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29,500 होमगार्ड से वादा कर भूले सीएम, न भत्ता बढ़ा, न मिली ट्रैफिक ड्यूटी

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  • चार-चार महीनों के शिफ्ट में मिलती है ड्यूटी
  • एक बार में सिर्फ 9,500 होमगार्ड जवानों को ड्यूटी, 20 हजार को जाते हैं बेरोजगार
  • हथियार प्रशिक्षण प्राप्त नकुल यादव नक्सली बने, फिर किया सरेंडर

Ranchi: 2017 के होमगार्ड स्थापना दिवस के मौके पर सीएम रघुवर दास ने घोषणा की थी, राज्य के सभी होमगार्ड का भत्ता 100 रुपये प्रतिदिन बढ़ेगा. साथ ही बेरोजगार बैठे सभी होमगार्ड को ट्रैफिक में ड्यूटी लगायी जाएगी. मुख्यमंत्री के घोषणा के एक साल हो चुके हैं, पर इस घोषणा के पूरा होने का इंतजार आज भी 29,500 होमगार्ड के जवान कर रहे हैं. इसको लेकर झारखंड होमगार्ड एसोसिएशन मुख्यमंत्री कार्यालय में कई बार पत्राचार भी कर चुका है, पर कोई फायदा नहीं हुआ. होमगार्ड जवानों को फिलहाल 400 रुपये प्रतिदिन भत्ता मिलता है.

हथियार प्रशिक्षित हैं जवान

होमगार्ड के जवानों को हथियार चलाने का पूरा प्रशिक्षण प्राप्त है. प्रशिक्षण के बाद भी लगभग 20,000 जवान बेरोजगार हैं. 9,500 जवान होमगार्ड की ड्यूटी में तैनात हैं. जवानों को चार-चार महीने के शिफ्ट में ड्यूटी दी जाती है. बाकी 8 महीने बेरोजगार रहते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने पिछले स्थापना दिवस के मौके पर कहा था कि सभी बेरोजगार होमगार्ड को ट्रैफिक ड्यूटी में लगायी जाएगी. सीएम की यह बात अब घोषणा तक ही सीमित रह गयी है. आज भी जवान घोषणा के पूरे हो जाने की उम्मीद लगाये बैठे हैं.

नक्सली नकुल यादव भी था प्रशिक्षित होमगार्ड जवान

पिछले साल गुमला में नक्सली नकुल यादव ने सरेंडर किया था. जिसके बाद सरकार ने उसे 15 लाख रुपए भी दिये. होमगार्ड एसोसिएशन ने कहा कि जवानों को ड्यूटी नहीं मिलने के कारण वे नक्सलियों से जा मिलते हैं. अभी भी ऐसे कई जवान हैं, जो हथियार प्रशिक्षण के बाद नक्सलियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, वजह उनको ड्यूटी नहीं मिलना है. अभी भी सरकार सिर्फ बहाली ही कर रही है और उन्हें हथियार प्रशिक्षण देकर छोड़ दिया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट के समान कार्य, समान वेतन को भी टाल रही सरकार

होमगार्ड के जवानों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत समान कार्य के लिए समान वेतन की सरकार से मांग की थी. झारखंड में सरकार ने अब तक नहीं दिया है.  अधिकार ने नहीं मिलने पर एसोसिएशन हाई कोर्ट भी गया. वहां वे केस जीत गये. हाई कोर्ट के बार-बार नोटिस के बाद भी सरकार आदेश को नहीं मान रही है. फैसले को टालने का प्रयास कर रही है. फैसले को टालने के लिए सरकार अभी एनपीए में चली गयी है. फैसला 28 जनवरी को आना है. जबकि बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सहित कई अन्य राज्यों के होमगार्ड जवानों को समान कार्य के बदले समान वेतन दिया जा रहा है.

क्या कहते हैं जवान

होमगार्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि सरकार अगर 28 जनवरी तक मांग नहीं मानती है तो वे हथियार सरकार के पास जमा कर देंगे. सामूहिक हड़ताल में चले जाएंगे. उन्होंने कहा कि सरकार पारा शिक्षकों के समान ही हमारी बात भी नहीं सुनती.

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