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BSL से व्यापार करने वाली 200 कंपनियां बंद होने के कगार पर, स्टील मिनिस्टर से हस्तक्षेप करने की मांग

बोकारो चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रेसिडेंट संजय वैद्य ने कहा यह BIADA में स्थित इंडस्ट्रीज के लिए संकट का समय है.

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Bokaro: 200 से अधिक कंपनियां, जो अपने उत्पादन और माल की आपूर्ति के लिए बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) पर निर्भर हैं, आज बंद होने के कगार पर हैं. इनमें 70 इंडस्ट्रीज बोकारो इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (BIADA), बलिडीह में हैं और 150 सप्लायर्स हैं जो माल को BSL में सप्लाई कर मुनाफा कमाते हैं.

BSL द्वारा भुगतान करने में अनुचित देरी के कारण ये कंपनीज बुरे दौर से गुजर रहे हैं. बोकारो चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (BCCI) ने शुक्रवार को केंद्रीय इस्पात मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान को SOS भेजा और इस बुरे दौर से उबरने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की. इसी तरह का पत्र मुख्यमंत्री, सचिव, उद्योग, झारखंड, के रवि कुमार और BIADA के अन्य अधिकारियों को भेजा गया है.

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कर्मियों को नौकरी जाने का सता रहा डर

BIADA में लगभग 475 MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) हैं, जिनमें से 150 इकाइयों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है. शेष 325 पंजीकृत इकाइयों में से 250 उद्योग बीमार या गैर-परिचालन हैं. बाकी 70 उद्योग जो चालू हैं, बीएसएल द्वारा भुगतान में देरी के कारण बुरी तरह प्रभावित हैं. प्रभावित कंपनियां यांत्रिक पुर्जों, रबर रोल, रसायनों आदि के उत्पादन या आपूर्ति में लगी हुई हैं.

“इन इकाइयों में काम करने वाले हजारों कर्मियों को नौकरी जाने का डर सता रहा है. उन्हें वेतन और पारिश्रमिक मिलने में देरी का सामना करना पड़ रहा है. वहीं दूसरी ओर उद्यमी जीएसटी रिटर्न, कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) और भविष्य निधि जैसे अन्य सांविधिक योगदान समय पर करने से चूक रहे हैं.

झारखंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (JIA) के अध्यक्ष महेश केजरीवाल ने कहा कि हमने इस्पात मंत्री को पत्र भेजकर उद्योगों और आपूर्तिकर्ताओं को बचाने में मदद मांगी है, क्योंकि बीएसएल भुगतान प्रक्रिया में देरी कर रहा है. MSME अधिनियम 2006 के अनुसार कंपनी को 15 दिनों के भीतर स्वीकृति या अस्वीकृति देनी होती है. अगर 15 दिनों में जवाब नहीं दिया जाता है, तो इसे स्वीकृति के रूप में लिया जाएगा.

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चार दशकों में पहली बार इतने बुरे दौर से गुजर रहे BIADA स्थित इंडस्ट्रियल यूनिट्स 

यह पिछले चार दशकों में पहली बार है जब ​​BIADA में स्थित इंडस्ट्रियल यूनिट्स इतने बुरे दौर से गुजर रहे हैं. उद्यमियों ने अपनी समस्या अतिरिक्त सचिव, इस्पात मंत्रालय, रसिका चौबे के पास कुछ दिन पहले रखी थी.

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चौबे हाल ही में यहां स्टील कलस्टर की स्थापना के संभावनाओं का पता लगाने के लिए दौरा किया था. उन्होंने BIADA, बीएसएल और प्रशासन के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक में उद्यमियों को संभव मदद का आश्वासन दिया.

BCCI के अध्यक्ष, संजय बैद ने कहा कि उद्यमी और आपूर्तिकर्ता बीएसएल द्वारा माल रसीद नोट (जीआरएन) जारी करने में देरी के कारण उनके द्वारा आपूर्ति की गई वस्तुओं का बिल जमा नहीं कर पा रहे हैं.

इससे पिछले कई महीनों से उद्योगों को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है. धीरे-धीरे स्थिति खराब होती जा रही है और उद्योग बंद होने के कगार पर हैं, जबकि आपूर्तिकर्ता संकट में हैं. कई प्रयासों के बावजूद, बीएसएल उनके अनुरोध पर ध्यान नहीं दे रहा है और समय पर जीआरएन जारी करने की अनदेखी कर रहा है.

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क्या कहना है BIADA के सचिव का

BIADA के सचिव पी एन मिश्रा ने कहा कि गुरुवार को इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए हमने बीएसएल और उद्यमियों के साथ त्रिपक्षीय बैठक की. बीएसएल ने मामले को जल्द सुलझाने के लिए सकारात्मक आश्वासन दिया है. BSL के जीआरएन जारी करने में देरी के कारण कई MSME संकट में है. प्रबंध निदेशक, BIADA सह डीसी, बोकारो, कृपानंद झा भी इस मुद्दे से निपटने के लिए सकारात्मक कदम उठा रहे हैं.

ऐसे समय में जब झारखंड सरकार राज्य में निवेशकों को आमंत्रित कर रही है, मौजूदा MSME की ऐसी हालत यहां के लोगों के बीच बहस छेड़ दी है. BIADA की जर्जर तस्वीर ने हालांकि सरकार और अधिकारियों का ध्यान खींचा है लेकिन वे उद्योगों को इस बुरे समय से बाहर लाने में विफल रहे.

BSL के प्रवक्ता, मणिकांत धान ने कहा कि जीआरएन एक प्रमाण है जो यह साबित करता है की विक्रेता द्वारा आपूर्ति की गई सामग्री संतोषजनक है. जीआरएन जारी करने से पहले, सामग्री का निरीक्षण संबंधित विभाग द्वारा किया जाता है.

जीआरएन सामग्री की उचित प्राप्ति, उचित गिनती, वजन, आवश्यक दस्तावेजों को प्रस्तुत करने सहित कई गतिविधियों की संतोषजनक पूर्णता पर निर्भर है. एक या एक से अधिक गतिविधियों का पालन न करने से जीआरएन में देरी होती है.

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