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25 लाख का इनामी नक्‍सली बिरसई ने किया सरेंडर 

मुख्यधारा से जुड़ने वाले नक्सलियों का है स्वागत : कमिश्नर

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              आत्मसमर्पण करे अन्यथा मारे जायेंगे नक्सली:डीआईजी

Palamu: भाकपा माओवादी कोयलशंख बिहार, झारखंड एवं उतरी छतीसगढ़ स्पेशल एरिया कमिटी का सदस्य कमलेश कुमार गंझू उर्फ उमेश उर्फ बिरसई उर्फ साकेत जी ने गुरूवार को प्रमंडीय मुख्यालय मेदिनीनगर में प्रमंडलीय आयुक्त मनोज झा, डीआईजी विपुल शुक्ला एवं सीआरपीएफ के डीआईजी जयंत पाल के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है. इस अवसर पर  पलामू एसपी इंद्रजीत महथा, गढ़वा एसपी शिवानी तिवारी समेत पुलिस व सीआरपीएफ के पदाधिकारी तथा माओवादी बिरसई की पत्नी राजकुमारी देवी उपस्थित थीं. बताया जाता है कि माओवादी बिरसई पर 25 लाख रूपय का ईनाम घोषित था.

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मुख्यधारा से भटके लोगों के वापस लौटने पर उनका स्वागत

बिरसई लातेहार जिला के चंदवा थाना के बेलगाडा गांव का रहने वाला है. वह झारखंड, बिहार व छतीसगढ़ में सक्रिय था.  उसके खिलाफ लातेहार में 44 व गढ़वा जिला के भंडरिया समेत अन्य थानों में 33 मामले दर्ज हैं. वह वर्ष 2013 में  लातेहार में हुई नक्सली हमले में भी शामिल था. जिसमें सीआरपीएफ के 17 जवान शहीद हुए थे. इस अवसर पर आयोजित सरेंडर समारोह में बोलते हुए पलामू के कमिश्नर झा ने कहा कि हाल के दिनों में पुलिस की छवि सुधरने के साथ-साथ इसके साख में इजाफा हुआ है. उन्होंने कहा कि मुख्यधारा से भटके लोगों के वापस लौटने पर उनका स्वागत है. मुख्यधारा से जुड़ने वाले नक्सलियों को सरकार की समर्पण नीति का पुरा लाभ दिलाया जाएगा.

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मओवादी संगठन विकास विरोधी एक गुंडा गिरोह बनकर रह गया

डीआईजी विपुल शुक्ला ने कहा कि बिरसई को आत्मसमर्पण कराने में छह माह का समय लगा है. उसने अपनी पत्नी एवं परिवार वालों के आग्रह पर सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर सरेंडर किया है. डीआईजी शुक्ला ने कहा कि माओवादी नीति सिद्घांतो से भटक चुके हैं. यह सिर्फ विकास विरोधी एक गुंडा गिरोह बनकर रह गया है. उन्होंने कहा कि नक्सली मुख्य धारा में लौटें अन्यथा मारे जायेंगे. सीआरपीएफ के डीआईजी पाल ने कहा कि जनता भी अब माओवादियों की चाल समझ चुकी है. गढ़वा एसपी शिवानी तिवारी ने कहा कि बिरसई जैसे लोग संगठन में रह कर जनता को भरमाकर उन्हें गलत रास्ते पर ले जाते है. इनका काम सिर्फ लेवी वसूलना रह गया है. उन्होंने कहा कि माओवादियों के संगठन में दूसरे प्रांत से नक्सली यहां आते है और यहां के लोगों का शोषण कर धन कमाते हुए अपने परिवार के लोगों को खुशहाल बनाते है.

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संगठन की गलत नीतियों के कारण ही जनता का मोह भंग

सरेंडर करने वाले माओवादी बिरसई ने कहा कि संगठन में काफी बदलाव आया है. संगठन के सदस्यों में धनलोलुपता बढ़ी है. सदस्यों का नैतिक पतन हुआ है. संगठन की गलत नीतियों के कारण ही जनता का भी माओवादियों से मोह भंग हो गया है. समारोह का संचालन अभियान एसपी अरूण कुमार सिंह ने किया. इस दौरान माओवादी बिरसई को समर्पण नीति के तहत उसके ईनाम की राशि का 25 लाख रूपये का चेक उसे प्रदान किया गया.

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नौ वर्ष की उम्र में नक्सली बना था बिरसई

पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाला माओवादी कमलेश कुमार गंझू उर्फ बिरसई माओवादियों के मिलिट्री कमिशन का सचिव था. संगठन में उसकी हैसियत संगठन के शीर्ष नेता अरविंद जी के बाद दूसरे स्थान का  था. बिहार, झारखंड एवं उतरी छतीसगढ़ में संगठन के विस्तार, नीति निर्धारण, कार्रवाई की योजना तैयार करने और कार्रवाई करने में बिरसई का महत्वपूर्ण योगदान रहता था. बिरसई पिछले 25 वर्षों से नक्सली संगठन में सक्रिय था. वह नौ वर्ष की उम्र में वर्ष 1993 में तत्कालीन एमसीसी संगठन में शामिल हुआ था. बाद में वर्ष 2004 में एमसीसी एवं पीडब्लूजी का विलय होने के बाद बिरसई नवगठित भाकपा माओवादी संगठन के मजबूत सक्रिय सदस्य के रूप में उभरा था. वह झारखंड व छतीसगढ़ में माओवादियों के कई हिंसक वारदातों में शामिल रहा था. कहा जा रहा है कि बिरसई के आत्मसमर्पण से झारखंड में नक्सलियों को एक बड़ा झटका लगा है. बिरसई के नही रहने से संगठन के कई कार्य बुरी तरह प्रभावित होंगे.

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