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बिना प्रोफेसरों के ही चल रहे राज्य के विश्वविद्यालय, 220 पद रिक्त, राज्य भर में सिर्फ रांची यूनिवर्सिटी में 12 प्रोफेसर

नियमतः हर विभाग में कम से कम दो प्रोफेसर होने चाहिए, दो प्रोफेसर नहीं होने पर एक प्रोफेसर और दो एसोसिएट होने चाहिए

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Ranchi: राज्य में युवाओं को उच्च शिक्षा मिले इसके लिए शिक्षण संस्थान तो खोले जा रहे हैं लेकिन शिक्षकों और संसाधनों की उपलब्धतता पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा. ऐसा ही एक मामला प्रोफेसरों की संख्या को लेकर सामने आया है. राज्य के छह विश्वविद्यालयों में से पांच में प्रोफेसर ग्रेड के कोई शिक्षक नहीं हैं. इन विश्वविद्यालयों में सिद्धो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय और विनोबा भावे विश्वविद्यालय हैं. इन विश्वविद्यालयों के गठन के बाद यहां रांची यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों को वीसी और प्रो वीसी बनाया गया. जिससे राज्य में प्रोफेसरों की कमी हुई. वहीं कुछ विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति भी इसका एक प्रमुख कारण है. रांची यूनिवर्सिटी में वर्तमान में मात्र 12 प्रोफेसर हैं. वो भी साल 2022 तक सेवानिवृत्त हो जायेंगे. जबकि राज्य में लंबे समय से एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसरों की प्रोन्नति लंबित है. जिससे लगभग 800 शिक्षक प्रभावित हैं.

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हर विभाग में कम से कम दो प्रोफेसर होने चाहिए

यूजीसी के नियमों के अनुसार किसी भी विश्वविद्यालय के विभाग में कम से कम दो प्रोफेसर होने चाहिए. दो प्रोफेसर नहीं होने पर एक प्रोफेसर और दो एसोसिएट प्रोफेसर होने चाहिए. इसके लिए या तो एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसरों को साक्षात्कार के माध्यम से सीधी नियुक्ति दी जाती है या आयोग की ओर से विज्ञापन निकाल कर सीधी नियुक्ति होती है. रांची विश्वविद्यालय की बात करें तो यहां 22 विभाग हैं. जिनमें 44 प्रोफेसर होने चाहिए. फिलहाल मात्र 12 प्रोफेसर हैं. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, सिद्धो कान्हू विश्वविद्यालय, नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय में भी 22-22 विभाग हैं, लेकिन इन विश्वविद्यालयों में एक भी प्रोफेसर नहीं हैं. ऐसे में यहां लगभग 220 प्रोफेसरों के पद रिक्त हैं. जिन पर न ही जेपीएससी सीधी नियुक्ति कर रहा और न ही एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसरों की साक्षात्कार के माध्यम से नियुक्ति हो रही.

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रांची विश्वविद्यालय के ही प्रोफेसर अन्य विश्वविद्यालयों में वीसी और प्रो वीसी बनाये गये

राज्य में प्रोफेसरों की कमी इस हद तक है कि रांची विश्वविद्यालय के ही विभिन्न विभागों के प्रोफेसरों को वीसी और प्रो वीसी अन्य विश्वविद्यालयों में बनाया गया. रांची विश्वविद्यालय को ही देखें तो वीसी डॉ रमेश कुमार पांडेय वर्तमान में अतिरिक्त प्रभार में हैं. रांची विश्वविद्यालय के ही अर्थशास्त्र विभाग के डॉ रमेश शरण को विनोबा भावे विश्वविद्यालय में वीसी बनाया गया. इसी तरह अंजनी श्रीवास्तव जो वर्तमान में कोल्हान विश्वविद्यालय के वीसी हैं, पहले रांची यूनिवर्सिटी में पदासीन थे. अन्य प्रोफेसर भी हैं, जो रांची यूनिवर्सिटी से ही राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में गये. लेकिन इन्हें पदोन्नति मिलने के बाद रिक्त पदों को नहीं भरा गया. जिसके बाद राज्य में प्रोफेसरों की कमी हुई. कुछ जानकारों ने बताया कि अगर आनेवाले समय में प्रोन्नति या प्रोफेसर के पदों पर सीधी नियुक्ति नहीं हुई तो किसी विश्वविद्यालय में वीसी और प्रो वीसी समेत अन्य उच्च पदों पर कोई अधिकारी नहीं रहेंगे.

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उच्च शिक्षा सचिव ने कहा- प्रोफेसरों की कमी की जानकारी नहीं

इस संबध में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राजेश कुमार शर्मा से बात की गयी. उन्होंने कहा कि राज्य के किसी भी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नहीं हैं, इसकी जानकारी नहीं थी. मामले पर संज्ञान लिया जायेगा. उन्होंने कहा कि शिक्षकों की प्रोन्नति का मामला जेपीएससी देखता है. ऐसे में इस मामले में कुछ कहा नहीं जा सकता.

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