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वन विभाग में अब तक 1100 करोड़ का पौधारोपण, करोड़ों का घपला, फाइल पर कुंडली मारकर बैठे अफसर

राजभवन ने भी दिया था निर्देश, करायें स्वतंत्र एजेंसी से जांच, 9.15 लाख पेड़ काटने की अनुमति, एक दूसरे को बचाने में लगे अफसर

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Ranchi : मुख्यमंत्री रघुवर दास के वन विभाग में जंगल का दायरा बढ़ाने के लिये अब तक पौधारोपण में 1100 करोड़ रुपये खर्च कर दिये गये. लेकिन इसके साथ घोटालों की फेहरिस्त बढ़ती चली गई. जिसने जहां चाहा, पौधारोपण में कमाया-खाया. हर वन प्रमंडल में पौधारोपण में करोड़ों की हेराफेरी की गई. वहीं वन विभाग के सिविल डिपार्ट में अफसरों के रहने वाले क्वार्टर बनाने और उसके जीणोद्धार पर भी खूब कमाने-खाने का खेल चला. अब मामला निगरानी तक पहुंच गया है. वहीं पौधारोपण में हुई गड़बड़ी पर राजभवन ने किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने का निर्देश दिया था. अब अफसर एक दूसरे को बचाने में लगे हुये हैं. अब वन विभाग ने विभिन्न परियोजनाओं के लिये 9.15 लाख पेड़ काटने की भी अनुमति दे दी है.

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हर वित्तीय वर्ष में पौधारोपण पर खर्च होता है 75 करोड़ से अधिक

हर वित्तीय वर्ष में पौधारोपण में 75 करोड़ रुपये अधिक खर्च किया जाता है. छोटे पौधों की कीमत तीन रुपये और तीन से चार-फीट तक के पौधों की कीमत 15 रुपये प्रति पौधा है. वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जितने पौधे लगाये जाते हैं उसमें 30 से 40 हजार पौधे जीवित नहीं रहते. वन विभाग ने दावा किया है कि वन क्षेत्र में 947 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है. बावजूद इसके झारखंड का वन क्षेत्र राष्ट्रीय मानक से पांच फीसदी कम है. राष्ट्रीय मानक 33.5 फीसदी है जबकि झारखंड में 29.61 फीसदी वन क्षेत्र है.

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ऐसी है वन विभाग के घोटालों की फेहरिस्त

  • लातेहार सामाजिक वानिकी प्रक्षेत्र- बांस गैबियन लगाने में 75 लाख रुपये का गबन.
  • जामताड़ा वन प्रमंडल: कुंआ, तालाब और पौधारोपण के नाम पर तीन करोड़ की हेराफेरी.
  • दुमका विश्व खाद्य प्रमंडल: नकद भुगतान के नाम पर तीन करोड़ रुपये की फर्जी निकासी.
  • साहेबगंज वन प्रमंडल: 50 लाख पौधे के नाम पर 50 लाख रुपये का गबन.
  • बोकारो वन प्रमंडल: पौधारोपण के नाम पर 50 लाख रुपये का गबन.
  • पाटन वन क्षेत्र: पौधारोपण में चार लाख रुपये की अनियमितता.
  • डालटनगंज वन रोपण प्रमंडल: सड़क के किनारे पौघारोपण के नाम पर 10 लाख रुपये की हेराफेरी.
  • हजारीबाग वन्य प्राणी प्रमंडल: मिट्टी खरीद के नाम पर 50 लाख रुपये का गबन.
  • गुमला वन प्रमंडल: पौधारोपण के नाम पर 3 करोड़ रुपये राशि की निकासी.
  • हजारीबाग नेशनल पाकज्ञ: मनरेगा के तहत 10 किलोमीटर में बांस गैबियन लगाना था, एक भी नहीं लगा. 50 लाख रुपये की अनियमितता.

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सिविल वर्क में भी घोटाला

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वन विभाग के सिविल वर्क में भी घोटाला हुआ. इसकी जानकारी मुख्य सचिव से लेकर निगरानी तक को दी गई है. अपसरों के क्वार्टर बनाने और जीणोद्धार में काफी अनियमितता बरती गई है. इसमें लगभग एक करोड़ रुपये की अनियमितता पाई गई है.

कहां-कहां हुई है अनियमितता

  • एजी मोड़ रांची के समीप छह डुप्लेक्स निर्माण में तीन करोड़ रुपये खर्च किये जाने थे. इस पर भी अनियमितता सामने आई है.
  • कर्मचारी आवासीय कॉलोनी में गोदाम निर्माण में अनियमितता.
  • वरीय वन पदाधिकाकियों की कॉलोनी में सड़क निर्माण में अनियमितता.
  • वरीय वन पदाधिकारियों की कॉलोनी में नाली निर्माण में अनियमितता.
  • वरीय वन पदाधिकारियों की कॉलोनी में पहुंच पथ निर्माण में अनियमितता.
  • थर्ड और फोर्थ ग्रेड कर्मियों की कॉलोनी में पहुंच पथ निर्माण में अनियमितता.
  • पीसीसीएफ कार्यालय भवन के जीणोद्धार में अनियमितत.
  • सीडा भवन के जीणोद्धार में अनियमितता.

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किस वित्तीय वर्ष में कितने पौधे लगाये गये

वित्तीय वर्ष                             पौधों की संख्या
2002-03                              50048131
2003-04                              43410808
2004-05                              44484716
2005-06                              52795276
2006-07                              25824139
2007-08                              37646927
2008-09                              25520637
2009-10                              22342887
2010-11                              24804640
2011-12                              27056850
2012-13                              29592726
2013-14                              24240727
2014-15                              19861734
2015-16                              31494910
2016-17                              2.45 करोड़
2017-18                              2.69 करोड़

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