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पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी आरक्षण संवैधानिक अधिकार है, भरमा रही है सरकार : राजकिशोर महतो

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Ranchi : आजसू विधायक राजकिशोर महतो ने कहा है कि राज्य में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लेकर सरकार जनता को भरमा रही है. पिछड़ा वर्ग को मिलनेवाला 27 प्रतिशत आरक्षण उनका संवैधानिक अधिकार है. लंबे समय से इस अधिकार को लेकर आवाज उठायी जाती रही है, लेकिन सरकार ने कभी ठोस कदम नहीं उठाया. उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा प्रकाशित असाधारण अंक संख्या 296, 29 नवंबर 2001 को देखने पर स्थिति स्पष्ट हो जायेगी. इसमें झारखंड में पदों एवं सेवाओं में रिक्तियों में आरक्षण के विषय में संकल्प लिया गया है. अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया गया था, जिसमें सुदेश महतो समेत कई लोग सदस्य थे. इस समिति ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए अधिनियम 1991 को संशोधित करने का निर्णय लिया था. उपसमिति की अनुशंसा राज्य में 73 प्रतिशत आरक्षण देने की थी, जिसमें अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 14 प्रतिशत एवं पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की अनुशंसा की गयी थी. इस अनुशंसा को स्वीकार करते हुए तत्कालीन सरकार द्वारा आदेश भी निर्गत किया गया था.

27 प्रतिशत आरक्षण देने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए

उन्होंने कहा कि इस संबंध में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 340 में यह प्रावधान है कि सरकार पिछड़े वर्गों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्थिति के आकलन के लिए बोर्ड का गठन करे. यह बोर्ड उनकी स्थिति का आकलन करे तथा उनके हित में निर्णय लेने हेतु राज्य सरकार को अनुशंसा करे. झारखंड में भी पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जा चुका है और पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा 2014 में ही पिछड़ों का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की अनुशंसा की जा चुकी है. पिछड़ा वर्ग आयोग ने अपनी अनुशंसा में स्पष्ट रूप से कहा है कि झारखंड राज्य में पिछड़े वर्गों की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्थिति दयनीय है तथा सरकारी नौकरी में इनका प्रतिनिधित्व कम है. इनकी आबादी, सामाजिक एवं शैक्षणिक स्थिति को देखते हुए राज्य में 27 प्रतिशत आरक्षण देने पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है.

जारी की जाये 2011 के जातिगत सर्वे की सूची

आजसू विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री का कहना है कि आबादी के अनुरूप आरक्षण मिलेगा और इससे पहले जिलों में सर्वेक्षण कराया जायेगा. आजसू पार्टी पहले से ही इस बात पर जोर देती रही है कि 2011 में जातिगत जनगणना एवं सर्वे कराये गये थे, पहले उसकी सूची जारी की जाये. जब जातिगत जनगणना एवं सर्वे केंद्र सरकार के पास उपलब्ध है, तो उसी आधार पर राज्य सरकार अविलंब निर्णय ले और गोलमोल बात करने के बजाय पिछड़ों को उनका संवैधानिक हक प्रदान करे.

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