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शिक्षा सातवीं पास और 200 लोगों को जोड़ चुके हैं बांस के पारंपरिक रोजगार से

गुमला, सिसई में चला रहे हैं 20 ट्रेनिंग सेंटर

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Chaya 

Ranchi:  बांस की कलाकारी ऐसी कि आधुनिक सोफा, कुर्सी भी सामने न टिक पायें. धागों से बांध कर बांस को ऐसे सजाया जाता की लोग देखते रह जायें. ऐसी बारीक कारीगरी है गुमला, सिसई के लखेटोली के रहने वाले पंचू तूरी की. जो पिछले 25 सालों से बांस से सोफा, मचिया, टेबल, कुर्सी आदि बना रहे हैं. घर से इन्होंने अपने व्यवसाय को शुरू किया. जो अब न सिर्फ लखेटोली बल्कि सिसई और गुमला की भी पहचान हैं. अपने बारे में बताते हुए पंचू ने कहा कि पिता खेती करते थे. घर की आर्थिक तंगी को देखते हुए लगा कि कुछ अलग करना चाहिए. गांव घरों में कुछ सीखने का अवसर काफी कम रहता है. ऐसे में उन्होंने बांस से सोफा, कुर्सी आदि बनाना सीखा और फिर अपना व्यवसाय शुरू किया.

200 लोग चला रहे अपना व्यवसाय

इन 25 सालों में इन्होंने लगभग तीन सौ लोगों को प्रशिक्षण दिया होगा. जिनमें से 200 लोग अब अपना रोजगार चला रहे हैं. पंचू ने जानकारी दी कि ग्रामीणों ने जब देखा कि इस काम से पैसा कमाया जा सकता है, तो लोग काम सीखने आने लगे. एक इच्छा भी थी कि ग्रामीणों के लिए  कुछ किया जाये. फिर ग्रामीणों को काम सिखाना शुरू कर दिया. अब काम सीख कर लोग झारखंड के साथ ही दूसरे राज्यों में भी रोजी रोटी चला रहे हैं. सिसई में इनके 20 ट्रेनिंग सेंटर हैं.

सातवीं कक्षा तक की है पढ़ाई

पंचू की पढ़ाई सिर्फ सातवीं कक्षा तक हुई है. आर्थिक तंगी के कारण इन्होंने कम उम्र में ही काम करना शुरू  किया. गांव में ऐसे भी पहले स्कूलों की कमी थी. ऐेसे में स्थानीय स्कूल से ही सातवीं तक पढ़ाई कर, घर में हाथ बटाना शुरू किया.

गांव में ही मिल जाता है बांस

गांव में बांस की कमी नहीं है. गांव से कुछ दूरी पर जंगल होने पर भी पर्याप्त मात्रा में बांस मिल जाते हैं. जिसमें कोई परेशानी नहीं होती. कुछ ग्रामीण घर में ही काम सीखने आते हैं. ऐसे में उन्हीं के साथ जाकर बांस तोड़ लाते है.

बांस से कैसे बनती हैं चीजे

बांस को कटर मशीन से पतले लंबे आकार में काटा जाता है. काटने के बाद बांस को लगभग एक सप्ताह तक धूप में सुखाया जाता है. बांस के सूखने के बाद ही सोफा आदि बनाया जाता है. उन्होंने बताया कि प्लास्टिक और बांस के धागों से ही बांस को बांधा जाता है. एक सोफा बनाने में कम से कम तीन दिन का समय लगता है.

परिवार भी जुड़ा है व्यवसाय से

इन्होंने बताया कि इनका परिवार भी इनके इस काम में बढ़ चढ़ के मदद करता है. बेटा चंद्रपाल भी पिछले छह साल से इनके साथ काम कर रहा है. वहीं पत्नी और बहू भी इनकी सहयोगी है. पंचू ने कहा कि परिवार की सहायता से ही व्यवसाय इतना बढ़ा है.

राज्य भर से आते हैं ऑर्डर

पंचू के पास राज्य भर से ऑर्डर आते हैं. कुछ दुकान इनके बनाये देवयानी सोफा और कुर्सियों का ऑर्डर हमेशा करते हैं. कुछ लोग जो गांव कभी-कभार घूमने आते हैं वो भी ऑर्डर  देखकर सोफा आदि की मांग करते हैं.

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