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प्रदूषित डैम से 11 गांव प्रभावित, सौ से अधिक लोगों का रोजगार ठप

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Ranchi: कांके डैम के प्रदूषित होने के कारण पिछले दिनों हजारों मछलियां मर गयी थीं. इसके बावजूद प्रशासन की ओर से डैम के संरक्षण और प्रदूषण से बचाने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है. घटना के एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी अब तक कांके डैम से दुर्गंध आ रहा है. इसका मतलब यह हुआ कि डैम का पानी अभी प्रदूषित है. इससे न सिर्फ मछलियां मर रही हैं बल्कि डैम के आस-पास की एक बड़ी आबादी प्रभावित हो रही है. अब इसका असर 11 गांवों के ग्रामीणों की रोजी रोटी पर भी पड़ रहा है. मछली बेचकर गुजारा करने वाले मछुआरे किसान बेरोजगारी के कगार पर हैं.

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11 गांव हैं प्रभावित

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स्थानीय निवासियों ने बताया कि डैम के आस-पास करीब 11 गांव है. इनमें कुछ गांव ऐसे भी हैं जिनके निवासी अपने दैनिक कार्यों के लिए जलाशय का उपयोग करते हैं. अब इनकी रोजमर्रा की जिंदगी दुषित हो गई है. यहां के हेसल, विकासनगर, लक्ष्मीनगर, सोसो, पतरागोंदा, हथिया गोंदा, मिसिर गोंदा, कटहर गोंदा जैसे गांव के लोगों पर डैम के दूषित होने का असर कुछ ज्‍यादा ही हुआ है.

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मछुआरों का रोजगार हुआ प्रभावित

डैम के आस-पास रहने वाले लोग मुख्य रूप से मछली बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. डैम के प्रदूषित होने से अब लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है. स्थानीय निवासियों ने बताया कि आस-पास करीब सौ से अधिक मछुआरे हैं, जिनका रोजगार डैम से जुड़ा है. उन्होंने बताया कि डैम के प्रदूषित होने से मुश्किल से दो से तीन किलो मछली ही डैम से निकल रही हैं. जिससे आमदनी प्रभावित हुआ है. पहले हर रोज पांच से दस किलो मछली बिक्री करते थे. जो कमाई होती है उससे अब मुश्‍किल से घर की जरूरत पुरी हो पा रही है.

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नहीं किया गया दीर्घकालीन उपाय

पिछले सप्ताह प्रदूषित कांके डैम में मछलियों के मरने की खबर आयी थी. उसके बाद जिला प्रशासन की ओर से दलील दी गयी कि लगातार हो रही बारिश के कारण डैम में ऑक्सीजन का स्तर कम हो गया है, इसके लिए प्रशासन की ओर से यहां ऑक्‍सी टैबलेट डाले गये. इस जुगाड़ के बाद एक सप्ताह गुजर गये, लेकिन डैम से दुर्गंध अब तक बंद नहीं हुई है.

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स्थानीय निवासी खुद करना चाहते हैं डैम का संरक्षण

गांवों में रहने वाले स्थानीय लोगों ने बताया कि आपसी सहमती से लोगों ने डैम संरक्षण की बात सरकार और विभागिय अधिकारियों से की. लेकिन, इस पर किसी तरह की पहल नहीं की गयी. अब लोगों का मानना है कि स्थानीय लोगों का जुड़ाव डैम से है, ऐसे में इसके संरक्षण के लिए अपने से करना होगा.

डैम बचाने के लिए जहां स्थानीय लोग सक्रिय हैं, वहीं सामाजिक कार्यकर्ता भी इससे अछूते नहीं हैं. डैम के आस-पास रहने वाले विभिन्न समि‍तियों और संस्थाओं के कार्यकर्ता एकजुट हुए हैं. इसी क्रम में शनिवार को डैम में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया गया. सामाजिक कार्यकर्ता अमृतेश पाठक ने बताया कि डैम को बचाने के लिये ग्रामीणों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी तटस्थ हैं. सांकेतिक विरोध प्रदर्शन के बाद पीएचडी, विभाग, नगर निगम से मिल कर डैम सरंक्षण पर पहल करने की बात की जायेगी. इसके बाद भी यदि डैम के प्रति सरकार संवेदनहीन रहती है तो उग्र आंदोलन किया जायेगा. इन्होंने कहा कि डैम सिर्फ राजधानी की खुबसूरती ही नहीं, बल्कि पेयजल और रोजगार आदि के लिए भी उपयेग किया जाता है.

रिर्पोट के अनुसार होगी कार्रवाई

 इस विषय में जल संसाधन, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री चंद्र प्रकाश चैधरी ने कहा कि कांके डैम के लिये जांच रिर्पोट आने वाली है. रिर्पोट के बाद ही उचित कार्रवाई की जायेगी. रिर्पोट के बाद बैठक कर विचार विमर्श किया जायेगा कि डैम में मछलियों के मरने और प्रदूषण निवारण के लिये क्या किया जा सकता है.

 

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