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2018 में अब तक अवैध कोयला खनन में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत, जिम्मेदार कौन?

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Dhanbad: साल 2018 में अब तक कोयले की अवैध उत्खनन करते धनबाद के विभिन्न क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. यहां हर साल अवैध कोयला खनन करते लोगों की मौत हो रही है. कभी कम तो कभी अधिक. अवैध कोयला खनन में लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है, इस सवाल का कोई ठोस जवाब नहीं है. पुलिस मुख्यालय से डीजीपी बार-बार कहते रहे हैं कि कोयले का अवैध कारोबार या कोयले का अवैध उत्खनन हुआ तो क्षेत्र के थाना प्रभारी और एसपी नपेंगे. मगर, धनबाद में लगातार जारी कोयले के अवैध कारोबार और खनन को लेकर कब किस पुलिस पदाधिकारी पर कार्रवाई की गयी, यह भी बड़ा सवाल है.

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मौत के बाद मामले की होती है लीपापोती

कोयले के अवैध खनन के दौरान मौत की बात करें तो इस साल 9 अप्रैल को कालूबथान के केथारडीह जंगल में अवैध कोयला उत्खनन के कारण सैकड़ों फुट जमीन में दरार पड़ गयी थी. इस हादसे में कई लोगों के दब मरने की आशंका जतायी गयी थी. लेकिन, पुलिस और प्रशासन ने इस मामले पर पर्दा डाल दिया. 4 जुलाई को निरसा के श्यामपुर  कोलियरी में अवैध उत्खनन के दौरान तीन लोगों की मौत हो गयी. मगर, इस मामले की भी लीपापोती कर दी गयी. कई और जगह कोयले के अवैध उत्खनन के दौरान इक्के-दुक्के लोग की मौत की खबर मिलती रही है.

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किसकी सहमति से होती है अवैध कोयले की सामान्‍य ढुलाई

जिले में कोयला चोरी और कोयले का अवैध उत्खनन लगातार जारी है. रोज धनबाद गोविंदपुर, हीरक रोड पर बरवाअड्डा जाने वाला और बलियापुर आदि इलाके में दिन-रात साइकिल और बाइक से ढोया जाने वाला हजारों टन कोयला दो नंबरी ही होता है. यह कोयला अवैध खनन या चोरी का होता है. ऐसे कोयले की बेखौफ होनेवाली ढुलाई को देखकर कोई भी कह सकता है कि यह सामान्य बात है. इस धंधे के प्रति पुलिस लापरवाह है या इसमें उसकी सहमति है?

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कई जगह इन धंधेबाजों से होनेवाली वसूली को देखकर स्पष्ट होता है कि सब कुछ मिलीभगत से चल रहा है. आरोप यह भी है कि बीसीसीएल के आऊटसोर्सिंग पैच से कोयला की ढुलाई करनेवाले हाइवा से ही बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी होती है. पुलिस ने ऐसे कई हाइवा को अनेक बार ऐसी जगह पकड़ा जो उसके निर्धारित मार्ग पर नहीं पड़ता है.

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बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?

राजापुर में स्थित डेको के आऊटसोर्सिंग पैच में शुक्रवार को अवैध कोयला खनन के दौरान छह लोगों की मौत के बाद पहले तो पुलिस और प्रशासन के लोगों ने जल्दी-जल्दी लाशें निकलवाने की कार्रवाई की. जब तीन लाशें मिल गयी और ज्यादा लाशें मिलने की आशंका थी तो यह कह कर कार्रवाई रोक दी कि अब और लाशें नहीं दबी पड़ी है. इस दुर्घटना के लिए झरिया के अंचलाधिकारी केदारनाथ सिंह और सिंदरी डीएसपी प्रमोद कुमार केसरी ने बीसीसीएल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया. कहा, बीसीसीएल की अपने क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी है. सीआईएसएफ को इसे रोकना चाहिए. यह बात मान भी लें तो इसका क्या जवाब है कि चोरी और अवैध उत्खनन का कोयला जहां बिकता है या जिस रास्ते से निकलता है वह तो पुलिस-प्रशासन का क्षेत्र होता है, तब क्यों नहीं कार्रवाई होती है?

सच तो यह है कि यह सब बातें सिर्फ जिम्मेदारी से बचने के लिए की जाती है. जबकि, कोयले की चोरी, नाजायज कारोबार और अवैध उत्खनन में पुलिस, प्रशासन, पक्ष-विपक्ष के सफेदपोश आदि की मिलीभगत और हिस्सेदारी है. लोकसभा से लेकर विधानसभा तक बार-बार कोयले के अवैध कारोबार और चोरी की अनुगूंज के बाद भी सिर्फ खानापूर्ति होना, कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होना स्पष्ट करता है कि सब कुछ मैनेज है.

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