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17 जिलों को अब तक नहीं मिली 14वें वित्त आयोग की राशि, राज्यभर के मुखिया कलमबंद हड़ताल पर

विभागीय सचिव बोले- राशि निर्गत करने का आदेश दिया जा चुका है, पर ट्रेजरी पैसा ही नहीं दे रही, तो हम क्या करें

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Ranchi : झारखंड के 17 जिलों की पंचायतों को अब तक 14वें वित्त आयोग की राशि नहीं मिली है. वित्त आयोग से पहले किस्त में लगभग 6.4 अरब रुपये राज्य सरकार को मिलने के बाद भी कोषगार से राशि निर्गत नहीं की गयी है. यह पूरी प्रक्रिया लगभग तीन माह से लंबित है. इस राशि से सभी जिलों की पंचायतों में विकास कार्य जैसे जलापूर्ति, सीवरेज एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता, जल निकासी, सामुदायिक परिसंपत्तियों के रखरखाव, सड़क, फुटपाथ एवं स्ट्रीट लाइट के रखरखाव, श्मशान-कब्रिस्तान के रखरखाव सहित आधारभूत कार्य किये जाने थे. फिलहाल 17 जिलों में यह काम रुका हुआ है. इसका सीधा असर प्रखंड कार्यलायों पर भी दिख रहा है. अब तक गोड्डा, चतरा, धनबाद, लातेहार, लोहरदगा, देवघर और खूंटी को ही राशि मिल पायी है. राशि नहीं मिलने के खिलाफ राज्यभर के मुखिया कलमबंद हड़ताल पर हैं.

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न्यूज विंग के सवाल पर क्या बोले थे पंचायती राज सचिव

26 अक्टूबर को पंचायती राज सचिव प्रवीण टोप्पो ने कहा था कि 14वें वित्त आयोग की राशि सभी जिलों को निर्गत कर दी गयी है. जब उनसे पूछा गया कि मात्र सात जिलों को ही राशि भेजी गयी है, तो उन्होंने कहा कि जिन जिलों को राशि निर्गत नहीं हुई है, उन्हें राशि निर्गत कर दी जायेगी, अभी वह प्रोसेस में है. 21 दिन बाद जब 17 नवंबर को फिर पंचायती राज सचिव से वही सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “ट्रेजरी को राशि निर्गत करने का पत्र दिया जा चुका है. ट्रेजरी राशि निर्गत नहीं कर रही, तो इस पर हम कुछ नहीं कह सकते.”

दूसरे मद में राशि खर्च कर दिये जाने के मिल रहे संकेत

पंचायतों को 14वें वित्त आयोग की राशि नहीं मिलने के कारणों की पड़ताल करने पर कोषागार के एक अफसर ने बताया कि मौखिक आदेश के कारण बड़ी राशि ट्रेजरी से रिलीज नहीं हो पा रही है. जबकि, इसकी सच्चाई यह है कि राज्य सरकार का खजाने में उतना पैसा ही नहीं है. 14वें वित्त अयोग द्वारा मिलनेवाली राशि दूसरे मद में खर्च किये जाने के संकेत मिल रहे हैं. जब खाजने में राशि अयेगी, तो पंचयतों को पैसा मिल सकेगा.

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समय पर नहीं मिल सकेंगे दूसरे किस्त के 6.4 अरब रुपये

पंचायतों के लिए विकास योजना का दूसरा किस्त, जो दिसंबर-जनवरी में आना था, अब राज्य को समय पर नहीं मिल पायेगा. राज्य सरकार की ओर से अब तक 17 जिलों को राशि नहीं भेजी गयी है, जिस कारण पहले किस्त की राशि का उपयोगिता प्रमाणपत्र राज्य सरकार केंद्र को नहीं भेज पायेगी. ऐसे में दूसरे किस्त की राशि 6.4 अरब रुपये रिलीज नहीं हो पायेगी.

क्या कहते हैं मुखिया संघ के अध्यक्ष विकास महतो

राज्य में पंचायतों को मजबूत करने की बात सिर्फ मौखिक तौर पर की जा रही है, जबकि गांव का विकास पंचायत द्वारा बेहतर तरीके से किया जा सकता है. लेकिन, राज्य सरकार की हठधर्मिता के कारण कागजों में अधिकार मिल रहे हैं, लेकिन जमीनी तौर पर उसे लागू नहीं किया जा रहा है. वहीं, गांव के विकास के लिए 14वें वित्त आयोग के पैसे भी अभी सात जिलों को ही मिले हैं. ऐसी विषम परिस्थिति में मुखिया संघ की ओर से कलमबंद हड़ताल करने के लिए राज्य के पंचायत प्रतिनिधियों को मजबूर होना पड़ा है और इसके लिए पूरी तरहसे राज्य सरकार दोषी है.

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क्या है मुखिया संघ की मांग

इधर, कलमबंद हड़ताल पर गये राज्यभर के मुखियाओं का कहना है कि 14वें वित्त आयोग के वर्ष 2018-19 के प्रथम किस्त की राशि 24 में से मात्र सात जिलों को दी गयी है. बाकी 17 जिलों को राशि नहीं मिली है. मुखिया संघ ने मनरेगा मजदूरों की मजदूरी दर बढ़ोतरी के साथ सरकार की योजना सामाजिक सुरक्षा के तहत पेंशन, विधवा पेंशन नियमित करने के साथ-साथ सरकार द्वारा काटी गयी पेंशन देने, राशनकार्ड में छूटे लाभुकों का नाम जोड़ने, झारखंड को सुखाड़ग्रस्त घोषित करने, ग्राम सभा की आजादी, पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि एवं टीए-डीए के भुगतान, पंचायत के सभी कर्मियों की उपस्थिति बायोमीट्रिक सिस्टम द्वारा पंचायत सचिवालय में सुनिश्चित करने, सरकार द्वारा पंचायत के हस्तांतरित एवं विभाग को पूर्ण रूप से पंचायत को देने, 14वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश के अनुसार जेई, एई और और कंप्यूटर ऑपरेटर उपलब्ध कराने, सरकार के सभी योजनाओं का सामाजिक अंकेक्षण कराने, ग्राम समिति/आदिवासी विकास समिति के गठन को रद्द करने की मांग की है.

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