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बीएसएल की स्थापना के लिए दी 1500 एकड़ जमीन, अब अंतिम संस्कार के लिए दो गज जमीं के लिए लगानी पड़ती है जुगत

निर्मला नंदिनी विनय

Bokaro: इसे बीएसएल की अनदेखी कही जाये, जिला प्रशासन का ढुलमुल रवैया या फिर लोगों की बदकिस्मती, लेकिन सच्चाई यह है कि जिन लोगों ने बोकारो इस्पात संयंत्र निर्माण के लिए अपनी पैतृक भूमि दी, उनको अंतिम संस्कार के लिए दो गज भूमि तक नसीब नहीं होती. बात हो रही गोस्वामी समाज की. गोस्वामी समाज में अंतिम संस्कार के रूप में भू-समाधि देने की परंपरा है. लेकिन, भू-समाधि के लिए कहीं भी जमीन आवंटित नहीं की गयी है. बोकारो इस्पात संयंत्र के स्थापना के लिए 1500 एकड़ जमीन गोस्वामी समाज के लोगों ने विभिन्न गांव में दी थी.

 

पंचौरा, बालीडीह, टांड बालीडीह, टांड मोहनपुर, चौरा, माराफारी, असानसोल, पालबहियार, चिटाही, रातडीह समेत अन्य विस्थापित व पुर्नवास क्षेत्र में गोस्वामी समाज की 5000 से अधिक आबादी रहती है. लेकिन, अंतिम संस्कार के लिए लोगों को एक जगह तक नहीं मिली है. कई बार विकट स्थिति के कारण लोगों को परंपरा बदल कर अंत्येष्टि तक करना पड़ा है. गोस्वामी समाज के लोग आमतौर पर अस्थायी ठिकाना पर अंतिम संस्कार करते हैं. टांड बालीडीह, बालीडीह के लोग बांका पुल के पास तो पंचौरा व आसपास के लोग वरवाघाट के पास भू-समाधि का रस्म निर्वहण करते हैं.

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भू-समाधि का रस्म ऐसे किया जाता है पूरा

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भू-समाध के लिए गोल आकृति का करीब 05 फीट गहरा व लगभग 04 फीट व्यास का गढ्डा बनाया जाता है. गढ्डा के दक्षिण दिशा में 03 फीट का सुरंग बनाया जाता है. इसी सुरंग में मृतक को साधना मुद्रा में बैठाकर समाधि दी जाती है. इस दौरान मुखाग्नि का रस्म निभाया जाता है. यह रस्म मृतक के पुरूष होने पर बड़ा बेटा व मृतक के महिला होने पर छोटा बेटा निभाता है. वही सबसे पहले मिट्टी भी डालता है. इसके बाद मौजूद लोग मिट्टी डालते हैं. भू-समाधि से पहले मृतक के शरीर से धातु का सारा आभूषण या अन्य चीज हटा दिया जाता है. कहीं-कहीं स्तूप भी बनाया जाता है, लेकिन जमीन आवंटित नहीं होने के कारण बहुत कम लोग स्तूप बना रहे हैं.

माराफारी में हुआ करता था समाधि स्थल

माराफारी में गोस्वामी समाज का समाधि स्थल हुआ करता था. खातियान में इसका जिक्र भी देखने को मिलता है. इसके अलावा पंचौरा में इस संबंध में लंबा इतिहास रहा है. गोस्वामी समाज के लोगों की माने तो करीब 600-650 साल पहले स्व भुकुरभुंदा गोस्वामी इस गांव में आकर बसे थे. उन्हीं के समय से भू-समाधि की परंपरा रही है. लोगों की माने तो इनके समाधी स्थल को जोगी तोपा कहते हैं. गोस्वामी समाज की 10 उपजातियां हैं. इनमें गिरि, पुरी, भारती, पर्वत, सागर, अरण्य, तीर्थ, सरस्वती, आश्रम, नाथ व वन शामिल हैं. गोस्वामी समाज को गुरू की उपाधी मिली हुई है. ये मुख्यत: सन्यास परंपरा से जुड़े हुए हैं. इसी कारण मरणोपरांत समाज में समाधि ग्रहण करने की परंपरा रही है.

50 डिसमिल जमीन आवंटित, पर नहीं मिला अधिकार

लगातार आंदोलन व मांग के बीच 10 साल पहले डीपीएलआर की ओर नरकरा के पास गोस्वामी समाज के लोगों के भू-समाधि के लिए 50 डिसमिल जमीन आवंटित किया गया था. लेकिन, इस जमीन पर भी समाज को अधिकार नहीं दिया गया. आवंटित जमीन पर आदिवासियों ने अपना अधिकार बताया. इसके बाद समाज दोबारा डीपीएलआर के पास गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसी तरह मई-जुन 2019 में बीएसएल की ओर से वाटर पंप हाउस निर्माण व विस्तारीकरण के काम के दौरान विस्थापित गांव पंचौरा स्थित भू-समाधि स्थल को अतिक्रमित कर लिया गया. विरोध के बाद कंपनी के ठेकेदार ने भू-समाधि स्थल के लिए दूसरे जगह जमीन देने की बात कही. बकायदा पंचनामा करने की बात कही गयी, लेकिन अब तक पंचनामा नहीं हुआ. ना ही कोई समाधि स्थल से जुड़ा कोई सुविधा अबतक दिया गया. गोस्वामी समाज के लोगों ने कई बार जिला उपायुक्त, बीएसएल के पदाधिकारी, डीपीएलआर समेत अन्य विभागीय अधिकारी के पास अपने दर्द को बताने की कोशिश की. लेकिन, इस मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई.

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