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अपने दत्तक माता-पिता से मिलने को तरस रहे हैं जमशेदपुर के 17 अनाथ बच्चे, हाईकोर्ट का एक आदेश उन्हें ममता की छांव दिला सकता है

किशोर न्याय संशोधन अधिनियम, 2021 का हवाला देते हुए जमशेदपुर जिला अदालत ने दत्तक ग्रहण मामलों की सुनवाई से किया इनकार

  • अधिनियम के अनुसार गजट में प्रकाशित तिथि और समय से प्रभावी होगा कानून, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी अधिसूचना जारी नहीं की
  • मंत्रालय ने कहा -तारीख अधिसूचित होने तक मौजूदा नियमों, प्रक्रियाओं आदि का पालन होता रहेगा
  • झारखंड की समाज कल्याण निदेशक राजेश्वरी बी ने झारखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जेनरल को पत्र लिखकर जिला अदालत को निर्देश देने का आग्रह किया

ANAND KUMAR

Jamshedpur :  जमशेदपुर के 17 अनाथ बच्चों और उनके पूर्व -दत्तक माता-पिता को एक-दूसरे से मिलने का इंतजार है. मगर एक सरकारी पेंच ने उनकी यह खुशी छीन रखी है. दरअसल केंद्र सरकार के एक संशोधन कानून के चलते पैदा हुए असमंजस के कारण ऐसा हुआ है. किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2021 में गोद लिये गये बच्चों को उनके दत्तक माता-पिता को सौंपने की प्रक्रिया चलाने तथा आदेश देने का अधिकार जिला अदालतों के स्थान पर जिला मजिस्ट्रेट को सौंप दिया गया है. हालांकि अधिनियम के अनुसार संशोधित कानून केंद्र सरकार द्वारा इसे सरकारी गजट में अधिसूचित किये जाने के बाद प्रभावी होगा. केंद्र सरकार ने अभी इस संशोधन को सरकारी गजट में प्रकाशित नहीं किया है. (नीचे देखें अधिनियम की प्रति)

अधिनियम की कॉपी. खबर नीचे भी जारी
Sanjeevani

इस बारे में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सेंट्रल एडोप्शन रिसोर्स एजेंसी (कारा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को लिखे पत्र में स्थिति स्पष्ट कर दी है. मंत्रालय ने लिखा है कि फिलहाल उसकी तरफ से इस संशोधित कानून के लागू होने की तिथि को अधिसूचित नहीं किया गया है. इसलिए सरकार द्वारा समय और तिथि की घोषणा किये जाने तक वर्तमान नियम और प्रक्रियाओं का ही पालन किया जायेगा, लेकिन इसके बावजूद जमशेदपुर जिला अदालत में दत्तक ग्रहण के मामलों की सुनवाई नहीं होने के कारण इन 17 दत्तक बच्चों और उनके माता-पिता की मायूसी कम होने का नाम नहीं ले रही. इनमें से ज्यादातर बच्चों की उम्र 4 से 7 वर्ष के बीच है. बच्चों को उनके दत्तक माता-पिता की कानूनी संतान घोषित करने में हो रहे विलंब के कारण कई बच्चों के स्कूल में दाखिले की उम्र भी निकल रही है. इससे उनके आगे की पढ़ाई में समस्या हो सकती है.  इस संबंध में झारखंड सरकार की महिला-बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा निदेशक राजेश्वरी बी ने भी झारखंड उच्च न्यायालय के निबंधक को एक पत्र लिखकर जिला न्यायालयों को इस बारे में निर्देश देने का अनुरोध किया है. इस पत्र के बाद इन 17 बच्चों और उनके दत्तक माता-पिता की निगाहें हाईकोर्ट पर टिकी हैं. कोर्ट का एक आदेश उनके चेहरे पर हंसी ला सकता है.

समाज कल्याण निदेश का हाईकोर्ट के निबंधक को पत्र.

समाज कल्याण निदेशक ने हाईकोर्ट से आग्रह किया
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जेनरल को 13 जुलाई 2022 को लिखे अपने पत्र में महिला, बाल विकास एवं समाज कल्याण  निदेशक राजेश्वरी बी ने लिखा है कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) संशोधित अधिनियम, 2021 संसद में पारित किया जा चुका है. उक्त अधिनियम की धारा-1 की उपधारा-2 के प्रावधानानुसार यह भारत सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी किये जाने की तारीख से लागू होगा. किंतु अब तक मंत्रालय द्वारा प्रवर्तन की ऐसी तारीख को अधिसूचित नहीं किया गया है. उन्होंने लिखा है कि इस संबंध में भारत सरकार द्वारा जबतक एक निश्चित तारीख को अधिसूचित नहीं किया जाता है. तब तक मौजूदा नियमों, प्रक्रियाओं आदि का पालन किये जाने संबंधी निदेश भारत सरकार से प्राप्त है ताकि दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को जारी रखा जा सके एवं इस संबंध में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो. अतः अनुरोध है कि इस संबंध में भवदीय स्तर से सभी जिला न्यायालयों को सूचित करने की कृपा की जाये.

