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कोरोना आपदा में 27 गोशालाओं के 15,000 गो वंशजों को सरकार से राहत की आस

Amit Jha

Ranchi: लॉकडाउन ने राज्य के 27 गोशालाओ में पल रही गायों के समक्ष चारे का संकट खड़ा कर दिया है. अलग-अलग जिलों में संचालित हो रहे गोशालाओं में 15 हजार से भी अधिक गो वंशजों के लिए लगातार संकट बढ़ रहा है.

चुनौती इसलिए भी बढ़ रही है कि विभिन्न गोशालाओं द्वारा मापदंडों के अनुसार, पारित खुराकी की राशि गो सेवा आयोग के पास 1-1 साल से लंबित पड़ी है. झारखंड प्रादेशिक गोशाला संघ के अध्यक्ष राज कुमार अग्रवाल ने सीएम हेमंत सोरेन और पशुपालन मंत्री बादल पत्रलेख से इस मामले में पहल करने का अनुरोध किया है.

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गोशाला संघ ने सरकार से मांगी है मदद

झारखंड प्रादेशिक गोशाला संघ ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर गोशालाओं को चारा उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया है. पत्र के अनुसार, पूरे प्रदेश में 27 गोशालाएं हैं. कोरोना आपदा और लॉकडाउन के कारण गोशालाओं में पल रही गायों के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है. जिला प्रशासन द्वारा जब्त गायों को नजदीकी गोशालाओं में भेजा जाता है. इसके एवज में सरकार गायों की खुराकी मद में प्रतिदिन 50 रुपये प्रति गाय के हिसाब से गोशालाओं को देती है. पिछले कई वर्षों से गो-खुराकी मद में बाकी राशि का भुगतान नहीं होने से गायों के समक्ष भुखमरी का संकट खड़ा हो चुका है.

सांसद अन्नपूर्णा देवी और महेश पोद्दार ने भी सरकार से की है सहयोग की अपील

कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी ने कृषि एवं पशुपालन विभाग के सचिव को गोशालाओं की मदद के लिए पत्र लिखा है. पत्र के अनुसार, पशु चारे के संकट और अभी बढ़ रही बेतहाशा कीमतों के कारण गोशालाओं के सामने कठिन स्थिति पैदा हो रही है. ऐसे में विभाग को मदद के लिए आगे आना चाहिये. सांसद महेश पोद्दार ने भी राज्य की गोशालाओं की बकाया राशि का भुगतान और आर्थिक मदद करने का आग्रह सीएम हेमंत सोरेन से किया है. रांची की तीन गोशालाओं में 1100 गो वंशजों के अलावा अन्य सभी गोशालाओं की भी मदद की अपील सरकार से की है.

लॉकडाउन में दान दाताओं का सहयोग भी है बंद

गिरिडीह गोशाला समिति के सचिव ध्रुव संथालिया के अनुसार, लॉकडाउन में दान दाताओं का सहयोग मिलना भी बंद हो गया है. लगभग 60 हजार रुपये प्रतिमाह लेबर की मजदूरी और पशुओं के चारे में खर्च होता है. सरकार से किसी स्तर से अभी सहयोग न मिलने से चुनौती खड़ी हो रही है. ऐसे में गोपाल गोशाला में 838 गोवंश और 50 मजदूरों के लिए खर्च निकालना बड़ा सवाल बन चुका है.

गोशाला संघ के संयुक्त सचिव प्रमोद सारस्वत के अनुसार, पूरे राज्य की 27 गोशालाओं में 11000 से भी ज्यादा ऐसे गोवंश की सेवा की जा रही है जो दूध नहीं देती है. इसमें नंदी व छोटे बच्चे भी समायोजित हैं. कोरोना आपदा की इस घड़ी में गत 30 दिनों में किसी भी तरह का कोई भी सहयोग गोशालाओं को प्राप्त नहीं हो पाया है. सीएम और दानदाताओं से इसके लिए अपील की जा रही है.

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कैसे गोशालाओं की मदद करती है सरकार 

राज्य गो सेवा आयोग के सचिव ओ.पी पाण्डेय के अनुसार, राज्य में कुल 27 गोशालाएं हैं. इनमें से 22 आयोग में निबंधित हैं. गोवंशों को रखने की व्यवस्था राज्य सरकार के पास अपने स्तर से नहीं है. किसी पशु तस्कर से पकड़े गए गोवंश को छुड़ाकर उसे अभी गोशालाओं में थाना द्वारा भेजा जाता है. एफआइआर, डीवीओ (जिला पशुपालन पदाधिकारी) और डीसी की अनुशंसा के आधार पर प्रति गाय/मवेशी के लिए 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 6 माह के लिए गो सेवा आयोग की ओर से गोशालाओं को राशि का भुगतान 3 किस्तों में किया जाता है.

फ़िलहाल गो सेवा आयोग में कई गोशालाओं की अनुमोदित गो वंश की खुराकी के अनुदान की लाखों रुपये की राशि बकाया है. जानकारी के अनुसार, हजारीबाग गोशाला का 40 लाख, रांची के तीनों गोशालाओं का 12 लाख और इसी तरह अन्य गोशालाओं का हिसाब गो सेवा आयोग के पास बकाया है.

गोशालाओं में 15, 000 से अधिक हैं गो वंशज 

टाटा नगर गोशाला- 2000

चाकुलिया- 4700

रांची गोशाला-  1100

चक्रधरपुर गोशाला- 100

चाईबासा गोशाला- 450

गंगा गोशाला, कतरास- 1100

झरिया (धनबाद) गोशाला- 600

पाकुड़ गोशाला – 300

देवघर गोशाला – 500

मधुपुर गोशाला- 130

गिरिडीह गोशाला – 830

कोडरमा गोशाला – 225

हजारीबाग गोशाला – 700

इसके अलावा बोकारो, पेटरवार, रामगढ़, लोहरदगा, चतरा, बालूमाथ, लातेहार, डाल्टनगंज, गढ़वा जैसे जगहों पर भी गोशालाओं का संचालन किया जा रहा है.

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