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जमशेदपुर : टाटा मोटर्स समेत 25 उद्योगों में गहराया संकट, 30 हजार लोगों के सामने रोजी-रोटी का सवाल

आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में चल रही कई इकाइयों की हालत खस्ता हो चुकी है.

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Abinash Mishra

Jamshedpur : ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी के चलते और आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की 25 स्टील इकाइयों में ताला लगने की नौबत ने 30 हजार लोगों के सामने रोजगार का संकट पैदा कर दिया है. 

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आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में चल रही कई इकाइयों की हालत खस्ता हो चुकी है. 2000 से भी ज्यादा छोटी-बड़ी कंपनियां इस क्षेत्र में है जिसमें 700 इकाइयों को पहले ही बीमार घोषित किया जा चुका है.

मंदी की मार की चपेट में औद्योगिक क्षेत्र की 25 स्टील कंपनियां भी आ चुकी हैं और पूरी तरह ठप होने के कगार पर हैं. कई कंपनियों को 1 अगस्त से बंद करने का एलान भी किया जा चुका है. यदि ऐसा होता है तो प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा.

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बिजली दर बढ़ने का भी असर 

इन कंपनियों में काम कर रहे तीन हजार कर्मचारियों से रोजगार तो छिनेगा ही, इन पर आश्रित कई व्यापार भी बंद हो जायेंगे.

कंपनियों का कहना है कि सरकार ने बिजली की दर करीब 40 फीसदी बढ़ा दी है जिस कारण खर्च को मैनेज करना मुश्किल हो रहा है, कपनियां ताला लगाने पर मजबूर हैं.

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टाटा मोटर्स में भी मंदी का दौर

मंदी के दौर में टाटा मोटर्स जैसी बड़ी कंपनी को भी ब्लॉक क्लोजर का सहारा लेना पड़ रहा है. जुलाई में भी कंपनी को ब्लॉक क्लोजर करना पड़ा है. कयास ये भी हैं कि कंपनी अगले दो महीने में एक हफ्ते से ज्यादा का ब्लॉक क्लोजर कर सकती है.

ब्लॉक क्लोजर वो प्रक्रिया है जिसमें उत्पादन को कुछ दिनो के लिए बंद करना पड़ता है.

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कंपनी की दलील है कि ब्लॉक क्लोजर हर साल दोहरायी जाती है लेकिन इस साल कारण बेहद गंभीर है. टाटा मोटर्स की तरफ से ये कहा गया है कि बाजार में मंदी है और मांग में भारी गिरावट है, जिसके चलते गाडियों का स्टॉक भर गया है औऱ नये प्रोडक्शन की जरूरत नहीं है.

इन हालात में छंटनी की भी संभावना और बढ़ गयी है. हाल ही में कंपनी की एचआर हेड जमशेदपुर के दौरे पर थीं और खूब मीटिग का दौर चला जिससे कर्मचारियों मे छंटनी का डर पैदा हो गया है.

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टाटा मोटर्स का बाइ-सिक्स विभाग ठप, 3000 कर्मचारी सड़क पर

वर्क ऑर्डर नहीं होने का हवाला देते हुए टाटा मोटर्स ने बाई-सिक्स विभाग को बंद कर दिया है. इससे विभाग में काम कर रहे 6000 कर्मचारी सड़क पर आ गये हैं.

काम पर नहीं जाने के बाद से कर्माचारियों में रोष है और वे आंदोलन के मूड में हैं.

जमशेदपुर में बीते 15 दिनों से ये मुद्दा गर्माया हुआ है. इसको लेकर राजनीतिक संगठन और टाटा मोटर्स यूनियन आमने-सामने हैं.

झारखंड विकास मोर्चा भी इस मुद्दे को लेकर मैदान में कूद चुकी है. झाविमो ने टाटा मोटर्स युूनियन की क्षमता पर भी सवाल उठाते हुए उस पर अपने लाभ के लिए काम करने का आरोप लगाया है. दूसरी ओर यूनियन झाविमो पर राजनीतिक रोटी सेंकने का आरोप लगा रहा है.

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