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कर्ज में डूबे पिठोरिया के 2000 किसान, झेल रहे 70 करोड़ का नुकसान

न डोभा और न सिंचाई की सुविधा, 500 मीटर दूर से पटवन के लिए लाते हैं पानी

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Ravi/Gaurav

RANCHI: झारखंड के किसानों का हाल तो बेहाल है ही, लेकिन राजधानी रांची के किसानों की स्थिति भी काफी गंभीर हो चली है. यहां के किसान करोड़ों के कर्ज में डूब चुके हैं. राजधानी से महज 25 किलोमीटर दूर पिठोरिया के लगभग 2000 से अधिक किसानों को 70 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. ग्रामीण किसान मायूस हैं. सरकारी सहायता की ओर टकटकी लगाये बैठे हैं. हालत इतनी खराब है कि उनके शरीर में सिर्फ पंजर ही दिख रहा है और भाव में निराशा. आधे से अधिक फसल बर्बाद हो चुकी है. उनका दर्द सरकारी व्यवस्था के खिलाफ छलक रहा है. सिर्फ मौसम और सरकारी व्यवस्था को कोस रहे हैं.

फसल बीमा का भी दावा खोखला

सरकार के लाख दावे के बावजूद राजधानी के किसानों को फसल बीमा का लाभ नहीं निकल पाया है. गांव के किसान जुगल किशोर साहू, संदीप और प्रकाश साहू भरभराती आवाज में कहते हैं कि पिछले साल फसल बीमा कराया था, उसका पैसा नहीं मिला. इस साल नहीं कराया. जब पिछला ही पैसा नहीं मिला तो इस साल कराने से क्या फायदा?

कर्ज में डूब गये हैं किसान

सरकार एक तरफ किसानों की आय दोगुनी करने की बात कह रही हैं, वहीं किसान कर्ज में डूबते जा रहे हैं. पिठोरिया में किसानों को खेती के लिए पानी नहीं मिल रहा है. हाल यह है कि जुगल किशोर साहू ने लाख रुपये कर्ज लेकर 1000 फीट गहरी बोरिंग करायी. पानी नहीं निकाला. 500 मीटर की दूरी से पीने का पानी लाकर खेतों में पटवन कर रहे हैं. सिंचाई की पानी की बात तो दूर गांव में एक सरकारी डोभा भी नहीं बना है.

सब्जी में हो चुका है करोड़ों का नुकसान

पिठोरिया गांव के 2000 किसानों को लगभग सात करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. गांव के ही जुगल किशोर साहू ने 50 हजार की लागत से 25 हजार फूल गोबी लगायी. इससे चार लाख रुपये की आमदनी होती. लेकिन जगुल किशोर साहू को सिर्फ लागत मूल्य ही मिल सकी. 3.50 लाख रुपये का नुकसान हो गया. इसी तरह 2000 किसानों को भी औसतन तीन से 3.50 लाख रुपये का नुकसान हुआ है.

दूसरे राज्यों में भी नहीं भेज पाये सब्जी

पिठोरिया से हर दिन नौ से दस ट्रक सब्जी भुनेश्नवर, दुर्गापुर, आसनसोल और कोलकाता भेजी जाती है. इस साल एक भी ट्रक सब्जी बाहर नहीं भेजी जा सकी. दो से तीन रूपये पीस गोबी बेचने को मजबूर हैं. एक दो बार भुनेश्वर सब्जी भेजा गया, लेकिन ट्रक का किराया भी घर से देना पड़ा.

अनाप-शनाप बिजली बिल भी थमा देता है विभाग

सरकार एक ओर दावा करती है कि किसानों के लिए अलग फीडर बनाया जायेगा. किसानों को डीजल, बीज में भी सब्सिडी दी जायेगी. लेकिन, सरकारी दावे हकीकत से कोसों दूर हैं. राजधानी से सटे पिठोरिया के किसानों को घर के साथ मशीन का बिजली हर माह औसतन 800 से 900 रुपये थमाया जा रहा है. किसान कहते भी हैं कि घर की माली हालत खराब हो गयी है. क्या खायेंगे, बाल-बच्चों को कैसे पालेंगे.

दस फीसदी तक महंगा हो सकता है अनाज

इस साल 10 फीसदी तक अनाज महंगा हो सकता है. अनाज के लिए छत्तीसगढ़, पंजाब और बिहार पर निर्भर रहना होगा. सामान्य स्थिति में प्रदेश में 55 लाख टन अनाज का उत्पादन होता है. इस साल 40 से 45 लाख टन अनाज उत्पादन की संभावना जतायी जा रही है. प्रति टन अनाज की कीमत लगभग 1000 रुपये आती है. इस हिसाब से 125 करोड़ रुपये का अनाज बाहर से मंगाना पड़ सकता है.

सुखाड़ की ओर बढ़ रहा है झारखंड

झारखंड सुखाड़ की ओर बढ़ रहा है. 2015 में 128 प्रखंडों में 55-60 फीसदी फसलों का नुकसान हुआ था. उस समय भी केंद्र से पैकेज की मांग की गयी थी. इस बार 18 जिलों के 129 प्रखंड को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है. राज्य गृह आपदा प्रबंधन विभाग ने इससे संबंधित अधिसूचना रविवार को जारी कर केंद्र को रिपोर्ट भेज दी है.

सुखाड़ घोषित करने के ये हैं मानक

  • 15 जून से 30 सितंबर तक 75 फीसदी से कम बारिश
  • फसल बुआई 50 फीसदी से कम होनी चाहिये
  • नॉर्मल डिफरेंशियल वेजिटेशन (एनडीवीआई) 0.4 फीसदी से कम होना चाहिये
  • आद्रता 0.4 फीसदी से कम होना चाहिये

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