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1947 के बाद आज तक विस्थापित हुए आदिवासियों का पुनर्वास नहीं हुआ : वासवी

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Latehar : पायलट प्रोजेक्ट नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज रद़द करने की मांग को लेकर आयोजित दो दिवसीय वर्षगांठ कार्यक्रम में दूसरे दिन भी हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथि डॉ वासवी किड़ो ने कहा कि 1947 के बाद आज तक विस्थापित हुए आदिवासियों का पुनर्वास नहीं हुआ है. झारखंड में विस्थापित पुनर्वासित आयोग तक नहीं है. विस्थापित हुए आदिवासियों के पुनर्वास स्थल की ज़मीन का डिमांड में नाम नहीं है. कहा कि  आदिवासियों को मिल कर झारखंड को विस्थापन मुक्त बनाना होगा, नहीं तो पूर्व में विस्थापित हुए आदिवासियों की तरह हमें भी भटकना पड सकता है. इस अवसर पर कांग्रेस नेता अरुण उरांव ने बताया कि झारखंड में तीन मुद़दे ज़्वलंत हैं. आदिवासी   विस्थापन, आदिवासी एकता एवं केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की रघुवर सरकार की आदिवासी विरोधी नीति ज़्वलंत मुद्दे हैं.  कहा कि केंद्र और राज्य सरकार में हमारे वोट से जीते प्रतिनिधि पहुंचे हैं,  मगर वे आदिवासी के हित में नहीं, आदिवासी के विरोध में कार्य कर रहे हैं.  वे हमें बचाने के लिए कानून न बना कर पूर्व के कानून में संशोधन कर हमें प्रभावित करने का काम कर रहे हैं. 

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सरकार आदिवासियों से जमीन छीन कर उऩ्हें विस्थापित करना चाहती है   

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोध मंच के सलाहकार फादर साबरी ने कहा कि सभी स्थानीय आदिवासी मिल कर स्थानीय नेता को चुने, जो हमारे हित में कार्य करे. यह निर्णय सभी मिलकर लें. एक बात का ध्यान रखें कि वह नेता हमारा हितैशी हो, न कि नेता बनने के बाद हमें भूल कर हमारे विरोध में चले जाये. अऩ्य वक़्ता जय प्रकाश मिंज ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने आदिवासियों को खत्म करने के लिए झारखंड मोमेंटो योजना बनाई है.  जिसके लिए झारखंड में बीस लाख एकड़ ज़मीन चाहिए.  यही ज़मीन सरकार आदिवासियों  से छीन कर उऩ्हें विस्थापित कर  लेना चाहती है.  कभी बाघ परियोजना के नाम पर तो कभी हाथी परियोजना के नाम तो कभी  फील्ड फायरिंग  रेंज निर्माण के नाम पर सरकार आदिवासी को खत्म करना चाहती है. 

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बाक्साइड के अंधाधुंध उत्खनन,  टाइगर परियोजना पर चर्चा 

दूसरे दिन समापन कार्यक्रम में दर्जनों आदिवासी वक्ताओं मलिना कुजूर जिला परिसद महुआडाँर यदुसीय लकड़ा, विक्टर मिंज, रतन तिर्की,  शासी पन्ना, स्टीफन किरो,  ज्या सिलियुस टोप्पो, प्रमोद बोरो, थेओडोर किरो, अजित पाल,  अजय लकड़ा,  जेराल्ड कुजूर, एनएनएफआर के  सचिव अनिल मनोहर आदि ने बाक्साइड का अंधाधुंध उत्खनन,  टाइगर परियोजना का विस्तारीकरण और नेतरहाट फील्ड फाइरिंग रेंज पर चर्चा की. कार्यक्रम में विभिन्न छात्र संघ के युवक युवतियों ने विस्थापन, पलायन, लैंड बैंक, आदिवासी एकता,  आदिवासी संस्कृति,  पूंजीपति दमन आदि पर नुक़्कड़ नाटक प्रस़्तुत किये.

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