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इस हफ्ते दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटेंगे 150 नागरिक, 26 वैज्ञानिक भी शामिल

Johannesburg: कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाये गये लॉकडाउन के कारण दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में फंसे 26 भारतीय वैज्ञानिक इस सप्ताह देश लौटेंगे. वे एक अभियान पर अंटार्कटिका गये थे और लॉकडाउन लगने के बाद तीन महीने पहले दक्षिण अफ्रीका में फंस गये.

ये वैज्ञानिक उन तकरीबन 150 भारतीय नागरिकों में से हैं जो साउथ अफ्रीकन एयरवेज (एसएए) के विमान से लौटेंगे. यह विमान शुक्रवार को जोहानिसबर्ग से मुंबई और दिल्ली के लिए रवाना होगा.

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जरूरतों के आधार पर प्राथमिकता वाले यात्रियों का चयन

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जोहानिसबर्ग में भारतीय महावाणिज्यदूत अंजू रंजन ने बताया कि विमान के लिए 1,000 से अधिक भारतीय नागरिकों ने पंजीकरण कराया है. दक्षिण अफ्रीका के गृह विभाग द्वारा तय किये गये मापदंड के आधार पर भारतीय मिशन इन यात्रियों की जांच करेगा.

रंजन ने फेसबुक ब्रॉडकास्ट में कहा कि हमें जरूरतों के आधार पर प्राथमिकता वाले यात्रियों का चयन करना था. राजनयिक ने बताया कि बचे हुए लोगों को भारत सरकार के वंदे भारत अभियान के तहत एयर इंडिया के विमान से स्वदेश भेजा जा सकता है.

रंजन ने कहा कि इस विमान से जो लोग वापस जा रहे हैं उनमें भारत के 26 वैज्ञानिक भी शामिल हैं जो अंटार्कटिका में एक अभियान से लौटने के बाद केप टाउन में फंस गये थे. अधिकारी ने बताया कि वे यहां पिछले तीन महीने से थे इसलिए हमारी प्राथमिकता उन्हें वापस भारत भेजना है.

उन्होंने बताया कि तटीय शहर डरबन में फंसे आइएसई क्रूज के 93 सदस्य भी उनके लिए प्राथमिकता हैं. अन्य जिन लोगों को विमान से भेजने के लिए मंजूरी दी गयी हैं उनमें बीमार या अस्थायी पर्यटक वीजा वाले लोग शामिल हैं.

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सामान्य टिकट से तीन गुना ज्यादा किराया

रंजन ने बताया कि एक तरफ की यात्रा का किराया 15,000 रैंड्स है (61,428 रुपये) जो एसएए ने तय किया है. भारत सरकार का इससे कुछ लेना-देना नहीं है. सामान्य टिकट के दाम से तकरीबन तीन गुना ज्यादा यह किराया यात्रियों को ही अदा करना होगा.

रंजन ने बताया कि वंदे भारत अभियान के तीसरे चरण में एयर इंडिया का विमान जून में आ सकता है क्योंकि अभी इसके लिए कोई तारीख तय नहीं की गयी है. उन्होंने बताया कि अभी यह अभियान दूसरे चरण में हैं.

रंजन ने किराया अदा नहीं कर पाने के कारण विमान में सवार नहीं हो पा रहे लोगों के लिए अफसोस जताया और कहा कि वे दिल छोटा न करें और धैर्य के साथ हमारी अपनी उड़ानों का इंतजार करें.

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