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2019 लोकसभा चुनाव : मतदाताओं को पाले में करने के लिए मोदी सरकार ब्रहमास्त्र चलाने को तैयार !  

पांच राज्यों के हालिया विधान सभा चुनाव, खास कर हिंदी बेल्ट के नतीजों ने भाजपा को नये सिरे से सोचने पर विवश कर दिया है कि 2019 लोकसभा चुनाव जीतना है तो जनता का दिल टटोलना होगा, उसकी इच्छाएं पूरी करनी होंगी.

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NewDelhi : पांच राज्यों के हालिया विधान सभा चुनाव, खास कर हिंदी बेल्ट के नतीजों ने भाजपा को नये सिरे से सोचने पर विवश कर दिया है कि 2019 लोकसभा चुनाव जीतना है तो जनता का दिल टटोलना होगा, उसकी इच्छाएं पूरी करनी होंगी.खबरों के अनुसार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अब नये तेवर के साथ सबका साथ, सबका विकास नारे के सहारे रूरल-सोशल इंजीनियरिंग पर विशेष ध्यान देने जा रही है. सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार ग्रामीण आबादी को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने की दिशा में कारगर कदम उठाने जा रही है. बताया जाता है कि कुछ मामलों में तो सरकार ने फैसला ले लिया है, बस उसकी घोषणा की जानी गबाकी है. बता दें कि   भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि अगर मोदी सरकार की योजनाओं का फायदा उठा रहे 22 करोड़ लाभार्थियों को अपने पाले में कर लिया जाये तो 2014 से भी बड़ी जीत 2019 में मिल सकती है.   हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों के वोटिंग पैटर्न से साफ हुआ है कि ग्रामीण इलाकों में भाजपा कमजोर हुई है. ऐसे में सरकार ने अपने बचे हुए कार्यकाल में फिर से ग्रामीण मतदाताओं को लुभाने के मकसद से कुछ अहम योजनाएं बनाई हैं या मौजूदा योजनाओं का विस्तार किया है.

किसानों का कर्ज माफ करने की बड़ी तैयारी?

बता दें कि कांग्रेस ने तीनों हिंदी पट्टी के राज्यों में विधान सभा चुनाव के दौरान किसानों की कर्जमाफी का न सिर्फ मुद्दा उठाया था बल्कि वादा भी किया था.  इस क्रम में सरकार बनते ही कांग्रेस सरकारों ने किसानों का कर्ज माफ कर दिया.  कांग्रेस के इस कदम से  केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर दबाव बढ़ गया है. चर्चा है कि मोदी सरकार जल्द ही कांग्रेस पर बढ़त बनाने और लगभग 26.3 करोड़ ग्रामीण किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए बड़ी कर्जमाफी की घोषणा कर सकती है.  मंत्रालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार 2019 के चुनाव से पहले चार लाख करोड़ रुपये का किसान कृषि ऋण माफ करने की योजना पर विमर्श कर रही है;  बता दें कि 2009 के आम चुनाव से पहले यूपीए सरकार ने साल 2008 में करीब 72,000 करोड़ रुपये का किसान कर्ज माफ किया था.  इसके बाद 2009 में मनमोहन सिंह सरकार वापस सत्ता में आयी थी.  माना जाता है कि मौजूदा समय में भाजपा किसानों की नाराजगी झेल रही है.

 जीएसटी  : 99 फीसदी वस्तुओं के दाम कम हो जायेंगे

प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर के मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देने की जुगत में है. सरकार के अनुसार  99 फीसदी सामानों को 18 फीसदी या उससे कम जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के दायरे में लाने की योजना पर काम चल रहा है.  इससे 99 फीसदी वस्तुओं के दाम कम हो जायेंगे.  माना जा रहा है कि 22 दिसंबर को होनेवाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस पर फैसला हो सकता है.  फिलहाल कुल 1378 सामानों की सूची में 39 पर 28 फीसदी टैक्स लग रहा है;  मोदी ने ऐसे समय में यह काम करने जा रही है, जब जीएसटी कलेक्शन इस वित्त वर्ष के लिए केंद्रीय और राज्य सरकारों के राजस्व लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये का मासिक औसत नुकसान हुआ है.

तीन लाख करोड़ रुपये रिकवर हुए हैं

पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (17 दिसंबर) को ही साफ किया है कि पिछले दो वर्षों में दिवालिया कानून के तहत सरकार ने तीन लाख करोड़ रुपये रिकवर किये हैं;  इसके साथ उन्होंने बैंक का कर्ज नहीं चुकाने वालों और आर्थिक भगोड़ों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है;  सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भी मजबूत करने, जीडीपी बढ़ाने, राजकोषीय घाटा कम करने पर भी काम कर रही है, ताकि आमजन से लेकर देश-विदेश तक यह संदेश जा सके कि सरकार आर्थिक मोर्चे पर मजबूत है.

सभी राशन कार्डधारियों को गैस कनेक्शन

मोदी सरकार ने कहा है कि अब राशन कार्ड धारियों को भी उज्ज्वला गैस कनेक्शन मुफ्त दिये जायेंगे. अभी तक योजना का लाभ केवल एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग को ही दिये जाने पर कार्य चल रहा था लेकिन अब समाज के सभी वर्गों के लोग जिनके पास राशन कार्ड होगा, वो मुफ्त में कनेक्शन ले सकेंगे;  हालांकि, पहले की तरह राशन कार्ड में परिवार की मुखिया महिला के नाम पर ही इस योजना का लाभ दिया जायेगा.  मोदी सरकार ने योजना का विस्तार कर 2019 के अंत तक करते हुए लाभार्थियों का लक्ष्य पांच करोड़ से बढ़ाकर आठ करोड़ कर दिया है.  बता दें कि देश में 9.27 करोड़ राशन कार्ड धारक हैं.  नये नियम के तहत एक करोड़ से ज्‍यादा लोगों को फायदा पहुंच सकेगा.

पेंशन योजना में सरकार का योगदान 14 फीसदी

मोदी सरकार ने हाल ही में नयी पेंशन योजना (एनपीएस) में सरकार का योगदान 10 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी कर दिया है, जबकि कर्मचारी पहले से ही 10 फीसदी का योगदान करते रहेंगे. इससे करोड़ों लोगों को पेंशन फायदा होगा.  अब मोदी सरकार ग्रैच्यूटी का लाभ लेने की समय सीमा पांच साल से घटाकर तीन साल करने पर विचार कर रही है और नियमों में बदलाव करने जा रही है ताकि अधिक से अधिक संख्या में नौकरी-पेशा लोगों को फायदा मिल सके.  इसके लिए ग्रेच्युटी एक्ट 1972 में बदलाव होगा. खबरों केअनुसार पांच साल से भी कम समय के कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मियों को भी ग्रेच्युटी के दायरे में लाने की विचार सरकार कर रही है.

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