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20 हजार आदिवासियों ने मानव श्रृंखला बना सरकार की नीतियों का किया विरोध

झारखंड की राजधानी रांची में रविवार को लगभग 20,000 आदिवासी समुदाय के लोगों ने पंक्तिबद्ध खड़े होकर आदिवासी नीति का विरोध किया.

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 Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची में रविवार को लगभग 20,000 आदिवासी समुदाय के लोगों ने पंक्तिबद्ध सड़क के किनारे खड़े होकर सरकार की आदिवासी नीति का विरोध किया. मानव श्रृंखला की शुरुआत सुजाता चौक से शुरू होकर बहू बाजार, कांटाटोली, डंगराटोली, लालपुर चौक, कचहरी चौक से कांके रोड, गांधीनगर होते हुए कांके में समाप्त हुई, मानव श्रृंखला में बारिश के बावजूद युवक-युवतियों के साथ महिलाएं व बच्चे भारी संख्या में उपस्थित थे. विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में आदिवासी युवा नेतृत्वकर्ता कुलदीप तिर्की ने कहा कि हम ईसाई आदिवासी लोग शांतिप्रिय एवं अमन चैन पसंद हैं, लेकिन वर्तमान सरकार साजिश के तहत मीडिया के द्वारा अमन, चैन और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने का काम कर रही है.  आने वाले दिनों में ऐसे मीडिया का सामाजिक बहिष्कार किया जायेगा.

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भाजपा की सरकार में अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ गये हैं

युवा महासचिव एलविन लकड़ा  ने कहा कि कि जब से राज्य में भाजपा की सरकार आयी है तब से अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ गये हैं और खास समुदाय को बार-बार टारगेट किया जा रहा है.  संविधान के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास किया जा रहा है.  सरना व ईसाई के बीच मतभेद पैदा किया जा रहा है,  ताकि वह जमीन को लूट कर पूंजीपतियों को दे सके. आदिवासी नेता अजय टोप्पो ने कहा कि राज्य में युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.  आरक्षण और नियोजन नीति की धज्जियां उड़ाते हुए बाहरी लोगों को नौकरी दी जा रही है.  सरकार धर्म की राजनीति कर रही है और आदिवासी संस्कृति को दरकिनार करते हुए बाहरी संस्कृति को बढ़ावा दे रही है.

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सरकार आदिवासियों की हितैषी है, तो सरना कोड लागू करे

प्रदेश युवा सचिव विकास तिर्की ने भाजपा को चेताते हुए कहा कि अगर भाजपा सरकार सच में आदिवासियों की हितैषी है, तो सरना कोड को लागू करे और ईसाई मिशनरियों पर बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करे. राज्य में धर्मांतरण कहीं नहीं हो रहा,  इसलिए सरकार  आंकड़ों के साथ बात करे, सिर्फ़ आरोप न लगाये.  मानव श्रृंखला में विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ साथ केंद्रीय सरना समिति, आदिवासी छात्र संगठन, आदिवासी युवा मोर्चा  के सदस्य इत्यादि उपस्थित थे. मानव श्रृंखला कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रुप से शीतल रुंडा, महिमा गोल्डन, अरुण नगेशिया, सोनिया  तिग्गा, सनी किशोर, मुक्ति सोरेंग, अभिषेक बाड़ा, आकाश मिंज, रवि तिर्की, दिलीप समद, मुक्ति मिंज, सुजीत कुजूर, एंड्रयू एक्का, सागर तिर्की तथा रवि कुजूर आदि का योगदान रहा.

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