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2 हजार पारा शिक्षकों ने CM से मांगी इच्छा मृत्यु, 15 महीने से बकाया है मानदेय, स्वतंत्रता दिवस के दिन करेंगे आत्मदाह

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– एनसी डी.एल.एड प्रशिक्षित पारा शिक्षकों ने 15 महीने से बकाया है मानदेय नहीं

Ranchi: राज्य के दो हजार एनसी डीएलएड प्रशिक्षित पारा शिक्षकों को 15 महीने से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है. जिससे उन्हें जीविकोपार्जन में काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गयी है. इसके बाद 2000 पारा शिक्षकों ने सीएम से इच्छा मृत्यु की मांग की है. सीएम को पत्र लिखकर वेतन भुगतान की मांग की है.

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भुगतान नहीं होने पर सिर्फ छत्तरपुर के 400 एन सी डीएलएड पारा शिक्षक रांची में 15 अगस्त को आत्मदाह करेंगे. पलामू जिला पारा शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ऋषिकांत तिवारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर सरकार से 15 महीने से बकाये मानदेय का भुगतान करने का अनुरोध किया है. 15 महीने से मानदेय भुगतान नहीं होने के कारण अत्यंत दयनीय हालत और भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है.

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झामुमो पर विश्वास कर ही रघुवर सरकार के तख्ता पलटने की दी थी चुनौती

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि झारखंड के पारा शिक्षकों मे झामुमो की ओर से पारा शिक्षकों की समस्याओं के समाधान करने के वादे पर भरोसा किया था. झामुमो पर विश्वास के साथ ही पिछले तानाशाही सरकार द्वारा पारा शिक्षकों को शोषण अत्याचार करने के कारण पूर्व सरकार का तख्ता पलटने की चुनौती दी थी. लेकिन अभी तक वर्तमान सरकार पूर्व की रघुवर सरकार द्वारा पारा शिक्षकों का मानदेय बन्द कर विद्यालय से हटाए जाने के आदेश का ही पालन कर रही है.

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मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया है कि झारखंड में अप्रशिक्षित पारा शिक्षक और एनसी लगे हुए पारा शिक्षक की स्थिति बहुत ही दयनीय हो चुकी है. पारा शिक्षकों के घर में खाने पीने का भी कोई साधन सुविधा नहीं बचा है. पूरा परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच चुका है.

15 महीनों से मानदेय बन्द होने और झारखंड सरकार द्वारा भी बन्द मानदेय का भुगतान नहीं करने के कारण पारा शिक्षकों के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है.

क्या है मामला

एनसी डीएलएड पारा शिक्षकों ने डीएलएड की परीक्षा पास कर ली है. मगर 45 और 50 प्रतिशत की अहर्ता नहीं रखने के कारण उनके मार्कशीट पर एनसी अंकित कर दिया गया है. लेकिन अब लगभग अधिकांश पारा शिक्षकों ने अहर्ता को पूरा कर लिया है. एनआइओएस द्वारा इंटर के इंप्रूवमेंट वाले वेब पोर्टल को बंद कर दिया गया है. जिस कारण एनसी क्लीयरेंस का सर्टिफिकेट नहीं मिल पा रहा है.

अब सरकार इस मामले में अपने स्तर से कोई सुनवाई नहीं कर रही है. जिसके कारण उनके वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है. रघुवर दास के सरकार के दौरान ही इनके वेतन पर रोक लगाया गया था. पर सरकार बदलने के बाद भी उस आदेश को नहीं बदला गया है और एनसी डीएलएडएड प्रशिक्षित पारा शिक्षकों के वेतन का भुगतान नहीं हो पा रहा है.

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