क्या लिखा है सहयोग विलेज के निदेशक ने
इस संबंध में 18 अगस्त 2022 को स्टेट एडोप्शन रिसोर्स एजेंसी (सारा) को भेजे ई-मेल में सहयोग विलेज के निदेशक वीके जय ने लिखा है – “हम आपके संज्ञान में माननीय जिला न्यायालय जमशेदपुर के न्यायालय में लंबित दत्तक मामलों की सुनवाई न करने और मई 2022 से अदालत में नयी दत्तक याचिका दायर करने की अनुमति नहीं देने के निर्णय से उत्पन्न एक बहुत ही गंभीर स्थिति को लाना चाहते हैं. कोर्ट का पक्ष है कि कारा ने इस आशय के दिशा-निर्देश जारी किये हैं कि दत्तक ग्रहण से संबंधित मामलों का निपटारा संबंधित जिले के जिला कलेक्टर द्वारा किया जाना है. हमारे (सहयोग विलेज) अधिवक्ता ने माननीय न्यायालय को सूचित किया कि अभी तक संशोधन की कोई अधिसूचना नहीं जारी हुई है. लेकिन माननीय न्यायालय ने हमारी याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. सहयोग विलेज के निदेशक ने लिखा है कि हमने माननीय न्यायालय को यह भी सूचित किया कि रांची और सिमडेगा जैसे अन्य जिला न्यायालय अभी भी गोद लेने के मामलों की सुनवाई और निपटारा कर रहे हैं. लेकिन उन्होंने हमारी याचिका को स्वीकार नहीं किया. पत्र के अनुसार वर्तमान में न्यायालय में 17 दत्तक याचिकाएं लंबित हैं. इनमें से 3 याचिकाएं पहले ही दायर की जा चुकी थीं, जिनमें एक या दो सुनवाई भी हो चुकी है. साथ ही, 14 अन्य याचिकाएं हैं जिन्हें माननीय न्यायालय ने बिल्कुल भी दायर करने की अनुमति नहीं दी.

सहयोग विलेज के निदेशक का ईमेल.

पत्र में सहयोग विलेज के निदेशक ने लिखा  है कि कोविड महामारी को देखते हुए, गोद लेने की प्रक्रिया में पहले ही काफी देरी हो गयी है और पूर्व-दत्तक माता-पिता और बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पत्र में लिखा गया है कि यदि दत्तक ग्रहण के मामलों के निपटारे में विलंब होने से उनकी पीड़ा और भी बढ़ जायेगी. ये सभी बच्चे 4 से 7 वर्ष के आयु वर्ग के हैं और दत्तक माता-पिता को न्यायालय के आदेश और जन्म प्रमाण पत्र के बिना उन्हें स्कूलों में प्रवेश दिलाने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा. निदेशक ने “सारा” से अनुरोध किया है कि वे इस मामले को झारखंड उच्च न्यायालय के सामने रखे, ताकि इन बच्चों के सर्वोत्तम हित में समय पर ढंग से गोद लेने की याचिकाओं का निपटारा हो सके.

मंत्रालय ने कहा- मौजूदा नियम और प्रक्रियाएं जारी रहेंगी
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अवर सचिव पारस सरवैया ने सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी (कारा) के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर को लिखे पत्र में कहा है कि कारा के फाइल नंबर (कारा-एलपी01/6/2021-0/0 जद (पीआरजी और प्रशासन) का संदर्भ लेते हुए कहना है कि हाल ही में किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2021 के संबंध में और किशोर न्याय की धारा 1(2) के अनुसार (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2021 में प्रावधान है कि यह उस तारीख को लागू होगा, जो केंद्र सरकार, आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा  नियत करे. पत्र के अनुसार अब तक मंत्रालय ने प्रवर्तन की ऐसी तारीख अधिसूचित नहीं की है. हालांकि मंत्रालय ने अभी इस मामले को सीज कर दिया है और इसपर काम कर रहा है. इसलिए जबतक सरकार द्वारा कोई तारीख अधिसूचित नहीं की जाती, तब तक मौजूदा नियमों, प्रक्रियाओं आदि का पालन किये जाने की जरूरत है, ताकि प्रक्रियाओं को जारी रखा जा सके और धरातल पर कोई व्यवधान उत्पन्न न हो.

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