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13 प्रोजेक्ट्स में करीब 900 करोड़ रुपये की जरूरत, निजी निवेशक करें निवेश : नगर विकास सचिव

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Ranchi : राज्य के 10 शहरों में सिटी बस स्टैंड को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर विकसित करने के लिए एक टीम गुजरात और महाराष्ट्र का दौरा करेगी. इन शहरों में जिस तरह से यह काम हुआ है, उसी की तर्ज पर झारखंड सरकार इस सेक्टर में अपनी नीति में परिवर्तन करने का प्रयास करेगी. उक्त बातें नगर विकास सचिव अजय कुमार सिंह ने बुधवार को होटल चाणक्य बीएनआर में आयोजित राष्ट्रीय इन्वेस्टर मीट के दौरान कहीं. मीट में दिल्ली, मुंबई और गुजरात के 50 से अधिक इन्वेस्टर्स, बड़े ट्रांसपोर्टर और कॉन्ट्रैक्टर शामिल हुए. मीट में बस स्टैंड को विकसित करने पर विस्तृत चर्चा की गयी. सचिव के मुताबिक, इन 10 सिटी बस स्टैंडों के अलावा रांची धनबाद, देवघर में आईएसबीटी बनाने का प्रस्ताव भी सरकार के पास है. इसमें करीब 900 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी.

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इन 10 शहरों का हुआ है चयन

मालूम हो कि सरकार ने राज्य के 10 शहरों में पब्लिक प्राइवेट-पार्टनरशिप मोड पर सिटी बस स्टैंड बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है. इन शहरों में धनबाद, मानगो, चाईबासा, गिरिडीह, फुसरो, मेदिनीनगर, दुमका, गोड्डा, सिमडेगा और गुमला का नाम शामिल हैं. इस प्रोजेक्ट को देख इस इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन विभाग की तरफ से किया गया. इसमें धनबाद बस स्टैंड प्रोजेक्ट के लिए सबसे अधिक 231 करोड़, मानगो के लिए 70 करोड़, चाईबासा के लिए 44 करोड़, गिरीडीह के लिए करीब 46 करोड़ रुपये का आकलन किया गया है.

सरकार की नीति से इन्वेस्टर्स को परेशानी हो, तो नीति में किया जायेगा परिवर्तन

सिटी बस स्टैंड के लिए निजी इन्वेस्टर्स द्वारा निवेश करने पर बल देते हुए सचिव ने कहा कि गत वर्ष राज्य में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान विभाग ने कई एमओयू पर हस्ताक्षर किये थे. उसी से आगे बढ़ते हुए अब नगर विकास विभाग ने यह फैसला किया है कि पीपीपी मोड के माध्यम से शहर में बस स्टैंड को विकसित किया जाये. सचिव ने कहा कि इन शहरों के चयन के पहले भी पांच बस स्टैंड को बनाने के लिए एक डीपीआर बनाया गया था. हालांकि, किसी भी इन्वेस्टर्स ने इसमें रुचि नहीं दिखायी. अब इस मीट का आयोजन कर सरकार यह देखेगी कि क्या कारण है कि इस सेक्टर में कोई भी इन्वेस्टर इन्वेस्ट नहीं करना चाहता है. कारण स्पष्ट हो जाने पर विभाग उन कारणों को दूर करने में सक्षम हो सकेगा. सचिव ने बताया कि सरकार की बनायी नीति पर अगर इन्वेस्टर्स को कोई परेशानी हो,  तो उस नीति में सरकार आवश्यक परिवर्तन भी कर सकती है.

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गुजरात के अनुभव से सीखने की जरूरत

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गुजरात स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन सहित विभिन्न क्षेत्रों से आये इन्वेस्टर्स को संबोधित करते हुए सचिव ने कहा कि गुजरात के अनुभव से हमें काफी सीखने की जरूरत है. अहमदाबाद स्थित गीता मंदिर बस टर्मिनल की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इनके प्रेजेंटेशन में जमीन के लोकोफाइड करने की बात की गयी, जो किसी भी प्रोजेक्ट के लिए जरूरी है. ऐसा नहीं होने पर कोई भी प्राइवेट इन्वेस्टर्स इसमें निवेश नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि वैसे बड़े शहर, जो अधिक जनसंख्या वाले हैं, को ध्यान में रखकर ही प्रोजेक्ट को लागू करने की जरूरत है. ऐसे में जमशेदपुर, धनबाद जैसे शहरों में यह संभावना ज्यादा दिखती है. गुजरात मॉडल की बात करते हुए उन्होंने कहा कि गुजरात में जिस तरह से इस सेक्टर में डेवलपर ने ही पैसा लगाया, अगर यही स्थिति यहां बने, तो सरकार के लिए उस राशि का उपयोग दूसरे सेक्टर जैसे सीवरेज-ड्रेनेज, वाटर सप्लाई, सड़क निर्माण में किया जाना संभव हो सकेगा. सचिव ने बताया कि राज्य में जिन 10 शहरों में बस स्टैंड विकसित करना है, उसके डीपीआर की कॉस्टिंग करीब 500 करोड़ रुपये आयेगी. वहीं रांची, धनबाद देवघर में अलग से आईएसबीटी बनाने का प्रस्ताव भी सरकार के पास लंबित है. इसके लिए करीब 300 से 400 करोड़ रुपये की आवश्यकता है. ऐसे में इन 13 परियोजनाओं में 800 से 900 करोड़ रुपये इन्वेस्ट करने की आवश्यकता सचिव ने बतायी.

13 प्रोजेक्ट्स में करीब 900 करोड़ रुपये की जरूरत, निजी निवेशक करें निवेश : नगर विकास सचिव
इन्वेस्टर्स मीट में प्रेजेंटेशन देते कंसल्टेंट.

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निवेश के लिए आगे आये प्राइवेट सेक्टर : आशीष सिंहमार

नगरीय प्रशासन निदेशालय के निदेशक आशीष सिंहमार ने इन्वेस्टर्स से निवेश करने की अपील करते हुए कहा कि राज्य में इन्वेस्टमेंट की अपार संभावनाएं हैं. इसमें अर्बन ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ शहरीकरण, रांची स्मार्ट सिटी के एबीडी क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थानों, मेडिकल इंस्टीट्यूट,  होटल, कॉमर्शियल और रेसिडेंशियल क्षेत्र शामिल हैं. हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि आधारभूत संरचना का विकास किया जाये. इसी के लिए प्राइवेट सेक्टर को आगे आने की जरूरत है.

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