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बीजेपी से खफा राज्य के 2.37 लाख रसोईयाकर्मी, संघ अध्यक्ष ने कहा- चुनाव में सिखायेंगे सबक

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  • सरकार के रवैये से आक्रोश में रसोईकर्मी, रसोई संघ ने लिया निर्णय, चला रहे अभियान
  • अध्यक्ष ने कहा- लोगों को बेरोजगार करने वाली सरकार सत्ता में दुबारा न आएं तो बेहतर
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Ranchi: लंबे समय से 15 सूत्री मांगों के लिए आंदोलन कर रहे रसोईया कर्मियों का आक्रोश अपने चरम पर है. और चुनाव में इसका असर देखने को मिलेगा. प्रदेश में कहीं न कहीं सरकार को चुनाव में इससे घाटा सहना पड़ सकता है.

सत्तारूढ़ पार्टी से खफा रसोईया कर्मी

सरकारी नीतियों से खफा रसोईया कर्मियों ने आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सत्तारुढ़ पार्टी बीजेपी को सबक सिखाने की तैयारी कर रखी है. सरकार से नियमित मानदेय की मांग करते-करते थक चुके रसोईया कर्मी चुनाव को लेकर अब अपने आंदोलन की रूप रेखा तय कर रहे है.

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झारखंड प्रदेश रसोईया संयोजिका संघ के अध्यक्ष अजीत प्रजापति ने जानकारी दी कि संघ की ओर से निर्णय लिया है कि कोई भी रसोईया कर्मी चुनाव में बीजेपी का साथ नहीं देगा.

क्योंकि अपनी मांगों के लिए रसोईया कर्मियों ने राज्य से लेकर केंद्र तक में अपनी बात रखी. लेकिन किसी स्तर पर रसोईया कर्मियों की मांग नहीं मानी गई. सिर्फ आश्वासन मिला.

2 लाख 37 हजार हैं रसोईया कर्मी

राज्य में लगभग 2 लाख 37 हजार रसोईया कर्मी है. जो स्कूलों में मीड डे मिल बनाती हैं. ऐसे में आगामी चुनाव में सरकार को इनकी नाराजगी भारी पड़ सकती है. उल्लेखनीय है कि साल 2018 में सितंबर से लेकर नवंबर तक रसोईया कर्मियों ने अनिश्चिकालीन हड़ताल की थी.

कई स्तर पर शिक्षा मंत्री और विभागीय अधिकारियों से मुलाकात की गई थी. लेकिन रसोईया कर्मियों के नियमितकरण और नियमित मानदेय की बात पर सहमति नहीं बन पाई.

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राजभवन के पास से हटाने के बाद रसोईया कर्मियों ने जंतर मंतर के समीप भी आंदोलन जारी रखा था. लेकिन इसके बावजूद उनके मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. जबकि राज्य के रसोईया कर्मियों को एक साल के मात्र दस माह में प्रति माह 1500 रूपये दिए जाते हैं.

जारी है बैठकें

सरकार से खासे नाराज रसोईया संघ ने एक रणनीति के तहत बहिष्कार करने की योजना बनायी है. इसकी जानकारी देते हुए प्रदेश अध्यक्ष अजीत प्रजापति ने कहा कि रसोईया संघ की रणनीति को लेकर बैठकों का दौर जारी है.

पिछले 24 मार्च को भी संघ की ओर से गुमला में बैठक आयोजित की गई. वहीं 31 मार्च से प्रत्येक रविवार को प्रखंडों में बैठक की जाएगी. जिसमें बीजेपी की नीतियों और चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी को सबक सिखाने को लेकर रसोईया कर्मियों को जागरूक किया जाएगा. लोकसभा चुनाव को देखते हुए प्रत्येक विधानसभा स्तर पर पहले अभियान चलाया जा रहा है.

कई रसोईयाकर्मी हुए बेरोजगार

ज्ञात हो कि स्कूल विलय के समय में एक ओर जहां सरकार ने 8000 रसोईया कर्मियों को बेरोजगार किया. वहीं दिसंबर में आंदोलन खत्म होने के बाद भी कई रसोईया कर्मियों को फिर से बेरोजगार कर दिया गया.

जिसमें रसोईया कर्मियों को कहा गया कि खाना के कारण बच्चे स्कूल में पढ़ते नहीं. ऐसे में रसोईया कर्मियों को हटा दिया गया. उन्होंने कहा जब सरकार बेरोजगारी को बढ़ावा दे रही है, तो उन्हें सत्ता में दोबारा आना नहीं चाहिए.

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