न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

पांच स्वास्थ्य योजनाओं में खर्च हुए 11.30 करोड़, फायदा कुछ भी नहीं

एजी की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

2,182

Ranchi: स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक लुभावने वादे कर सरकार जनता की सेहत से खिलवाड़ करती रही है. राज्य गठन के बाद से ही अलग-अलग सरकारों ने कई घोषणाएं की लेकिन एक भी घोषणा धरातल पर नहीं उतर सकी. पांच स्वास्थ्य सेवा सुविधाओं के निर्माण के लिए जनवरी 2008 में लगभग 13.36 करोड़ रुपए आवंटन किये गये. इस राशि से धनबाद, लोहरदगा, चाईबासा, और दुमका में अलग-अलग पांच सेवा सुविधाएं आरंभ की जानी थी. लेकिन सिर्फ दो स्थान में ही 11 करोड़ रुपए से भी अधिक राशि खर्च कर दी गयी. यह खुलासा एजी की रिपोर्ट में हुआ है. रिपोर्ट में यह स्पष्ट कहा गया है कि नवबंर 2015 में 5.29 करोड़ रुपए खर्च कर दो स्वास्थ्य केंद्र सुविधा के काम को किसी तरह पूरा किया गया. लेकिन इन दोनो स्वास्थ्य केंद्रों में बजट, पदों का सृजन, मशीनों और उपकरणों की खरीदारी नहीं होने के अभाव में आम जनता इसका लाभ नहीं ले पा रही है. अन्य तीन सुविधाओं के लिए 6 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी इन्हें पूरा नहीं किया गया और काम बीच में ही छोड दिया गया. एजी की रिपोर्ट में यह स्पष्ट लिखा है कि विफलताओं के कारण पाचं स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर जनता के 11.30 करोड़ रुपए बर्बाद कर दिए गए. 10 वर्षों से भी अधिक समय में किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा देने में सरकार नाकाम रही है.

eidbanner

कौन-कौन सी थीं योजनाएं ः

  • धनबाद में 3.54 करोड़ की लगात से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया जाना था. भवन का निर्माण तो कर दिया गया लेकिन मशीन और उपकरणों के अभाव के कारण अबतक इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सका है. लोहरदगा में 2.07 करोड़ रुपए की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण किया जाना था. लेकिन राशि खर्च होने के बाद भी अबतक इसे प्रयोग में लाया नहीं जा सका है. अधूरे निर्माण और अनियमितता के बाद इस काम को भी बीच में ही रोक दिया गया.
  • लोहरदगा में ही 1.31 करोड़ की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और दूसरी योजना के तहत आवासीय क्वार्टर का निर्माण किये जाने की रूपरेखा बनी थी. लेकिन 1.06 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद इस प्रोजेक्ट को भी अधर में ही छोड़ दिया गया.
  • चाईबासा में राज्य आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय के निर्माण की योजना वर्ष 2008 में ही तैयार की गयी थी. लेकिन 3.73 करोड़ रुपए की इस योजना में 2.88 करोड़ रुपए खर्च कर अधूरे भवन का निर्माण तो किसी तरह करा दिया गया, लेकिन फिर इस प्रोजेक्ट को भी अधर में छोड दिया गया.
  • दुमका में 1.75 करोड़ रुपए की लागत से क्षेत्रीय खाद्य और औषधी प्रयोगशाला का निर्माण किया जाना था. लेकिन इस दिशा में कोई सकारात्मक कार्य नहीं हुआ. फलस्वरुप यह योजना भी अनियमितताओं की भेट चढ़ गयी है. इस प्रकार लगभग 11.30 करोड रुपए 10 सालों में भवनों के निर्माण के नाम पर ही खर्च कर दिये गये.
Related Posts

दर्द-ए-पारा शिक्षक: उधार बढ़ने लगा तो बेटों ने पढ़ाई छोड़कर शुरू की मजदूरी, खुद भी सब्जियां बेच निकाल रहे खर्च

इंटर तक पढ़ी हैं दो बेटियां, मानदेय नहीं मिलने के कारण आगे नहीं पढ़ा पा रहे

इसे भी पढ़ेंः खरसांवा गोलीकांड : 71 साल बाद भी भरे नहीं जख्म, आजाद भारत का जलियावाला कांड

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: