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2020 राज्यसभा: महागठबंधन में अल्पसंख्यकों की लंबी फेहरिस्त, फुरकान की मुराद होगी पूरी या फंसेगा पेंच

Nitesh ojha

महागठबंधन बनने के साथ शामिल सभी दलों (कांग्रेस, जेएमएम, जेवीएम) ने अल्पसंख्यक समुदाय को खुश करने की एक बड़ी पहल की है. जेएमएम अध्यक्ष शिबू सोरेन के आवास में रविवार को आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में दावा किया गया कि वर्ष 2020 के राज्यसभा चुनाव में सभी दल मिलकर अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े नेता को उच्च सभा भेजेंगे. इसके पीछे की मंशा भी साफ है कि बड़े अल्पसंख्यक समुदाय को किसी भी हाल में नाराज नहीं किया जाए. इसके बावजूद अल्पसंख्यक समुदाय के लोग इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं. विरोध करने वालों में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी भी पीछे नहीं है. उनका कहना है कि गोड्डा सीट जाने से अल्पसंख्यकों में काफी निराशा है. इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ेगा.

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गोड्डा सीट जेवीएम को मिलने से शुरू हुआ विवाद

दरअसल पूरा विवाद गोड्डा संसदीय सीट जेवीएम को दिये जाने के बाद से ही सामने आया है. फुरकान अंसारी यहां से कांग्रेस प्रत्य़ाशी के रूप में सपने संजोये हुए थे. उनका सपना देखना ठीक भी था, क्योंकि मोदी लहर में भी उन्होंने भाजपा प्रत्याशी निशिकांत दुबे को कड़ी टक्कर दी थी. जब लोकसभा चुनाव में उनके टिकट कटने की चर्चा गरम हुई, तो वे और उनके विधायक पुत्र इरफान अंसारी कई दिनों तक दिल्ली में डेरा डाले रहे. अब तस्वीर साफ है कि गोड्डा संसदीय सीट से पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव जेवीएम प्रत्याशी होंगे. ऐसे में अपना राजनीति भविष्य तलाश रहे फुरकान अंसारी की राज्यसभा जाने की मुराद क्या पूरी होगी या इसमें भी कोई पेंच फंसेगा. यह जगजाहिर है कि केवल कांग्रेस पार्टी के पास ही अल्पसंख्यक नेताओं की एक लंबी फेहरिस्त नहीं है. बल्कि जेएमएम और जेवीएम में कई अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं की संबंधित पार्टी आलाकमान तक अच्छी-खासी पहुंच है.

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कहीं कोलेबिरा उपचुनाव का समीकरण ना दोहरा जाए

संयुक्त प्रेस वार्ता में डॉ अजय कुमार ने दावा किया था कि महागठबंधन में शामिल दल लोकसभा चुनाव कांग्रेस के नेतृत्व में लड़ेंगे. वही विधानसभा चुनाव जेएमएम के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सबसे अधिक 7 सीटें दी गयी हैं. इससे साफ होता है कि विधानसभा चुनाव में जेएमएम को सबसे अधिक सीटों पर चुनाव लडेगा. स्वाभाविक है, चुनाव में जेएमएम सबसे बड़े दल के रूप में सामने आएगा. ऐसे में संभावना यह बन सकती है कि जेएमएम अपने दल से ही अल्पसंख्यक नेता को राज्यसभा भेजने की पहल करें. इससे कांग्रेस का खेमा नाराज होगा. कोलेबिरा उपचुनाव इसका जीता-जागता उदाहरण है. जब जेएमएम और कांग्रेस के बीच प्रत्याशी चयन को लेकर अनबन देखी गयी थी.

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तीनों दलों में है अल्पसंख्यक नेताओं की लंबी फेहरिस्त

कांग्रेस, जेएमएम और जेवीएम के अंदर अल्पसंख्यक नेताओं की बात करें, तो केवल फुरकान अंसारी ही नहीं बल्कि ऐसे कई नेताओं की एक लंबी फेहरिस्त सामने नजर आती है. कांग्रेस में अल्पसंख्यक नेताओं में मन्नान मलिक, सरफराज अहमद, फुरकान अंसारी, आलमगीर आलम, सुल्तान अहमद, गुलफान मुजीबी का नाम है. तो जेएमएम में हाजी हुसैन अंसारी, जावेद अख्तर, हिदायत खान, अखिल अख्तर आते हैं. जेवीएम में देखें, तो सबा अहमद, खालीद खलील जैसे अल्पसंख्यक नेताओं को पार्टी सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी के काफी करीबी देखा जाता है.

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भविष्य में क्या होगा यह किसने देखा है : फुरकान अंसारी

पार्टी अध्यक्ष डॉ अजय कुमार से नाराज चल रहे फुरकान अंसारी से कहा था कि जहां तक उनके राज्यसभा जाने की बात है, तो राज्यसभा चुनाव होने में अभी काफी समय बचा है. विधानसभा चुनाव के बाद ही यह तस्वीर सामने आएगी कि किस दल के अल्पसंख्यक उम्मीदवार को उच्च सदन भेजा जाएगा. ऐसे में भविष्य में क्या होगा यह किसी ने नहीं देखा है.

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व्यक्ति विशेष नहीं बल्कि पूरे अल्पसंख्यक समुदाय के लिए है लड़ाई :  आलमगीर आलम

वहीं प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ मीडिया में खुलकर नाराजगी जताने के फुरकान के बयान पर विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत विचार हो सकता है. जबकि महागठबंधन को गोड्डा सीट देकर प्रदेश अध्यक्ष ने एक मिसाल साबित की है. जहां तक फुरकान अंसारी को राज्यसभा भेजने की बात है, तो कोई भी अल्पसंख्यक नेता इसमें हो सकता है. उन्होंने कहा कि आज हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं बल्कि पूरे अल्पसंख्यक समुदाय के लिए है. सवाल होता है कि अल्पसंख्यक के किस नेता को राज्यसभा भेजा जाएगा, यह बाद में महागठबंधन में शामिल सभी दल मिलकर विचार करेंगे.

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