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26 जनवरी को सम्मानित किये जायेंगे 18 बहादुर बच्चे, परेड में भी होंगे शामिल, जानें इनके बहादुरी के कारनामें

New Delhi: राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों के लिए चयनित बच्चों को सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सम्मानित किया. इन बच्चों में एक छह साल की बच्ची भी है जिसने अपनी बहन को मगरमच्छ के जबड़े से बचाया था. राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों के लिए चयनित इन बच्चों से रावत ने उनके जीवन के लक्ष्यों के बारे में पूछा.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 2017 के कुल 18 बहादुर बच्चों को सम्मानित करेंगे. साथ ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पुरस्कार विजेता बच्चों के लिए समारोह का आयोजन करेंगे. ये बच्चे 26 जनवरी की परेड में भी शामिल होंगे.

इन्हें मिलेगा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार 

14 साल की ममता नेत्रवती चव्हाण, (मरणोपरांत, कर्नाटक), 14 साल की लोकरकपाम राजेश्वरी (मरणोपरांतद्धरू मणिपुर की ) 12वीं में पढ़ने वाले ललछंदमा (मरणोपरांतद्धर, मिजोरम) 6 साल की दलाई (ओड़िशा), 13 साल की मनशा, चिंगई वांग्सा, शेंगपॉन, योकनेई (सारे नगालैंड के), 16 साल के जोनुन्तुलंगा (मिजोरम), 16 साल के पंकज सेमवालरू (उत्तराखंड के टिहरी), गढ़वाल इलाके के 17 साल के एजाज अब्दुल रउफ (महाराष्ट्र) और पंकज कुमार महंत (ओडिशा) के शामिल हैं.  इन बहादुर बच्चों की शिक्षा-दीक्षा का खर्च इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर वहन करेगी.

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क्यों हैं ये बच्चे खास जानें

ममता दलाईः ओड़िशा के केंद्रपाड़ा में रहने वाली ममता दलाई ने अपनी बहन को मगरमच्छ से बचाकर असाधारण बहादुरी का प्रदर्शन किया था.

पंकज सेमवाल:  16 साल के इस लड़के ने तेंदुए से अपनी मां की जान बचाई थी. ये उत्तराखंड के टिहरी-गढ़वाल इलाके के रहने वाले हैं.

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नेत्रवती चव्हाण (मरणोपरांत): कर्नाटक की 14 साल की इस बहादुर लड़की ने अपनी जान गंवा कर दो लड़कों को डूबने से बचा लिया. नेत्रवती को मरणोपरांत गीता चोपड़ा अवॉर्ड दिया जाएगा.

लोकरकपाम राजेश्वरी चनु (मरणोपरांत): मणिपुर की इस 14 साल ने एक जीर्ण पुल से इंफाल नदी में गिर रही मां और उसके बच्चे को बचाया था.

ललछंदमा (मरणोपरांत): मिजोरम के इस लड़के ने नदी में डूब रहे अपनी दोस्त को बचाने के लिए अपनी जान गंवा दी.

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