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13 प्वॉइंट रोस्टर : विश्वविद्यालयों में विभागीय आरक्षण के विरोध में आक्रोश मार्च

Ranchi : विश्वविद्यालयों में विभागीय आरक्षण या 13 प्वॉइंट रोस्टर सिस्टम लागू होने के विरोध में गुरुवार को ST/SC/OBC एकता मंच के तत्वावधान में आक्रोश मार्च निकाला गया. यह आक्रोश मार्च रांची विश्वविद्यालय के मोरहाबादी स्थित स्नातकोत्तर विभाग परिसर से प्रारंभ होकर रांची विश्वविद्यालय के मुख्यालय (शहीद चौक) तक गया. इसमें झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों के अलावा इस आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ असहमति जतानेवाले छात्र भी शामिल थे. उन्होंने इस आरक्षण व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते केंद्र सरकार से इसके लिए एक अध्यादेश लाने और पुराने सिस्टम को लागू करने की मांग की. उनके अनुसार विभागीय आरक्षण या 13 प्वॉइंट रोस्टर सिस्टम से उच्च शिक्षा में होनेवाली नियुक्ति में ST/SC/OBC को मिलनेवाला आरक्षण खत्म हो जायेगा. साथ ही, यह भी आशंका व्यक्त की कि यह केंद्र सरकार भविष्य में इस सिस्टम को सभी सरकारी विभागों में होनेवाली नियुक्तियों में लागू कर सकती है. इसी आशंका से ST/SC/OBC समाज में डर व्याप्त है. ST/SC/OBC एकता मंच की संयोजिका डॉ संगीता कुजूर के अनुसार इस रोस्टर सिस्टम का केवल झारखंड में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में विरोध हो रहा है.

200 प्वॉइंट रोस्टर बनाम 13 प्वॉइंट रोस्टर

विश्वविद्यालयों में आरक्षण लागू होने के बाद स्वीकृत पदों के क्रम निर्धारण को रोस्टर कहा गया. 21 जुलाई 1997 को SC/ST के लिए और चार मार्च 2007 को OBC आरक्षण उच्च शिक्षा में लागू हुआ और इसके निर्धारण के लिए रोस्टर बनाया गया. इसे इस प्रकार से समझ सकते हैं : माना कि कुल पदों की संख्या 100 है, जिसमें पदों का आनुपातिक विभाजन इस प्रकार होगा- 1) ST का आरक्षण 7.5% है, तो 100/7.5=13.33, यानी हर 14वां पद ST के लिए आरक्षित होगा. 2) SC का आरक्षण 15% है, तो 100/15,=6.66 यानि हर सातवां पद SC के लिए आरक्षित होगा. 3) OBC का आरक्षण 27% है, तो 100/27=3.70 यानी हर चौथा पद OBC के लिए आरक्षित होगा. चूंकि ST के लिए निर्धारित आरक्षण 7.5% है, जिसे पूर्ण पद संख्या बनाने के लिए 100 के स्थान पर 200 पदों के लिए रोस्टर निर्धारित किया गया. अतः इसके तहत विश्वविद्यालय को एक इकाई मानकर पदों के सृजित होने की तिथि के बढ़ते क्रम से 200 पदों में रोस्टर को निर्धारित किया जाता है. इससे इसमें सभी वर्ग को निर्धारित अनुपात में हिस्सेदारी मिलती रही है. लेकिन, बाद में सरकार द्वारा विभागवार रोस्टर का निर्देश दिया गया, जिसे आम तौर पर विभागीय आरक्षण या 13 प्वॉइंट रोस्टर मान लिया गया. अतः 200 प्वॉइंट रोस्टर को ही 13 पर रोककर 13 प्वॉइंट रोस्टर बना दिया गया. इस 13 प्वॉइंट रोस्टर में आरक्षित क्रम विभाजन के बाद रोस्टर क्रम और पदों के आरक्षण की रोस्टर सूची इस तरह होगी- 1 UR,2 UR, 3 UR, 4 OBC,5 UR,6 UR, 7 SC, 8 OBC, 9 UR, 10 UR, 11 UR, 12 OBC,13 UR, 14 ST, 15 SC, 16 OBC… यही क्रम चलता रहेगा. अतः 13 प्वॉइंट रोस्टर के कुल पद 13, इसमें UR- 09, OBC-3, SC-1, ST- 0 . अतः अनारक्षित : आरक्षित अनुपात 9:4. तो यही विभागीय आरक्षण या 13 प्वॉइंट रोस्टर का खेल है, जिसका देश भर में विरोध हो रहा है.

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प्रतिकुलपति को सौंपा ज्ञापन

इस विरोध मार्च में झारखंड के कई विश्वविद्यालयों के लोग और छात्रों के दल शामिल हुए. इसके बाद प्रतिकुलपति को ज्ञापन सौंपा गया. इस विरोध मार्च में प्रमुख रूप से डॉ संगीता कुजूर, डॉ निरंजन महतो, प्रो. बीरेंद्र कुमार महतो, रामकुमार तिर्की, अभिषेक कुमार गुप्ता, डॉ शशि कपूर, अमिताभ कुमार, धर्मेंद्र कुमार, देवेंद्र महतो, अमित कुमार, दीपक भगत, डॉ अंजु कुमारी साहू, डॉ पूनम सिंह चौहान, डॉ दमयंती सिंकू, जय प्रकाश उरांव, धीरज उरांव, अरुण अमित तिग्गा, राधिका उरांव, करम सिंह मुंडा, गुरुचरण पूर्ति, अजीत मुंडा, डॉ पार्वती मुंडू, डॉ किरण कुल्लू, आतिश पिगुआ, विजय पिगुआ, मिथिलेश रंजन, कृष्ण मुरारी, अजित विश्वकर्मा, पास्कल बेन्ग, संजय तिर्की, मोनिका गोड़, सुमित कुमार, ज्ञान कुमार, अमित कुमार, वीरेन बड़ाईक, अमिये आनंद के अलावा सैकड़ों की संख्या में प्राध्यापक, शोधकर्ता एवं छात्र-छात्राएं शामिल थे.

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