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16 लोगों पर आचार संहिता मामले में एफआइआर, लोगों में गुस्‍सा

Ranchi : 17 मार्च को हिंदपीढ़ी थाना में 16 लोगों पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप लगते हुए एफआइआर किया गया. जब कि लोगों का कहना है कि 15 मार्च को की गयी बैठक में ना ही किसी राजनीतिक दल और ना ही धार्मिक मुददों पर बात हुई थी. बैठक की अध्यक्षता कर रहे बशीर अहमद का कहना है कि बैठक में मुस्लिमों को लोकसभा चुनाव में सीट देने पर चर्चा हो रही थी. किसी भी तरह से इस में कम्युनिटी पर चर्चा नहीं हुई थी.

अखबार में छपी खबर को देख कर 16 लोगों पर एफआइआर किया गया.जबकि अखबार में कहीं भी संप्रादायिक बातें नही लिखीं थी. ऐसे में आचार संंहिता का उल्लंघन का आरोप लगते हुए एफआइआर करना उचित नहीं है. सकुलर पार्टियों के दबाव में आकर ऐसी कार्रवाई की गयी है. जबकि गोड्डा से अगर बीजेपी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट देती है तो हम समर्थन देंगे. ये किसी भी पार्टी से संबंधित नहीं था.

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महागाठबंधंन के दबाव में किया गया एफआइआर

16 लोगों में से एक आजम अहमद ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों के दबाव में आकर ऐसा किया गया है. जिस आदिवासी भाई ने ऐसा किया है, उसको यह समझना चाहिए कि ऐसे लोगों के कारण ही राज्य में आदिवासी समस्याएं खत्म नहीं हो रही है. हमलोग झारखंड आंदोलन के सिपाही हैं, किसी से डरने वाले नहीं.

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सामाजिक कार्यकर्ताओं की छवि धूमिल की जा रही है

नदिम खान ने कहा कि इस तरह के निर्णयों से पता चलता है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं की छवि धूमिल की जा रही है. संप्रादायिक सौहार्द के लिए जाने जाने वाले लोगों पर इस तरह आरोप लगाने से मानसिकता का पता चलता है. जबकि उक्त बैठक में सिर्फ नवजवान थे.

संवैधानिक अधिकारों पर प्रहार

बब्बर ने कहा कि सामान्य बैठक में एफआइआर करना संवैधानिक अधिकारों पर प्रहार है. भारत जैसे देश में हर व्यक्ति को बोलने और अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है. जबकि संविधान में हर अधिकार लोगों को दिया गया है. फिर भी हम डरने वाले नही. आगे भी लोगों को जागरूक किया जायेगा.

लोगों को आगे भी जागरुक किया जाता रहेगा

उक्त बैठक में शामिल इमरान ने जानकारी दी कि बैठक में चुनाव में मुस्लिमों की स्तिथि पर चर्चा की जा रही थी. लेकिन उल्‍टे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ही कार्रवाई कर दी..ऐसे में हम भी डरने वाले नहीं, आगे भी लोगों को जागरुक किया जाता रहेगा. घर-घर जा कर लोगों को बतायेंग कि लोगों को ठगा जा रहा है.

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