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उत्तर भारत में गिरती क्रांतिकारी गतिविधियों पर महत्वपूर्ण असर डालेगी किशन दा और शीला की गिरफ्तारी

एमसीसी-पीपुल्स वार विलय और भाकपा माओवादी के गठन में प्रमुख भूमिका निभायी थी प्रशांत बोस ने, पत्नी शीला मरांडी हैं माओवादी केंद्रीय कमेटी की एकमात्र महिला सदस्य

Jamsedpur : भारत की सबसे खुफिया और हथियारबंद क्रांतिकारी पार्टी भाकपा माओवादी के टॉप कमांडर प्रशांत बोस उर्फ ​​किशन दा को झारखंड पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया है. तेलंगाना टाइम्स ने विश्वस्त सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है. उनके साथ उनकी पत्नी शीला मरांडी के भी गिरफ्तार होने की सूचना है. हालांकि झारखंड पुलिस ने इस बारे में अब तक कोई बयान जारी नहीं किया है. लगभग 75 वर्षीय किशन दा, सबसे सीनियर माओवादी नेताओं में से एक हैं और 2004 में सीपीआई-एमएल (पीपुल्स वॉर) के साथ विलय से पहले माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (एमसीसीआई) के प्रमुख थे. किशन दा उन विचारकों में शामिल थे, जिन्होंने पीपुल्स वार और एमसीसी के विलय के साथ क्रांतिकारी ताकतों के पुनर्मिलन की देखरेख में मुख्य भूमिका निभायी थी. इसके परिणामस्वरूप सबसे खूंखार माओवादी संगठन भाकपा (माओवादी) का जन्म हुआ.

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पश्चिम बंगाल के जादवपुर इलाके के रहने वाले  हैं किशन दा उर्फ प्रशांत बोस  प्रशांत बोस पश्चिम बंगाल के जादवपुर इलाके के रहने वाले हैं. उन्हें निर्भय, किशन, काजल और महेश जैसे उनके उपनामों से भी जाना जाता है. किशन दा वर्तमान में भाकपा माओवादी केंद्रीय समिति, पोलित ब्यूरो, केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के सदस्य और माओवादी पार्टी के पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो (इआरबी) के सचिव हैं. इआरबी सचिव होने के नाते, वह पूर्वोत्तर राज्यों, बिहार, झारखंड, बंगाल और उत्तर प्रदेश में क्रांतिकारी आंदोलन की देखरेख और समन्वय करते हैं. प्रशांत बोस लगभग 75 वर्ष के हैं और पिछले कुछ अरसे से बीमार चल रहे हैं. माना जा रहा था कि वह झारखंड के सारंडा के जंगलों में रह कर अपना काम कर रहे थे. हालांकि उनकी गिरफ्तारी सरायकेला जिले के किसी स्थान के होने की बात सामने आ रही है.

भाकपा माओवादी केंद्रीय कमेटी की एकमात्र महिला सदस्य हैं शीला मरांडी किशन दा के साथ गिरफ्तार की गयीं उनकी पत्नी शीला मरांडी,  भाकपा माओवादी की वरिष्ठ नेता हैं. वह इस नक्सली संगठन की निर्णय लेने वाली केंद्रीय समिति (सीसी) की एकमात्र महिला सदस्य हैं. शीला मरांडी भी शीर्ष नक्सली नेता हैं और उनकी उम्र लगभग 60 वर्ष है. वह वर्तमान में केंद्रीय समिति (सीसी) की सदस्य हैं. शीला को वर्ष 2006 में ओडिशा में गिरफ्तार किया गया था और राउरकेला जेल में रखा गया था. जेल से रिहा होने के बाद करीब पांच साल पहले उन्हें कथित तौर पर दोबरा भाकपा (माओवादी) में शामिल कर लिया गया था. शीला को देश भर में भाकपा माओवादी से संबद्ध महिला संगठनों का मार्गदर्शन करने का प्रभारी माना जाता है. शीला मरांडी झारखंड के धनबाद जिले के टुंडी के नावाटांड़ की  की रहने वाली हैं और उन्हें हेमा, शपबडी, आशा, बुधनी और गुड्डी के नाम से जाना जाता है.

भाकपा (माओवादी) पार्टी के इन दो वरिष्ठतम नेताओं की गिरफ्तारी से माओवादी कैडरों के मनोबल पर असर पड़ना तय है और उत्तर भारत में पहले से ही गिरती क्रांतिकारी गतिविधियों पर इनकी गिरफ्तारी का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा.

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