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जिस आदित्यपुर ऑटो कलस्टर को उपलब्धि मान रही है सरकार, उसके 160 उद्योग बंदी के कगार पर

टाटा मोटर्स और हिटाची ने ऑर्डर पर रोक लगा दी है और दिये गये ऑर्डर का बना हुआ माल लेने को भी तैयार नहीं है.

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Abinash Mishra

Jamshedpur: आदित्यपुर ऑटो क्लस्टर को लेकर जो दावे गुरुवार को उद्योग सचिव के रवि कुमार ने किये हैं, उनको आदित्यपुर ऑटो कलस्टर की जमीनी हकीकत खारिज करती है.

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आदित्यपुर ऑटो कलस्टर में ऑटो कम्पोनेंट बनाने वाली 160 से भी ज्यादा कंपनियों का कहना है कि उनका दर्द केवल ऑटो क्लस्टर के बखान से दूर नहीं होगा बल्कि जमीनी स्तर पर समस्या को समझना होगा क्योंकि हालिया समय में ऑटो कम्पोनेंट बनाने वाली सभी कंपनियों की हालत खराब है.

इन छोटी-छोटी कंपनियों को टाटा मोटर्स और टाटा हिटाची से वर्क ऑर्डर मिलता है. लेकिन टाटा मोटर्स और हिटाची ने ऑर्डर पर रोक लगा दी है और दिये गये ऑर्डर का बना हुआ माल लेने को भी तैयार नहीं है. टाटा मोटर्स ने कह दिया है कि उनको अभी पार्ट्स की जरूरत नहीं. लिहाजा वो माल नहीं ले सकते. ऐसे में कारोबारी चाहते हैं कि सरकार ऑटो क्लस्टर की उपलब्धियां गिनाने के बजाय उनके साथ बैठे, समस्या सुने तो कुछ राह निकले.

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कंपनियों में फंड क्राइसिस की समस्या

क्लस्टर के अंदर आने वाली सभी कंपनियां आर्थिक संकट से जूझ रही हैं. टाटा मोटर्स ने इन कंपनियों का करोड़ों का बिल पैसे के अभाव में रोक दिया है क्योकि टाटा मोटर्स खुद कैश क्रंच झेल रही है. साथ ही ऑर्डर के बने माल में भी पूंजी फंस गयी है.

उसके बाद बिजली का खर्च ओर सैलरी जैसी चीजें भी हैं जहां पैसे की दरकार है. ये समस्याएं है जो इस वक्त इन कंपनियों के सामने खड़ी हैं. जबतक कहीं से कोई आर्थिक मदद नहीं देता तब तक इन हालातों से उबरना इन कंपनियों लिए आसान नहीं.

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क्या चाहती हैं कंपनियां

कंपनियां चाहती हैं कि उनको फिलहाल कमर्शियल और सर्विस जैसे टैक्स में राहत दी जाये. सरकार के मुखिया जमशेदपुर से हैं और उनका टाटा के मैनेजमेंट से संबध अच्छा है. अगर सीएम पहल करते है तो उनके करोड़ों के रुके बिल का भुगतान हो सकता है. इसके अलावा कम-से-कम जो माल कंपनियों मे धूल फांक रहा है वो टाटा मोटर्स मंगा सकती है क्योंकि फेस्टीव सीजन सामने है और गाड़िया बिकेंगी ही और ऐसे में पार्ट्स की जरूरत तो पड़ेगी ही.

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ऑटो क्लस्टर का बखान चुनावी स्टंट

2005 में ऑटो क्लस्टर के निर्माण के बाद निवेश करने वाली कंपनियों का कहना है कि यहां निवेश ये देखकर किया गया था कि सरकार उद्यमियों की है लेकिन जो उदासीन रवैया सामने है और जिन उपलब्धियों का बखान किया जा रहा है वो किसी चुनावी स्टंट से कम नहीं क्योंकि सरकार फिलहाल कंपनियों की समस्या के बजाय अपना काम गिनाने में लगी है जबकि ये हजारों परिवार के रोजगार से जुड़ा है.

क्या कहता है ASIA

आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (ASIA) के अध्यक्ष इंदर अगरवाल कहते हैं कि इस समस्या के समाधान के कई उपाय हैं. जैसे टाटा मोटर्स की गाड़ियों की मांग बढ़ाने के लिए यदि सरकार पुरानी गाड़ियां जो प्रदूषण कर रही हैं उन पर रोक लगा दे तो नयी गाड़ियों की मांग में इजाफा होगा और इससे हमारे उद्योग फिर से रफ्तार पकड़ सकेंगे. हमारी कंपनियां केवल टाटा नोटर्स या हिटाची के ही सामान बनाती हैं. यदि वो ऑर्डर रोक देंगे तो हमारी पूरी फैक्टरी ठप हो जायेगी.

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