लिए जेल तक का प्रावधान है. वहीं, अगर कोई चिकित्सक टीबी मरीजों की जानकारी विभाग को देता है, तो उसके बदले में 500 रुपये का पुरस्कार मिलेगा.

देश में हर साल 3.4 लाख बच्चे टीबी से ग्रस्त होते हैं

डॉ अतनू भद्रा ने कहा कि देश में हर साल टीबी से 3.4 लाख बच्चे ग्रस्त होते हैं. जबकि 70 प्रतिशत बच्चों में बीमारी की पहचान नहीं हो पाती. यानी 3.4 प्रतिशत से कहीं अधिक बच्चे टीबी से ग्रस्त होते हैं. ऐसे में अब इन बच्चों की पहचान करने का संसाधन हमारे पास उपलब्ध है. अगर किसी बच्चे में टीबी से संबंधित लक्षण हो तो वे जांच अवश्य करायें.

 0 से 5 वर्ष आयु के 30 लाख बच्चे ग्रस्त

भुवनेश्वर से आये डॉ प्रशांत कुमार साबत ने कहा कि भारत में 0 से 5 वर्ष आयु के 30 लाख बच्चे टीबी से ग्रस्त हैं. टीबी किसी भी उम्र के शिशुओं और बच्चों को हो सकती है, मगर अधिकांशत: यह एक से चार साल के बीच के बच्चों को प्रभावित करती है. ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चों का रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है.

ये हैं टीबी के 4 प्रमुख लक्षण

  • दो हफ्ते से अधिक समय से खांसी
  • दो हफ्ते से बुखार आना
  • तेजी से शरीर का वजन घटना
  • रात में सोते वक्त पसीना आना

इसे भी पढ़ें – महंगाई हटाओ रैली जयपुर में, हिस्सा लेने के लिए आलमगीर ने सभी मंत्रियों और विधायकों को लिखा पत्र

Nayika

advt

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: