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किसानों को धान खरीदारी का जल्द पूरा पैसा देने की तैयारी, 19 नए राइस मिल होंगे स्थापित

चुनौती भी है, राइस मिलों ने नौ वर्षों में 90 करोड़ का लगाया है सरकार को चूना

Ranchi : सूबे के किसानों को धान खरीद का पूरा भुगतान जल्द करने की कवायद शुरू कर दी गई है. इसके मद्देनजर सरकार की ओर से 19 नए राइस मिल की स्थापना करने की तैयारी शुरू कर दी गई है. इन मिलों के स्थापित होने के बाद किसानों का 50 प्रतिशत बचा हुआ पैसा उनके खाते में भेजा जा सकेगा.

खाद्य-आपूर्ति विभाग ने नए मिलों को लेकर लाइसेंस निर्गत की प्रक्रिया शुरू की है. नए मिल स्थापित किए जाने के साथ-साथ विभाग को ऐसे मिलों की पूरी पड़ताल भी करनी होगी, अभी तक सरकार को करीब दस मिल संचालकों ने 90 करोड़ का चूना लगा चुके हैं.

विभागीय सचिव अरूण सिंह के अनुसार नए राइस मिल के खुलने से सबसे अधिक लाभ यहां के किसानों को मिलेगा. सबसे बड़ी राहत किसानों के भुगतान में देखने को मिलेगी.

मालूम हो कि अभी किसान एमएसपी पर धान बेचते हैं उसकी खरीदारी कर तुरंत उनके खाते में 50 प्रतिशत तक की राशि भेज दी जाती है. बाकी बची हुई राशि मिल में धान जमा होने के बाद दिया जाता है. मिलों की संख्या कम होने के कारण भुगतान में हमेशा देरी होती है.

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सूबे में 74 राइस मिल लेकिन 60 मिलों में ही जाता है धान

सूबे में फिलहाल कुल 74 राइस मिल हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 60 मिल ही सरकार के साथ टैग हैं, जहां पर किसानों का धान भेजा जाता है. संख्या कम होने और किसानों की संख्या करीब 50 हजार तक होने के कारण समय पर धान मिल नहीं पहुंच पाता है.

दूसरी ओर मिलों के पास गोदामों की संख्या भी काफी कम है जिस कारण भी किसानों को भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता है. इन सभी समस्याओं को लेकर विभाग जिन मिलों को लाईसेंस निर्गत करेगा उनसे गोदामों की भी उपलब्धता पर चर्चा की जाएगी.

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राइस मिलों पर नौ वर्षों में 90 करोड़ है बकाया

राइस मिलों ने भी सरकार को खूब चूना लगाया है. अभी तक करीब एक दर्जन राइस मिलों पर सरकार का करीब 90 करोड़ से अधिक बकाया है, जिसे वसूला नहीं जा सका है. फिलहाल सरकार की ओर से कानूनी लड़ाई चल रही है.

इन मिलों में धान की कुटाई के बाद उतनी ही रकम का चावल खाद्य निगम को नहीं दिया गया। विभाग की ओर से ऐसे मिलों की सूची पर वारंट भी जारी किया जा चुका है.

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