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रिम्स के 235 डॉक्टरों ने दिया एफिडेविट, नहीं करते हैं प्राइवेट प्रैक्टिस

RANCHI: राज्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल रिम्स में काम करने वाले डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस करने पर रोक है. जो डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करते उन्हें हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से एनपीए (नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस) भी दिया जाता है. इसके बावजूद रिम्स के कुछ डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करने से बाज नहीं आ रहे हैं और एनपीए भी छोड़ना नहीं चाहते. ऐसे डॉक्टरों से सख्ती से निपटने के लिए रिम्स प्रबंधन ने जब तैयारी की तो 235 डॉक्टरों ने एफिडेविट जमा कराया है. जिसमें उन्होंने लिखा है कि रिम्स के अलावा वे कहीं भी प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करते है. एफिडेविट के आधार पर उनके एनपीए के एरियर का भुगतान का रास्ता साफ हो गया है. बताते चलें कि एफिडेविट जमा कराने को लेकर रिम्स प्रबंधन की ओर से डॉक्टरों को पत्र जारी किया गया था.

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दिसंबर 2012 से अक्टूबर 2014 का एनपीए

 

Sanjeevani

हॉस्पिटल में सीनियर डॉक्टरों की संख्या काफी है. जिसमें प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर शामिल है. इन्हें दिसंबर 2012 से अक्टूबर 2014 तक का एनपीए का भुगतान किया जाना है. एफिडेविट मिलने के बाद एनपीए के भुगतान का रास्ता साफ हो गया है. डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस करने का मामला लंबे समय से चल रहा है. एफिडेविट जमा करने वाले 235 डॉक्टरों में कई ऐसे डॉक्टर है जो रिम्स से रिटायर हो चुके हैं. इसके अलावा सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के भी तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है और वे दूसरे संस्थानों में जा चुके है.

 

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