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2019 लोकसभा चुनाव : नीतीश का फैसला, भाजपा से दोस्ती बनी रहेगी, 17-17 सीटों का फार्मूला, गेंद भाजपा के पाले में

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Patna : 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर जदयू-भाजपा के बीच बिहार की सीटों को लेकर मची रार थमती नजर आ रही है. खबरों के अनुसार राजधानी दिल्ली स्थित बिहार भवन में जदयू के महासचिव और सचिव सहित तमाम वरिष्ठ नेताओं के साथ आयोजित बैठक में तय किया गया कि  नीतीश कुमार का फैसला पार्टी नेताओं को मान्य होगा. जानकारी दी गयी है कि जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले नीतीश कुमार ने पार्टी नेताओं के समक्ष साफ किया कि भाजपा व जदयू के बीच गठबंधन जारी रहेगा.

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बिहार के बाहर जदयू अपना विस्तार जारी रखेगा

जैसी कि खबरें आ रही हैं, बैठक में शामिल अधिकांश नेता नीतीश के इस प्रस्ताव से सहमत थे कि बिहार में भाजपा के साथ गठबंधन बरकरार रहना चाहिए. हालांकि इस दौरान यह भी तय किया गया कि बिहार के बाहर  पार्टी अपना विस्तार जारी रखेगी. बताया गया कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जदयू ने 17-17 सीटों पर लड़ने का फॉर्मूला भाजपा को दिया है. जदयू के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार बैठक में सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा हुई. बैठक में तय किया किया गया कि  बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से जदयू कम से कम 17-18 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

लोजपा और रालोसपा के लिए छह सीटें

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आयोग द्वारा जापानी इंसेफलाइटिस वायरस, एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम पर नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम को लागू करने की स्थिति पर भी रिपोर्ट मांगी गयी है.

जदयू और भाजपा के 17-17 सीटों पर लड़ने के साथ लोजपा और रालोसपा के लिए छह सीटें छोड़ने की बात कही गयी. बता दें कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह 12 जुलाई को पटना आ रहे हैं. ऐसे में जदयू की इस बैठक के बाद नीतीश कुमार की अमित शाह के साथ होने वाली मुलाकात अहम मानी जा रही है.जदयू के  नेता ने कहा कि हम फिर से कह रहे हैं कि बिहार में भाजपा के साथ हमारा गठबंधन जारी रहेगा और नीतीश कुमार एनडीए के नेता होंगे. नीतीश ने पार्टी की बैठक के दौरान इस बात का भी जिक्र किया कि वे तमाम आलोचनाओं के बीच किस तरह से सरकार चला रहे हैं.

नीतीश के अनुसार जब वह राजद के साथ सरकार चला रहे थे तो उन पर तरह-तरह के कमेंट किये जाते थे, लेकिन भाजपा के साथ उनकी सरकार में ऐसा कुछ भी नहीं है. बैठक के दौरान नीतीश ने यह भी कहा कि मोदी लहर में भाजपा ने भले ही 22 सीटें जीती हों, लेकिन ऐसे समय  में जब हमने अपने 17 साल पुराने दोस्त से एक बार फिर से हाथ मिलाया है, हर किसी को बलिदान के लिए तैयार रहने की जरूरत है.

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