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सखी मंडलों के योगदान के लिए भी याद रहेगा 2020, जानें CM की कप्तानी में कैसे पेश की मिसाल

Ranchi: विश्वव्यापी कोरोना आपदा के कारण कोई भी साल 2020 को याद नहीं करना चाहता. हर किसी के जीवन पर इस महामारी ने असर डाला है. ऐसे में झारखंड के भी गांव, कस्बे और शहर अछूते नहीं रहे. पर इन चुनौतियों के बीच सीएम हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य की सखी मंडलों ने लाजवाब भूमिका निभायी. 2.50 लाख मंडलों से जुड़ी करीब 30 लाख महिलाओं ने कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच महत्वपूर्ण योगदान दिया है. सीएम से मिलते मार्गदर्शन और जरूरी सपोर्ट के झारखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत एसएचजी की महिलाओं ने मिसाल पेश की. सखी मंडल में काम करने वाली इन महिलाओं की तारीफ सिर्फ राज्य तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इन महिलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली. अब सखी मंडल की महिलाएं जल्द ही असम जाकर अपने अनुभव साझा करेंगी और वहां की महिलाओं को प्रशिक्षण देंगी.

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सीएम दीदी किचन बना उदाहरण

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कोविड-19 संक्रमण की मुश्किल घड़ी में भी जेएसएलपीएस और सखी मंडलों की दीदीयों ने झारखंड में हालात को सुधारने में अहम रोल अदा किया. सखी मंडल की बहनों ने सभी पंचायतों में मुख्यमंत्री दीदी किचन का संचालन किया. कोरोना काल में राज्य में करीब 6595 मुख्यमंत्री दीदी किचन का संचालन किया. 4 करोड़ से ज्यादा थालियां परोसी गयीं. 3 अप्रैल 2020 को शुरू किए इस किचन ने कई लोगों को राहत पहुंचायी. रोजाना 6 लाख से ज्यादा जरुरतमंदों को दीदियों ने खाना परोसा. दीदी किचन के अलावा मुख्यमंत्री दाल-भात केंद्र के जरिए भी प्रवासियों को खाने की सुविधा मिल सकी.

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प्रवासियों के लिये मिशन सक्षम

लॉकडाउन की कठिन चुनौतियों के बीच राज्य में लाखों की तादाद में बाहर से श्रमिक झारखंड लौटे. उनके कौशल, सरकारी योजनाओं से जुड़ाव और अन्य जानकारियों का डेटाबेस तैयार करने को मिशन सक्षम की शुरूआत की गयी. इसके तहत सखी मंडल की दीदीयों ने प्रवासियों से सीधी बात कर उनसे जुड़ी सारी जानकारी मिशन सक्षम एप्प में दर्ज करवाई. ग्रामीण विकास विभाग के इस मिशन के जरिए करीब 4.71 लाख प्रवासियों का डेटाबेस तैयार किया गया. इनमें से करीब 3.6 लाख लोगों को आजीविका की विभिन्न गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास सरकार से स्तर से किया गया है. कोविड-19 आपदा से बचाव और लोगों की जरूरतों को देखते हुए दीदीयों ने मास्क, सैनिटाइजर और अन्य जरुरी सामानों की सप्लाई चेन के लिए भी मेहनत की. करीब 2100 सखी मंडल की महिलाओं ने 15 लाख से ज्यादा मास्क, करीब 73 हजार लीटर सैनिटाइजर, फेस वाइजर, पीपीसी का निर्माण और पैकेजिंग किया. इसके जरिये करीब 7 करोड़ का बिजनेस किया गया.

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पीएम मोदी ने भी की सराहना

रांची में एचएचजी द्वारा संचालित आजीविका फार्म फ्रेश मोबाइल एप्प के जरिए करीब 6000 परिवारों को होम डिलिवरी की गयी. 1200 किसानों से करीब 60 मीट्रिक टन सब्जियों की खरीदारी की गयी. इससे आपदा काल में किसानों को उत्पाद का उचित मूल्य मिला. इस अभिनव पहल की तारीफ पीएम नरेंद्र मोदी ने भी मन की बात कार्यक्रम में की थी. लॉकडाउन के दौरान सुदूर ग्रामीण इलाके में बैंकिंग सेवाएं दिलाने में बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी (बीसी सखी) ने बखूबी काम किया. कुल 1417 बीसी सखी बहनों ने ग्रामीण इलाकों में पेंशन, छात्रवृत्ति, गरीब कल्याण योजना, नकद निकासी एवं अन्य सेवाओं के द्वारा सिर्फ अप्रैल से जुलाई 2020 तक 280 करोड़ रुपये का लेन-देन किया. 4200 सखी मंडल और ग्राम संगठनों के द्वारा 38,400 आंगनबाड़ी केंद्रों पर टेक होम राशन का वितरण किया गया. राज्य में हड़िया -दारू बेचने वाली ग्रामीण महिलाओं की पहचान के काम में एसएचजी ने दिलचस्प रोल अदा किया. मिशन नवजीवन सर्वेक्षण के जरिये करीब 16500 महिलाओं की पहचान की गयी.

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