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राज्य के 114 मदरसों को मिलेगा अनुदान, पर 6 माह में पूरी करनी होगी शर्तें

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Ranchi : स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने राज्य के 114 मदरसों में कार्यरत शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को वेतन देने का निर्णय लिया है. इसके लिए बने प्रस्ताव को मंजूरी मिल गयी है. इन 114 मदरसों को लगभग साढ़े तीन साल से अनुदान नहीं मिल रहा था.

लेकिन विभाग ने अनुदान देने के साथ शर्त भी लगायी है. शर्त के मुताबिक, अनुदान मिलने के छह माह के भीतर मदरसों को विभिन्न कोर्स संचालन के लिए जो मानक तय किये गये हैं, उन्हें पूरा कर लेना होगा.

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राज्य में 183 अनुदानित और 590 गैरअनुदानित मदरसे हो रहे संचालित

झारखंड में दो तरह के मदरसे संचालित हो रहे हैं. जिसमें 183 मदरसे अनुदान पाने वाले हैं. ये मदरसे बिहार से अलग होने के बाद झारखंड में आये हैं. वहीं राज्य गठन के बाद 590 ऐसे मदरसे हैं, जिन्हें अनुदान नहीं मिलता है. गैर अनुदानित 590 मदरसों में 110 मदरसों को अनुदान देने के लिए  2013-14 में तत्कालीन हेमंत सोरेन की सरकार ने सहमति दी.

इसके बाद 110 में से 46 को अनुदान मिला. वहीं जो मदरसे बिहार से झारखंड में आये उन्हें अनुदान देने को लेकर जांच की बात कही गयी. बिहार से झारखंड में आये मदरसों को अनुदान देने से पहले जांच कराने के लिए साल 2011 में जिलों के उपायुक्तों को जिम्मेदारी दी गयी.

लेकिन किसी कारण से जांच पूरी नहीं हो पायी. जांच पूरी नहीं होने की वजह से 183 मदरसों में से 114 मदरसों का अनुदान रुक गया. ऐसे मदरसों को पिछले 39 महीनों से भुगतान नहीं हो सका है.

जांच के नाम पर नहीं रूकेगा अनुदान

राज्य के 114 मदरसों में लगभग 540 शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी कार्यरत हैं. ऐसे मदरसों के जांच के नाम पर रोके अनुदान को अब नहीं रोका जायेगा. उन्हें अनुदान दे दिया जायेगा. लेकिन उन्हें विभाग की ओर से तय की गयी शर्त को पूरा करना होगा.

शर्त यह है कि इन मदरसों को छह महीने के भीतर अपनी सारी कमियों को पूरा करना होगा. अगर ये मदरसे कमियों को पूरा नहीं करते हैं तो अनुदान तो मिलना बंद होगा ही और उनकी मान्यता भी रद्द की जायेगी.

इन मानकों को करना होगा पूरा

मदरसों को तय किये गये शर्तों में वस्तानिया की पढ़ाई करने वाले मदरसों के लिए 5 कट्ठा जमीन, छह कमरे, छह शिक्षक और पर्याप्त कुर्सी-टेबल होने चाहिए. साथ ही दो मदरसों के बीच चार किलोमीटर की दूरी होनी जरूरी है.

फोकानिया की पढ़ाई वाले मदरसों के लिए मदरसा के नाम पर 20 कट्ठा जमीन, 10 कमरे, 10 शिक्षक, लेबोरेटरी और लाइब्रेरी की व्यवस्था होनी चाहिए. साथ ही फोकानिया स्तर के दूसरे मदरसे से 8 किलोमीटर की दूरी जरूरी है.

मौलवी की पढ़ाई वाले मदरसों के लिए मदरसा के नाम पर 20 कट्ठा जमीन, 12 कमरे, 12 शिक्षक, कुर्सी, टेबल, लाइब्रेरी और लैबोरेट्री होनी चाहिए. साथ ही दूसरे मदरसे से 8 किलोमीटर की दूरी होनी आवश्यक है.

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