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NewsWing Exclusive : एमजीएम का ये नया कोरोना वार्ड तो ले लेगा मरीजों की जान, एक मीटर की दूरी पर लगा दिये बेड

अस्पताल में बनाये गये 100 बेड के अस्थायी कोरोना वार्ड के निर्माण में MCI के नियमों की धज्जियां उड़ायी गयीं, मरीजों को क्रॉस इन्फेक्शन का जानलेवा खतरा

Rajnish Tiwari

दुनिया भर में अब तक की सबसे बड़ी महामारी माना जा रहा कोविड-19 जिले में 1057 लोगों की जान ले चुका है. 51872 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं.  इसके बावजूद पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन को कोरोना की तीसरी संभावित लहर का कोई खौफ नहीं है. तीसरी संभावित लहर को लेकर जहां जिले में पुख्ता तैयारियां होनी चाहिए थीं, वहीं खानापूर्ति करते हुए ऐसा अस्थाई वार्ड बना दिया गया है, जो बीमारों को ठीक करने की बजाय और बीमार कर देगा या जान तक ले लेगा. हम बात कर रहे हैं कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम में नवनिर्मित 100 बेड के अस्थाई कोरोना वार्ड की.

एक से डेढ़ मीटर की दूरी पर सटा-सटाकर लगाये गये हैं बेड

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की मूलभूत गाइडलाइन के तहत किसी भी सरकारी या गैर सरकारी अस्पताल या नर्सिंग होम में दो बेड के बीच परस्पर कम से कम तीन मीटर की दूरी होनी चाहिए, ताकि मरीजों को क्रॉस इंफेक्शन का खतरा न हो. पर एमजीएम में एएनएम स्कूल के समीप बनाये गये नये अस्थायी 100 बेड के कोरोना वार्ड में महज एक से डेढ़ मीटर की दूरी पर सटा-सटाकर बेड लगाये गये हैं. ऐसे में मरीजों में क्रॉस इंफेक्शन का बेहद खतरा होगा. कोरोना एक बेहद ही संक्रामक बीमारी है. ज्ञात हो कि वर्ष 2017 में  नीकू‘-पीकू (NICU-PICU) में सटा-सटाकर एक ही वार्मर पर इलाज किये जाने से क्रॉस इंफेक्शन के कारण कई नवजातों की मौत हो गई थी. इससे पूरे देश में एमजीएम अस्पताल की काफी फजीहत हुई थी.

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थर्ड वेव के आने पर बेड की किल्लत न हो, इसके लिए इस 100 बेड के वार्ड का निर्माण कराया गया है. हालांकि इसमें बेड के बीच परस्पर दूरी एमसीआई के दिशा-निर्देश अनुरूप नहीं है, पर फिर भी बेड के बीच पर्याप्त दूरी रखी गयी है.

– संदीप कुमार मीणा, एसडीओ, जमशेदपुर

लगाते ही चौथे दिन फट गयी एक कैनोपी, दोबारा मंगानी पड़ी

विदित हो कि नयी दिल्ली के इंडियन-अमेरिकन सोसाइटी नामक एनजीओ की ओर से एमजीएम में करीब 12000 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाये गये इस 100 बेड के अस्थायी कोरोना वार्ड में 16 आईसीयू, 30 ऑक्सीजन और 54 जनरल बेड लगाए गए हैं. इसे चार प्लाटिक की गैरा भरी हुई कैनोपी से तैयार किया गया है. निर्माण के दौरान कई लापरवाहियां बरती गई हैं. बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्थापित किए जाने के महज चौथे दिन ही गत 28-29 अगस्त को चार में एक कैनोपी फट गई थी. बाद में दिल्ली से नई कैनोपी मंगाकर लगवाई गई.

अस्पताल प्रबंधन से नहीं ली राय, एनजीओ ने बना दिया वार्ड

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस एनजीओ ने इस अस्थायी वार्ड का निर्माण कराया है, उसने निर्माण के दौरान या पूर्व में एक बार भी एमजीएम अस्पताल प्रबंधन या डॉक्टरों से मंतव्य नहीं लिया. एनजीओ ने अपने प्रारूप पर एसडीओ संदीप कुमार मीणा के सुपरविजन में आनन-फानन में इस वार्ड को बनाकर तैयार कर दिया. वार्ड बनकर पूरी तरह तैयार है और जल्द ही इसे एमजीएम को हैंडओवर कर उद्घाटन किया जा सकता है. पर यह वार्ड कितना कारगर होगा, इस पर कई सवालिया निशान हैं.

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