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साल 2014 में 28 करोड़ देशवासियों ने नहीं डाले थे वोट, यह शुभ संकेत नहीं

टॉप 20 लोकतांत्रिक देशों को मिलाकर देखा जाये तो उनके यहां रजिस्टर्ड वोटर की संख्या 28 करोड़ होगी.  इस सूची में जर्मनी, यूके, स्पेन, साउथ कोरिया जैसे देश भी शामिल हैं;  

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NewDelhi : साल 2014 में 18 साल से ऊपर के ऐसे 28 करोड़ भारतीय थे, जिन्होंने वोटर लिस्ट में नाम होने के बावजूद वोट नहीं डाला था. यह आंकड़ा चौंकानेवाला है. क्योंकि दुनिया के किसी देश के पास इतने वोटर  भी नहीं हैं.  जानकारी के अनुसार दुनिया के दूसरे सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश अमेरिका में कुल 18.3 करोड़ (2016 के अनुसार) रजिस्टर्ड वोटर  हैं.  अगर टॉप 20 लोकतांत्रिक देशों को मिलाकर देखा जाये तो उनके यहां रजिस्टर्ड वोटर की संख्या 28 करोड़ होगी.  इस सूची में जर्मनी, यूके, स्पेन, साउथ कोरिया जैसे देश भी शामिल हैं.  इसलिए 28 करोड़ लोगों का वोट न डालना अपने आप में चिंता का विषय होना चाहिए.  जान लें कि 2014 के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भारतीय जनता पार्टी को 17.2 करोड़ वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस 10.7 करोड़ के साथ दूसरे नंबर पर थी.  ऐसे में देखा जाये तो सबसे बड़ी पार्टी वोट न डालनेवालों की हुई,  क्योंकि इनकी संख्या 28 करोड़ के लगभग रही.  ऐसे में यह भावना उभर कर सामने आती है हम लोग लोकतंत्र की परवाह नहीं करते, लेकिन असल कारण सिर्फ यही नहीं है. बता दें कि बहुत लोग ऐसे हैं जो मतदान वाले दिन  वहां नहीं हो सकते, जिसकी वजह से वे चाहकर भी वोट नहीं कर पाते.

 4.6 करोड़ नौकरी और 40 लाख बिजनेस के चलते बाहर रहे

2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 450 मिलियन (45 करोड़) प्रवासी थे.  इनमें से 4.6 करोड़ नौकरी और 40 लाख बिजनेस के चलते प्रवासी रहे. इस लिस्ट में 22 करोड़ महिलाएं शामिल थीं, जिन्होंने शादी के बाद अपना घर छोड़ा.  इस क्रम में 80 लाख लोग पढ़ाई की वजह से घर छोड़कर बाहर गये थे.  इनमें से भी कई लोग ऐसे हैं जिन्हें बार-बार नौकरी या जगह बदलनी पड़ती है, जिसकी वजह से वे वहां का वोटर कार्ड नहीं बनवा सकते.  ऐसे में बड़ी संख्या में लोग वोट डालने घर नहीं जा पाते.  इन करोड़ों लोगों द्वारा वोटिंग न करने के नतीजे पर विचार करना जरूरी है. इससे बोगस वोटिंग का खतरा बढ़ जाता है.

एनआरआई को प्रॉक्सी वोटिंग के जरिये वोट देने का अधिकार मिला हुआ है

भरत में गैर निवासी भारतीयों (एनआरआई) को प्रॉक्सी वोटिंग के जरिये वोट देने का अधिकार सुनिश्चित किया गया है.  साथ ही सशस्त्र सेवा में काम कर रहे लोगों और वोटिंग कराने वाले सरकारी कर्मचारियों को भी पोस्टल बैलेट के जरिये वोट देने का अधिकार दिया है. अगर इसे आधार मानें, तो हर भारतीय को वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए, चाहे वह कहीं भी रहता हो.  हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि कुछ आलसी लोग भी हैं, जो वोट देने के लिए चार कदम भी नहीं चलना चाहते. लेकिन उन करोड़ों लोगों का क्या जो वोट देना तो चाहते हैं, लेकिन परिस्थितियों की वजह से अपने इस अधिकार से वंचित रह जाते है.   जान लें कि केवल 13 लाख लोग एनआरआई हैं.  साथ ही पिछले लोकसभा चुनाव में सशस्त्र सेवा में काम करने वाले 12 लाख लोगों ने वोट डाले थे. मगर यह संख़्या करोड़ों की संख्या वाले देश में प्रवास करने वाले लोगों की तुलना में बेहद कम है.

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