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26/11 : मोशे होल्त्सबर्ग को अंधेरे से क्यों डर लगता है

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Mumbai : मोशे को अंधेरे से डर लगता है. रात में वह बत्ती जला कर सोता है. वह मद्धिम रोशनी में भी नहीं सो सकता. मुंबई में नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले 26/11 के दौरान दो साल के बच्चे मोशे होल्त्सबर्ग की जान बचाने वाली नैनी सांद्रा सैमुअल ने यह बता कही. सैमुअल कहा कि 10 साल बाद भी चबाड़ हाउस से गोलियों के निशान नहीं मिटाये गये हैं.  54 साल की सैमुअल  हैरान है कि आतंकी हमले के दाग अब भी कोलाबा में पांच मंजिला यहूदी केंद्र में मौजूद हैं. इस भवन का नाम अब नरीमन लाइट हाउस रख दिया गया है. बता दें कि मुंबई हमले के दौरान दो पाकिस्तानी आतंकवादी इस इमारत में घुस गये थे और मोशे के पिता रब्बी गैवरियल और उसकी (मोशे की) मां रिवका सहित नौ लोगों की हत्या कर दी थी. हालांकि, मोशे को सैमुअल ने बचा लिया था. सैमुअल, मोशे, उसके दादा-दादी और इस्राइली प्रधानमंत्री के साथ इस साल जनवरी में मुंबई आयी थी. लेकिन सैमुअल ने मई में फिर से शहर में लौटने पर पाया कि इमारत के अंदर चीजें बेहद डरावनी हैं.

खंभे और हर चीज पर गोलियों के निशान हैं. यह बहुत भयावह है

उन्होंने बताया, उन्होंने चौथी और पांचवीं मंजिल को पहले की ही तरह रखा है और तीसरी मंजिल पर उन्होंने हर चीज तोड़ दी है और उसे एक बड़े खुले स्थान में तब्दील कर दिया है. खंभे और हर चीज पर गोलियों के निशान हैं. यह मेरे लिए बहुत भयावह है. इसने मुझे झकझोर कर रख दिया. सैमुअल ने कहा, लोगों के देखने के लिए गोलियों के निशान क्यों रखे गये हैं? मैं इस तर्क को नहीं समझ पा रही. उन्होंने ताजमहल होटल, ट्राइडेंट होटल, लियोपोल्ड कैफे और सीएसटीएम स्टेशन पर हुए आतंकी हमले का उदाहरण देते हुए यह कहा. उन्होंने पूछा, क्या उन सभी ने निशान रखे हैं.

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