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24 जिलों का जिम्मा माप-तौल के सिर्फ आठ इंस्पेक्टरों पर, एक पर विभाग जबरदस्त मेहरबान

Ranchi: आपको आपके जिले के माप-तौल विभाग के निरीक्षक (इंस्पेक्टर) का नाम शायद ही पता होगा. दरअसल उनकी नियुक्ति तो होती है अनुमंडल लेवल के अधिकारी के तौर पर खाद्य सार्वजनिक वितरण उपभोक्ता मामले के विभाग के माप-तौल के डिपार्टमेंट में अधिकारियों की इतनी कमी है कि इन्हें जिले का प्रभार दे दिया जाता है.

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अधिकारियों की कमी का फायदा इन्हें इतना भर ही नहीं मिलता, बल्कि इनको साथ में तीन या चार जिलों का और प्रभार दे दिया जाता है. एक तो मलाईदार पद ऊपर से हाथ में तीन से चार जिले. समझा जा सकता है कि सटीक जगह पर बने रहने के लिए कितने तरह के पापड़ बेलने पड़ते होंगे.

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अंगद की पांव की तरह जमाए हुए हैं धनबादवाले साहेब

हर विभाग की तरह इस विभाग में भी चुनाव आयोग की तरफ से चिट्ठी आयी है. चिट्ठी में इस बात का साफ उल्लेख है कि चार साल से एक पद पर जमे अधिकारियों का ट्रांस्फर हो.

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वैसे भी विभाग की तरफ से भी हर तीन साल में इन अधिकारियों का तबादला करने का प्रावधान है. लेकिन मजाल है कि धनबाद में पांच साल से ज्यादा समय से जमे सुनील कुमार मांझी का तबादला हो जाये.

पिछले साल के तबादले की लिस्ट तैयार हुई तो वो ही सबसे दुलारे निकले. चार साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद उन्हें दोबारा धनबाद सदर ही मिला.

31 जुलाई 2018 को विभाग की तरफ से स्थापना की बैठक के बाद तबादले का नोटिफिकेसन निकाला गया, जिसमें एक ही स्थान पर तीन साल से ज्यादा बने रहनेवाले अधिकारी का जिला बदला गया. लेकिन धनबाद के माप-तौल इंस्पेक्टर सुनील कुमार मांझी को धनबाद में ही रखा गया.

इतना ही नहीं साथ में वो सारे प्रभार भी उन्हें दे दिये गये, जिन पर वो पहले से काबिज थे.

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जानिए कौन कहां से कहां गया और जमे रह गये

नाम कहां थे कहां गए
प्रदीप कुमार देवघर गुमला
उपेंद्र कुमार रामगढ़ जमशेदपुर
श्रीकांत पांडेय जमशेदपुर रांची
शशिसंगिता बाड़ा सरायकेला देवघर सदर
सुनील कुमार मांझी धनबाद धनबाद
नीरज कुमार गोड्डा पाकुड़
आलोक कुमार गिरिडीह हजारीबाग
राकेश कुमार मेदनीनगर मेदनीनगर

राकेश कुमार मेदनीगर में असिस्टेंट के पद पर मौजूद थे. वहां रहते हुए उन्हें प्रमोशन मिला. साथ ही मेदनीनगर में तबादले के वक्त उनका करीब एक साल ही माप-तौल इंस्पेक्टर के रूप में हुआ था.

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