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2019 लोकसभा चुनाव  : पीएम पद पर शरद पवार की नजर, मोदी चूके तो लग सकती है लॉटरी  

2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की कमजोर स्थिति को भांपते हुए क्षेत्रीय दलों के नेता राजनीतिक गुना भाग में जुट गये हैं.

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Mumbai :  2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की कमजोर स्थिति को भांपते हुए क्षेत्रीय दलों के नेता राजनीतिक गुना भाग में जुट गये हैं. सभी इस रणनीति में हैं कि मोदी को सत्ता से दूर कर दिया तो पीएम पद की लॉटरी उन्हें लग सकती है. एनसीपी प्रमुख 77 वर्षीय शरद पवार भी इस कवायद में शामिल हैं. बता दें कि शरद पवार प्रधानमंत्री पद के लिए अंतिम सियासी दांव लगाने जा रहे हैं. पवार के पास अब अगले लोकसभा चुनाव के बाद कोई सियासी अवसर नहीं है.  खबर आ गयी है कि पवार ने लोकसभा चुनाव लड़ने के बजाय खुद को क्षेत्रीय दलों की गोलबंदी में झोंकने का फैसला किया है. शरद पवार सहित टीएमसी नेता ममता बनर्जी, पूर्व पीएम जद एस के एचडी देवगौड़ा समेत कई गैरभाजपाई-गैरकांग्रेसी क्षत्रपों को क्षेत्रीय दलों के नाम पर पीएम पद हासिल करने की उम्मीद है. शरद पवार को लग रहा है कि वे सबसे काबिल उम्मीदवार हैं.

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शरद पवार ममता बनर्जी के साथ क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने की कोशिशों में जुट गये हैं

बता दें कि पवार ने अपनी पुत्री सुप्रिया सूले को राजनीति में स्थापित करने के लिए पिछले लोकसभा चुनाव में परंपरागत अमरावती सीट छोड़ दी थी. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अलग-अलग राज्यों में भाजपा के खिलाफ गैरराजग दलों के गठबंधन की बन रही संभावना और कमजोर कांग्रेस के कारण क्षेत्रीय दलों की उम्मीदें जगी हैं.  क्षेत्रीय दलों के दिग्गज मान रहे हैं कि अगर भाजपा बहुमत से दूर रही तो पीएम पद की जुगत वे भिड़ा सकतेहै. ऐसी स्थिति में पीएम वही बन सकता है, जो अपने नाम की मुहर दूसरे क्षेत्रीय दलों के नेताओं से लगवा सके. यही कारण है कि शरद पवार पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के साथ लोकसभा चुनाव से पहले क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने की कोशिशों में जुट गये हैं.

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शरद पवार के करीबी नेताओं का कहना है कि अगर भाजपा बहुमत से दूर रही तो क्षेत्रीय दलों के साथ कांग्रेस का समर्थन पीएम पद हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है.  शाद पवार की कांग्रेस में भी पैठ है. कई क्षेत्रीय दलों के सुप्रीमो उनके मित्र हैं.  इसी कारण से   पवार लोकसभा चुनाव लडने के बजाय गैरभाजपाई दलों को एकजुट करने की मुहिम में लग गये हैं.

 

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